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लालू यादव के लिए एक और बुरी खबर, एक बार फिर से जांच के घेरे में राजद सुप्रीमो

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को लगातार एक के बाद एक झटके मिल रहे हैं. सीबीआई और ईडी से परेशान लालू यादव के लिए इस बार भी कुछ अच्छी ख़बर नहीं है.

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लालू यादव के लिए एक और बुरी खबर, एक बार फिर से जांच के घेरे में राजद सुप्रीमो

लालू यादव (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. एक बार फिर से फंस सकते हैं लालू.
  2. विधायक कोऑपरेटिव की जांच में गड़बड़ी में फंस सकते हैं लालू.
  3. सुशील मोदी ने फिर से किया है एक खुलासा.
पटना: राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को लगातार एक के बाद एक झटके मिल रहे हैं. सीबीआई और ईडी से परेशान लालू यादव के लिए इस बार भी कुछ अच्छी ख़बर नहीं है. बिहार सरकार के सहकारिता विभाग ने विधायक कोऑपरेटिव की जांच में कई अनियमितता पायी हैं. इसका खुलासा उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी में आयोजित सहकारिता सम्मेलन में किया. सुशील मोदी ने कहा कि विभागीय जांच में ये पाया गया कि विधायक कोऑपरेटिव, जो पटना शहर के बीचोबीच है, वहां कई विधायकों ने नियमो का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन कर एक से अधिक प्लॉट लिया है. 

हालांकि, मोदी ने अपने भाषण में लालू यादव का नाम नहीं लिया लेकिन माना जा रहा है कि विधायक कोऑपरेटिव में किसी एक शख्स ने सबसे ज़्यादा नियमो का तोड़ा है, वो हैं लालू यादव. हालांकि, मोदी ने माना कि शिकायतों की जांच में दो बातें साफ थी कि ना केवल प्रावधानों के विपरीत कई विधायक ने एक से ज़्यादा भूखंड लिया, बल्कि कुछ विधायक अपने भूखंड का इस्तेमाल व्यावसायिक कामों के लिए कर रहे हैं, जो नियम के विपरीत हैं. 

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ऐसा माना जा रहा है कि सुशील मोदी का इशारा लालू यादव की तरफ़ था. इससे पूर्व सुशील मोदी ने संवाददाता सम्मेलन कर लालू यादव पर अपने पार्टी के विधायकों के भूखंड अपने या राबड़ी देवी के नाम गिफ़्ट करवाने का आरोप लगाया था. बता दें कि लालू यादव के अधिकृत मकान में पिछले कई वर्षों से किराये पर दफ़्तर चल रहा है. 

इसके बारे में चर्चा करते हुए मोदी ने कहा कि कुछ लोग अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर नियमों के विपरीत अपने भूखंड का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन सवाल है कि क्या नीतीश कुमार की सरकार लालू यादव के नाम से एक से अधिक भूखंड का आवंटन रद्द करेगी या अपने मकान में किराया लगाने के एवज में कोई जुर्माना लगाएगी. 

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बिहार में सत्ता के गलियारे में इस बात की चर्चा होती रही है कि जब महगठबंधन की सरकार थी तब लालू यादव के तमाम दबावों के बावजूद नीतीश कुमार ने विधायक कोऑपरेटिव के फ़ाइल पर अपनी सहमति नहीं दी थी. हालांकि, इस विधायक कोऑपरेटिव के सचिव और अन्य पदों पर लालू यादव की पार्टी के लोगों का पिछले कई वर्षों से क़ब्जा रहा है.

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