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बाड़मेर के पत्रकार की गिरफ्तारी पर राजस्थान से बिहार तक के भाजपा नेता क्यों हैं परेशान?

बाड़मेर के पत्रकार दुर्ग सिंह राजपुरोहित की एससी-एसटी एक्ट में गिरफ्तारी के बाद जानिए क्यों, राजस्थान से लेकर बिहार तक के बीजेपी नेता परेशान हैं ?

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बाड़मेर के पत्रकार की गिरफ्तारी पर राजस्थान से बिहार तक के भाजपा नेता क्यों हैं परेशान?

प्रतीकात्मक तस्वीर.

खास बातें

  1. बाड़मेर के पत्रकार दुर्ग सिंह राजपुरोहित की गिरफ्तारी
  2. एससी-एसटी एक्ट में फंसने पर हुई कार्रवाई, पीड़ित ने केस को झूठा बताया
  3. बिहार से लेकर राजस्थान के बीजेपी नेता परेशान
पटना: राजस्थान के बाड़मेर से एक निजी चैनल के पत्रकार दुर्ग सिंह राजपुरोहित की रविवार को गिरफ्तारी हुई. वारंट के आधार पर मंगलवार को पेशी के दौरान कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया.राजपुरोहित के ख़िलाफ़ अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार अधिनियम की विभिन धाराओं के तहत एक मामला राकेश पासवान नामक युवक ने दर्ज किया था. जिसके आधार पर उनके ख़िलाफ़ वारंट जारी हुआ.इस मामले में पत्रकार के परिवार वालों का कहना है कि वारंट को तामील करने के लिए पटना पुलिस की टीम नहीं आई, वहीं पटना के पुलिस अधिकारियों का कहना हैं कि इस वारंट के बारे में बारमेर पुलिस से ही उन्हें फ़ोन आया और सूचना मांगी गयी. 

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मामला उस समय और भी पेचीदा हो गया जब शिकायतकर्ता राकेश पासवान ने 'दैनिक भास्कर' अख़बार को किसी दुर्ग सिंह के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराने से इंकार कर दिया.राकेश के पिता ने एनडीटीवी ख़बर से कहा कि उनके बेटे का नाम बेवजह घसीटा जा रहा हैं और वो किसी दुर्ग को नहीं जानता. जिससे पटना पुलिस को शक हो रहा है कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति के इशारे पर पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज हुआ राकेश को जानने वाला कोई व्यक्ति इस साज़िश में शामिल हो सकता है और यह भी आशंका है कि उसने उसके नाम और आधार कार्ड का इस्तेमाल किया हो. बहरहाल, बड़ा सवाल है कि इस मामले में आख़िर वारंट कैसे जारी हुआ?

वहीं राजपुरोहित के परिवार वालों का कहना हैं कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट के कारण बारमेर की भाजपा नेता प्रियंका चौधरी से खटपट चल रहा था जिसके कारण उन्हें फंसाया गया ।हालांकि प्रियंका का इस गिरफ़्तारी के बाद कहना हैं कि कार्रवाई कोर्ट के आदेश से हुई. उनका इस केस से कोई लेना-देना नहीं है.


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उधर,  राजस्थान के हों या बिहार के भाजपा नेता, उनकी परेशानी का कारण हैं इस पूरे मामले में बिहार के पूर्व राज्यपाल और अब जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मालिक का नाम उछाला जाना. प्रियंका , मालिक की भतीजी हैं.और बिहार के राज्यपाल रहते हुए सत्यपाल मालिक दो बार बारमेर तीन दिनों के लिए गये ।एक यात्रा के दौरान एक स्थानीय भाजपा पार्षद के साइबर कैफ़े भी गये थे जहां के एक कर्मचारी से सम्बंधित एक लव जिहाद का मामला दर्ज हुआ था.दुर्गा सिंह ने इस मामले पर सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किए थे.इस पूरे प्रकरण में स्थानीय पत्रकार और प्रियंका के विरोधी ये बात कह रहे हैं कि अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर गिरफ़्तारी हुई. 

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हालांकि पटना में फ़िलहाल कई एजेन्सी के लोग इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अलग अलग जांच कर रहे हैं.लेकिन बिहार भाजपा के नेता मानते हैं कि जैसा सुबूत मिल रहे हैं,उसके बाद इस मामले की सत्यता पर सवाल उठना लाज़िमी हैं. कहा जा रहा कै कि ये मामला अगर एससी- एसटी एक्ट के दुरुपयोग तब्दील हो जाये तो केंद्र और राज्य सरकार की और फ़ज़ीहत होगी.

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