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प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार को बताया BJP का 'पिछलग्गू', इस आरोप में कितना है दम?

चुनावी रणनीतिकार Prashant kishor ने JDU से निलंबन के बाद पटना में अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में जहां एक ओर बिहार के विकास के बारे में करीब बीस आंकड़े पेश किए, वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भाजपा का 'पिछलग्गू' बता डाला था.

प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार को बताया BJP का 'पिछलग्गू', इस आरोप में कितना है दम?

Prashant kishor: प्रशांत किशोर चुनावी रणनीतिकार हैं. (फाइल फोटो)

खास बातें

  • प्रशांत किशोर ने CM को बताया था BJP का 'पिछलग्गू'
  • जनता दल यूनाइटेड से बाहर हो चुके हैं प्रशांत किशोर
  • बिहार में इस साल के अंत में होंगे विधानसभा चुनाव
पटना:

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) से निलंबन के बाद पटना में अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में जहां एक ओर बिहार के विकास के बारे में करीब बीस आंकड़े पेश किए, वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) को भाजपा का 'पिछलग्गू' बता डाला था. हालांकि उन आंकड़ों पर नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल का कोई सहयोगी ने अभी तक प्रतिवाद नहीं किया है, लेकिन जनता दल यूनाइटेड के नेताओं का कहना है कि ऐसे शब्द का इस्तेमाल आपत्तिजनक है और वह भी ऐसे व्यक्ति के मुंह से जिसने नीतीश कुमार को पिछले पांच वर्षों में सबसे नजदीक से देखा है. प्रशांत किशोर ने नागरिकता कानून के सिलसिले में नीतीश कुमार को 'पिछलग्गू' कहा था. बिहार के विकास के लिए जो केंद्र से हक और हिस्से की बात करते थे उसके संबंध में, लेकिन नीतीश कुमार के समर्थक मानते हैं कि अब वह उतने आक्रामक नहीं रहे जितना भाजपा के साथ 2017 में सरकार बनाने के पूर्व तक थे.

प्रशांत किशोर का कहना है कि जब वो उन्हें 'पिछलग्गू' कहते हैं तो उनके जैसे लोगों के सामने नीतीश कुमार का वह दृश्य होता हैं, जब वह सार्वजनिक मंच से पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग करते हैं और प्रधानमंत्री खारिज कर देते हैं. इसके अलावा जब वह लोकसभा चुनाव में 40 में से 39 सीटों पर जीत दिलाते हैं लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनकी अनुपातिक प्रतिनिधित्व की मांग खारिज कर दी जाती है. जब बिहार को बाढ़ से निजात दिलाने के लिए वह निर्मल और अविरल गंगा के लिए बालू के गाद का समाधान करने की मांग करते हैं, तब दो वर्ष बाद एक समिति बनाकर उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है. इसके अलावा नदियों को जोड़ने की योजना हो या विशेष राज्य का दर्जा, सब पर केंद्र सरकार कुंडली मारकर बैठ जाती है. नीतीश सत्ता के चक्कर में मौन साध लेते हैं. नागरिक संशोधन कानून (CAA) को जिसके ड्राफ्ट का उन्होंने विरोध किया था, उसका अगर लोकसभा में समर्थन किया तो किससे पूछ कर.

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वहीं, जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी का कहना है कि नीतीश कुमार सिद्धांतों से राजनीति करते हैं. अगर ट्रिपल तलाक या धारा 370 पर भाजपा हमारे विचारधारा के खिलाफ चली, तो हमने संसद में इस बात की परवाह किए बिना कि जनता में इसका क्या असर है या होगा हमने इसका विरोध किया. उसी तरीके से एनआरसी (NRC) पर हमारा स्टैंड कायम है और एनपीआर (NPR) की नई प्रश्नावली पर अगर लोगों में चिंता है तो एनडीए की बैठक में हमारे लोकसभा में नेता ललन सिंह ने प्रधानमंत्री के सामने इस मुद्दे को उठाया है. वैसे ही सांप्रदायिकता के मुद्दे पर सरकार में भाजपा होने के बावजूद एक केंद्रीय मंत्री के बेटे को उन्माद फैलाने के आरोप में जेल जाना पड़ा.

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वहीं राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवानंद तिवारी कहते हैं कि नीतीश कुमार ने जब से मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा से हाथ मिलाया है, तब से उनका राजनीतिक कद कम हुआ है और यह बात किसी से छुपी नहीं है कि उनकी बात नहीं सुनी जाती. तिवारी के अनुसार, नीतीश अब किसी से आंखें मिलाकर बात नहीं करते क्योंकि जो देश में भाजपा के द्वारा वह चाहे कश्मीर हो या उत्तर प्रदेश जो कुछ हो रहा है, उसकी असलियत जानते हैं लेकिन मौन रहने पर सत्ता में बने रहने के लिए मजबूर हैं. तिवारी के अनुसार, केंद्र उनकी विकास के मांगों को अनसुना करता है तो वह केंद्रीय मंत्रियों से नहीं मिलते लेकिन यह भी सच है कि दिल्ली में भाजपा के कहने पर वह इसलिए एक अतिरिक्त चुनावी सभा करते हैं क्योंकि भाजपा नाखुश ना हो जाए.

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राज्यसभा सांसद मनोज झा का कहना है कि अब किसी भी मुद्दे पर जनता दल यूनाइटेड के सांसद के दोनों सदनों में भाषण निकालकर आप देख लें तो लगता है कि उनको निर्देश दिया गया है कि बिहार को विशेष राज्य दर्जा या विशेष सहायता की मांग नहीं करनी है. मनोज झा के अनुसार, अगर राजद के पक्ष और दृष्टिकोण को देखें तो यह स्पष्ट होगा कि प्रशांत किशोर ने जदयू और भाजपा के रिश्ते के बरक्स जो बातें कही हैं, वह अक्षरशः सत्य हैं और हम यह पहलू लगातार उजागर करते रहे हैं. अलग-अलग मुद्दों पर 'हमारा अलग स्टैंड है' कहने वाली जदयू ने संसद के दोनों सदनों में कौन सा स्टैंड अंततः लिया, यह संसद के दस्तावेज में दर्ज है. आज की जदयू एक विचार और सिद्धान्तविहीन महज एक चुनावी मशीन है, जिसका अगर औपचारिक विलय किसी भी दिन भाजपा में हो जाए तो कोई भी अचंभित नहीं होगा.

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वहीं जनता दल यूनाइटेड के बिहार के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह का कहना है कि किसी के कह देने से आप किसी को राजनीतिक तमगा नहीं दे सकते. आप यह क्यों नहीं देखते कि नीतीश कुमार के कार्यक्रम, वह चाहे 'हर घर बिजली हो या हर घर नल का जल', केंद्र ने कैसे अपनाया. वैसे ही किसानों के लिए 'फसल बीमा योजना' का हमारे नेता ने कई बिंदुओं पर विरोध किया और अब केंद्र सरकार उसमें सुधार ला रही है. आज बिहार शायद एक मात्र राज्य होगा, जहां सब लोग अपने विचार के अनुसार धरना प्रदर्शन या रैली निकाल रहे हैं.

VIDEO: प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार को दी सलाह, "अपनी बात कहने के लिए किसी का पिछलग्गू ना बनें"