पटना हाईकोर्ट जल जमाव को लेकर सिर्फ अधिकारियों के तबादले से संतुष्ट नहीं

कोर्ट ने साफ कहा कि कुछ अधिकारियों के निलंबन और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले करके राज्य सरकार अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती

पटना हाईकोर्ट जल जमाव को लेकर सिर्फ अधिकारियों के तबादले से संतुष्ट नहीं

पटना हाईकोर्ट.

पटना:

पटना हाईकोर्ट का मानना है कि जल जमाव के लिए दोषी अधिकारियों का तबादला पर्याप्त नहीं. जल जमाव के मुद्दे पर भी जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए बुधवार को कोर्ट ने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा. पटना उच्च न्यायालय में इस मुद्दे पर कई जनहित याचिका दायर हुई हैं. जिसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी साफ किया कि कुछ अधिकारियों के निलंबन और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले करके राज्य सरकार अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती है और कोर्ट देखेगी कि आखिर दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ़ क्या और कार्रवाई की जाए.

अब इस मुद्दे पर अगले शुक्रवार को भी सुनवाई होगी. तब राज्य सरकार को बताना होगा कि आख़िर उसने क्या क्या कार्रवाई की है और जल जमाव हुआ तो क्यों हुआ.

पटना उच्च न्यायालय के रुख से स्पष्ट है कि कोर्ट इस मामले में सख़्त है और जल जमाव के जिम्मेदार अधिकारियों को किसी भी हालत में छोड़ने के मूड में नहीं है. सुनवाई के दौरान कई वकीलों ने अपने-अपने इलाकों के हालात के बारे में कोर्ट को जानकारी दी. उनका कहना था कि अगर नालों की सफ़ाई होती तो शायद वर्षा का पानी समय पर निकल जाता. एक याचिकाकर्ता ने अब तक नालों के निर्माण और उसकी सफाई के संबंधित ख़र्च की जांच की भी मांग की है.

पटना में जल जमाव के लिए जिम्मेदार दो अधिकारियों का हुआ तबादला

इससे पूर्व सोमवार को समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने नगर निगम , नगर विकास विभाग और BUDCO से सम्बंधित कई कामों में ख़ामी पाई. नीतीश कुमार को इस बात में इस बैठक के बाद संदेह नहीं रहा कि कई ख़ामी थीं और सबकी लापरवाही से लोगों को इतनी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ा. इस बैठक के अगले दिन नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद और BUDCO के प्रबंध निदेशक अमरेन्द्र कुमार सिंह का तबादला कर दिया गया था.

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