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लीची खाना नहीं, बल्कि गरीबी भी हो सकती है बिहार में 150 से ज्यादा बच्चों की मौत की वजह

जांच के दौरान पता चला कि एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से पीड़ित 383 मरीजों को इलाज के लिए मुजफ्फरपुर लाया गया था. इनमे से 273 मामले मुजफ्फरपुर के थे.

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लीची खाना नहीं, बल्कि गरीबी भी हो सकती है बिहार में 150 से ज्यादा बच्चों की मौत की वजह

मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत को लेकर आई प्राथमिक रिपोर्ट

पटना:

मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से बड़ी संख्या में हुई बच्चों की मौत की जांच को लेकर कई टीमें बनाई गई हैं. मामले की जांच में राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा बनाई टीमें और एजेंसिया भी शामिल हैं. इन सभी जांच एजेंसियों और टीमों को 150 से ज्यादा बच्चों की हुई मौत के पीछे के कारण की जांच की जिम्मेदारी दी गई है. इस घटना को लेकर की गई अभी तक की  जांच में पता चला है कि इन बच्चों की मौत के लिए सिर्फ लीची ही जिम्मेदार नहीं है. प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार इन बच्चों की मौत के लिए गरीबी भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है. जांच के दौरान पता चला कि एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से पीड़ित 383 मरीजों को इलाज के लिए मुजफ्फरपुर लाया गया था. इनमे से 273 मामले मुजफ्फरपुर के थे.

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अस्पताल लाए गए बच्चों में से 223 बच्चियां और कुल 159 बच्चे शामिल थे. इलाज के लिए लाए गए ज्यादातर बच्चों की उम्र एक से तीन साल के बीच थी. इस उम्र के 84 बच्चियों को जबकि 51 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया. इससे यह साफ होता है कि इस उम्र के बच्चे तो लीची के बागान तक पहुंचे होंगे नहीं. इसके उम्र के अलावा जिन बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया उनकी उम्र तीन से पांच साल के बीच की थी. इस उम्र की 70 बच्चियों और कुल 43 लड़कों को इलाज के लिए लाया गया था. जबकि पांच से सात साल की उम्र तक कुल 36 बच्चियों और 31 बच्चों को दीमाग के बुखार की शिकायत के साथ इलाज के लिए लाया गया.

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वहीं, सात से नौ साल के बच्चों में 19 लड़कियों और 14 लड़के जबकि नौ से ग्यारह साल की उम्र के बच्चों में 10 लड़के और सात लड़कियों को इस बीमारी के लिए इलाज के लिया गया. ग्यारह साल से ज्यादा की उम्र के सात लड़कों और एक लड़की को भी भर्ती कराया गया था. 383 बच्चों मे से कुल 373 बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण पाए गए. इन बीमार बच्चों के परिवार के प्राथमिक सर्वे में यह बात सामने आई है कि मुजफ्फरपुर के 289 परिवारों से 280 परिवार गरीबी रेखा से नीचे है. इनमें से ज्यादा लोग मजदूरी करते हैं.

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बीमार हुई 29 लड़कियों को मुख्यमंत्री के कन्या योजना का लाभ मिलता है. जबकि इसमें से 99 परिवारों को इंदिरा आवास योजना या प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है. इनमे से 96 परिवारों के पास राशन कार्ड तक नहीं है. इन 383 परिवारों में से 124 परिवार ऐसे हैं जिन्हें पीडीएस की दुकान से पिछले महीने राशन तक नहीं लिया था. और इन सभी परिवारों में से ज्यादातर परिवार के पास तीन बच्चे हैं. 
 



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