NDTV Khabar

पटना में श्रीकृष्ण सिंह की जयंती के बहाने खूब हुई राजनीति...

एक ओर एनडीए तो दूसरी ओर राजद-कांग्रेस के नेताओं ने जयंती मनाने के बहाने एक दूसरे पर शब्दों के तीर चलाए.

21 Shares
ईमेल करें
टिप्पणियां
पटना में श्रीकृष्ण सिंह की जयंती के बहाने खूब हुई राजनीति...
पटना: बिहार केसरी श्रीकृष्ण सिंह की जयंती के मौके पर जमकर सियासत हुयी. एनडीए घटक दलों ने श्रीबाबू की विरासत पर अपना दावा ठोका तो उधर बिहार कांग्रेस के एक खेमे ने राजद के साथ मिलकर खुद को श्रीबाबू का वारिस करार दिया. एक ओर एनडीए तो दूसरी ओर राजद-कांग्रेस के नेताओं ने जयंती मनाने के बहाने एक दूसरे पर शब्दों के तीर चलाए. सुशील मोदी ने तो यहां तक कह दिया की लालू यादव ने श्रीबाबू के वंसज को जलील करने का काम किया और आज वो जयंती मना रहे हैं. मौका था पटना में एनडीए की ओर से आयोजित जयंती समरोह में पहुंचे बिहार के उपमुख्यमंत्री से लोगों ने अपील की कि श्रीकृष्ण जी का बिहार पुनः बनाइये, उनके सपनों को साकार कीजिए. एनडीए के नेताओं ने अपनी ही सरकार पर आरोप लगाया कि प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के समय लगाए गए उद्योगों के बाद कोई भी कल-कारखाना बिहार में किसी सरकार ने नहीं लगाया.
   
130 वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी चूके नहीं. लालू प्रसाद पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्‍होंने पूछा कि श्रीकृष्ण जी के सपनों को किसने तोड़ा, क्या कांग्रेस और राजद के शासनकाल में बरौनी का खाद कारखाना बंद नहीं हुआ? क्या बरौनी बीजली घर बंद नहीं हुआ? आज नरेंद्र मोदी की सरकार बिहार में बंद पड़े सभी कल कारखाने को पुनः चालू करने का काम कर रही है.
 
बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद दोनों ओर से श्रीबाबू के बहाने 2019 को साधने की कोशिशें हुईं. श्रीबाबू आधुनिक बिहार के निर्माता रहे हैं. आजाद बिहार के पहले प्रधानमंत्री होने के नाते बिहार केसरी का योगदान भविष्य की धरोहर भी है. सूबे के औद्योगिकरण के साथ साथ श्रीबाबू ने समावेशी विकास की जो बुनियाद रखी उसे भुलाया नहीं जा सकता. मगर अफसोस कि आज उस काम को आगे बढ़ाने की बजाय श्रीबाबू को वोट के लिए भुनाने की कोशिश हो रही है.


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement