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रमजान के दौरान बिहार में इफ्तार के बहाने कैसे हुई सियासत?

बिहार की सियासत में रमजान के दौरान इफ्तार का बड़ा महत्व है. यहां सता पक्ष से लेकर विपक्ष तक रमज़ान के महीने मे इफ़्तार पार्टी का आयोजन करने में कोई तनिक भी पीछे नहीं रहते.

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रमजान के दौरान बिहार में इफ्तार के बहाने कैसे हुई सियासत?

राजद की इफ्तार में शामिल शत्रुघ्न सिन्हा

पटना: बिहार की सियासत में रमजान के दौरान इफ्तार का बड़ा महत्व है. यहां सता पक्ष से लेकर विपक्ष तक रमज़ान के महीने मे इफ़्तार पार्टी का आयोजन करने में कोई तनिक भी पीछे नहीं रहते. राजनेता भी यहां इफ्तार के बहाने सियासी गुणा-गणित को सुलझाने की कोशिशों में जुटे रहते हैं. इस साल इफ़्तार का सबसे पहला आयोजन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आयोजन से शुरू हुआ. जहां एनडीए के केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाह को छोड़कर सभी नेता मोजूद दिखे.

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इसके बाद केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने अपने घर पर पार्टी का आयोजन किया, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर सुशील मोदी और एनडीए के अधिकांश नेता दिखे. पासवान ने इसी इफ़्तार के बाद कहा था कि बिहार के नेता सांप्रदायिक नहीं हो सकते. दरअसल वह अपने बयान से नीतीश कुमार और सुशील मोदी का बचाव कर रहे थे. उन्होंने यह भी कहा कि एऩडीए के लिए बिहार का चेहरा नीतीश कुमार हैं और केंद्र का चेहरा नरेंद्र मोदी.

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इसके बाद हर साल इफ्तार का आयोजन करने वाले उपमुख्य मंत्री सुशील मोदी ने इस बार इफ्तार का आयोजन अंज़ूमन इस्लामिया हॉल में किया. लेकिन यहां ना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिखे और ना पासवान और न ही उपेंद्र कुशवाहा. लेकिन सभी पार्टियों के नेता जरूर मौजूद दिखे. मगर जब केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने इफ़्तार का आयोजन किया तब वहां ना नीतीश दिखे ना सुशील मोदी. नीतीश उसी समय अपने पार्टी के नेता ग़ुलाम गोस के घर पर इफ़्तार की पार्टी में शामिल हुए. 

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लेकिन इसके बाद महागठबंधन के नेताओं के घर पर इफ़्तार का दौर चला. सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने इफ़्तार का आयोजन किया. उसके बाद राजद का इफ़्तार विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के घर पर हुआ. जहां बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा भी पहुंचे. लेकिन पार्टी सुप्रीमो लालू यादव ने तबीयत ख़राब होने की वजह से अपने आप को इस आयोजन से अलग रखा. जब तेजस्वी के घर पर इफ़्तार चल रहा था, तभी जनता दल यूनाइटेड के तरफ़ से भी एक इफ़्तार का आयोजन किया गया. जहां एक बार फिर पासवान और मोदी शामिल हुए. यहां कांग्रेस पार्टी के दो विधायक भी दिखे. कांग्रेस पार्टी ने जिस दिन इफ़्तार का आयोजन किया था, उसी दिन पूर्व केंद्रीय मंत्री ललितेश्वर प्रसाद शाही की अंत्येष्टि के कारण उसे स्थगित कर दिया था.

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जहां तक इफ़्तार में लोगों के शामिल होने का सवाल है तो निश्चित रूप से तेजस्वी यादव के आयोजन में लोगों की संख्या बहुत अधिक थी. वहीं नीतीश कुमार के सरकारी आयोजन और पार्टी के आयोजन में पकवान के तुलना में लोगों की संख्या सीमित थी. इसका एक कारण सीमित लोगों को निमंत्रण बताया जा रहा है.

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