पटना हाईकोर्ट ने मानव श्रृंखला बनाने के मामले में बिहार सरकार को दिया झटका

सरकार पिछले एक महीने से जागरुकता अभियान के लिए मानव श्रृंखला बनाने की तैयारियां कर रही थी.

पटना हाईकोर्ट ने मानव श्रृंखला बनाने के मामले में बिहार सरकार को दिया झटका

पटना हाईकोर्ट की फाइल फोटो

खास बातें

  • कोर्ट ने कुछ दिन पहले ही दाखिल हुई थी याचिका
  • सरकार पर राजनीतिक फायदे के लिए ऐसा करने का आरोप
  • कोर्ट ने दिया विशेष आदेश
पटना:

पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को बड़ा झटका देते हुए मानव श्रृंखला बनाने को लेकर नया आदेश जारी किया है. गौरतलब है कि बिहार सरकार ने राज्य में दहेज प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ जागरूक करने के लिए मानव श्रृंखला बनाने की बात कही थी. कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य सरकार मानव श्रृंखला बनाने में बच्चे की मदद बगैर उनके अभिभावक की सहमति के नहीं ले सकती.

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कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर बच्चे इस मानव श्रृंखला में शामिल नहीं होते हैं तो सरकार उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर सकती. मंगलवार को इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस राजेन्द्र मेनन की खंडपीठ ने की. गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने यह फैसला शिव प्रकाश राय द्वारा जारी जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया. इस मामले में अब अगली सुनवाई 4 हफ्तों के बाद होगी.  

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शिव प्रकाश राय ने अपनी याचिका में अदालत से कहा था कि यह मामला बाल विवाह अधिनियम 1973 और दहेज उन्मूलन एक्ट 1961 का है. इसमें कुछ भी नया नहीं है. राजनीतिक लाभ के लिए ही सिर्फ इसे नए तौर पर तैयार किया जा रहा है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि पिछले साल भी शराबबंदी कानून के समर्थन में मानव श्रृंखला का आयोजन किया गया था.

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ध्यान हो कि राज्य सरकार पिछले एक महीने से दहेज प्रथा और बाल विवाह के विरुद्ध जनता में जागरुकता अभियान के लिए मानव श्रृंखला बनाने की तैयारियां कर रही थी.