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पटना हाईकोर्ट ने तस्लीमा के खिलाफ 6 साल पुराना अदालती का फैसला किया रद्द

बेतिया सिविल अदालत ने 24 अक्तूबर, 2011 को नसरीन के खिलाफ सीजेएम अदालत में शिकायत दर्ज कराने के बाद लेखिका के खिलाफ गैर-जमानती वरंट जारी किया था.

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पटना हाईकोर्ट ने तस्लीमा के खिलाफ 6 साल पुराना अदालती का फैसला किया रद्द

पटना की एक अदालत ने 24 मई, 2012 को लेखिका के खिलाफ गैर-जमानती वरंट जारी किया था

पटना: पटना उच्च न्यायालय ने एक निचली अदालत के छह साल पुराने उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें कथित तौर पर एक ट्वीट के जरिए धार्मिक भावना भड़काने के लिए बांग्लादेश की विवादित लेखिका तस्लीमा नसरीन के खिलाफ एक शिकायत का संज्ञान लिया गया था. न्यायमूर्ति अरूण कुमार ने अपने आदेश में कहा कि लेखिका का ट्वीट न तो दुर्भावनापूर्ण था और न ही जानबूझकर कानून व्यवस्था को बाधित करने के लिए था. उन्होंने तस्लीमा नसरीन द्वारा पश्चिम चंपारण जिले में बेतिया की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत के आदेश को चुनौती उेने वाली याचिका पर यह फैसला दिया.

उच्च न्यायालय ने कहा कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामले में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 202 के तहत जरूरी जांच कराए बिना मामले में संज्ञान लिया. इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने निचली अदालत का आदेश रद्द कर दिया. वह ट्वीट 2011 में कथित रूप से मुस्लिम महिलाओं के संबंध में किया गया था और एक हिंदी समाचार पत्र में छपा था.

बेतिया सिविल अदालत ने 24 अक्तूबर 2011 को नसरीन के खिलाफ सीजेएम अदालत में शिकायत दर्ज करायी थी. अदालत ने 24 मई 2012 को मामले में संज्ञान लिया और बाद में लेखिका के खिलाफ गैर-जमानती वरंट जारी किया था. लेखिका ने अपने वकील अमित श्रीवास्तव के जरिए निचली अदालत के फैसले को पटना उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी.

(इनपुट भाषा से)
 


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