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नियोजित शिक्षकों को मिली राहत के खिलाफ आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट जाएगी बिहार सरकार...?

इस फ़ैसले के तुरन्त बाद बिहार सरकार ने घोषणा कर दी कि वो इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सप्रीम कोर्ट जायेगी.  

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नियोजित शिक्षकों को मिली राहत के खिलाफ आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट जाएगी बिहार सरकार...?

प्रतीकात्मक फोटो

खास बातें

  1. पटना हाईकोर्ट ने नियोजित शिक्षकों के पक्ष में आदेश दिया
  2. समान काम के लिए समान वेतन का आदेश
  3. बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट में आदेश को चुनौती देगी.
पटना: पटना हाई कोर्ट ने मंगलवार को बिहार के नियोजित शिक्षकों के एक मामले में एक फ़ैसला दिया कि समान काम के लिए समान वेतन की तर्ज़ पर नियोजित को भी नियमित शिक्षक की बराबर वेतन दिया जाए. इस फ़ैसले के तुरन्त बाद बिहार सरकार ने घोषणा कर दी कि वो इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सप्रीम कोर्ट जायेगी.  

लेकिन सवाल ये है कि नीतीश कुमार सरकार को इस निर्णय को लागू करने में क्या दिक़्क़त है. क़ानूनी आधार पर राज्य के महाधिवक्ता ललित किशोर ने ये कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि इनकी नियुक्ति राज्य सरकार नहीं करती इसलिए समान काम के बदले समान वेतन का फॉर्मूला लागू नहीं होता. इन शिक्षकों को नियुक्ति स्थानीय शासी निकाय (नियोजन इकाई) यानी कि पंचायत, ज़िला परिषद, नगर परिषद और नगर निगम के द्वारा की गई हैं.

लेकिन असल कारण है वित्तीय भार. इस फ़ैसले को लागू करने के बाद क़रीब साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षक का वेतन वर्तमान में उनके मानदेय से दो से ढाई गुना हो जायेगा. एक औसत के अनुसार वर्तमान के 12 से 15 हज़ार से वेतन सीधे 35 से 40 हज़ार हो जाएगा. इसका सीधा असर शिक्षा के पूरे बजट पर पड़ेगा. एक अनुमान के अनुसार राज्य सरकार को सालाना 11 हज़ार करोड़ अतिरिक्त ख़र्च करना पर सकता है. वर्तमान में शिक्षा विभाग का पूरा बजट ही बीस हज़ार करोड़ का है. 

यह भी पढ़ें : नियोजित शिक्षकों के हक में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगी बिहार सरकार

असल मुश्किल नीतीश सरकार की यह है कि अगर शिक्षकों के मामले में समान काम के लिए समान वेतन के फॉर्मूला को मान ले तब उनको लाखों अन्य लोगों को भी नियमित वेतन देना पड़ सकता है. इससे राज्य सरकार पर गम्भीर आर्थिक संकट में आ सकता है.
VIDEO: शर्मनाक फरमान

हालांकि शिक्षकों की तरफ़दारी कर रहे नेताओं का भी मानना है कि आख़िरकार असल लड़ाई सप्रीम कोर्ट में होगी जहाँ कई ऐसे फ़ैसले दिए गए है कि समान काम के लिए समान वेतन का अधिकार लोगों का मौलिक आधार है. अब इन नेताओं का मानना है कि असल में नीतीश कुमार के ऊपर शिक्षकों को दबाव बनाना होगा.


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