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राजद ने क्यों लालू और तेजस्वी के बिना आनन-फानन में बैठक की? 

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने बुधवार को अपने विधायकों और ज़िला अध्यक्षों की एक आपातकालीन बैठक पटना में आयोजित की.

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राजद ने क्यों लालू और तेजस्वी के बिना आनन-फानन में बैठक की? 

बैठक को पार्टी के संगठन चुनाव के मद्देनज़र बुलाया गया था.

खास बातें

  1. पार्टी विधायकों और जिला अध्यक्षों की पटना में हुई इमरजेंसी बैठक
  2. बैठक को पार्टी के संगठन चुनाव के मद्देनज़र बुलाया गया था
  3. संगठन चुनाव इस साल नवंबर में आयोजित किया जाएगा
पटना: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने बुधवार को अपने विधायकों और ज़िला अध्यक्षों की एक आपातकालीन बैठक पटना में आयोजित की. बैठक का आयोजन पार्टी अध्यक्ष लालू यादव के आवास पर किया गया था. हालांकि बैठक में लालू यादव और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव दोनों ही मौजूद नहीं थे. 

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बैठक के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता जगदानंद सिंह ने पत्रकारों को बताया कि इस बैठक को पार्टी के संगठन चुनाव के मद्देनज़र बुलाया गया था. पहले यह चुनाव डेढ़ वर्ष बाद 2019 में होना था, लेकिन अब इसे इस साल नवंबर तक आयोजित किया जाएगा. सिंह के अनुसार 20 नवंबर को पार्टी के राष्ट्रीय परिषद की बैठक का आयोजन किया गया हैं. हालांकि बैठक में शामिल कुछ विधायकों का कहना है कि पार्टी को इस बात का आभास है कि शायद लालू यादव चारा घोटाले के सिलसिले में किसी और मामले में अगर दोषी करार दिए गए तो उन्हें जेल जाना पर सकता हैं. इसलिए पार्टी ने लालू के बिना इस बैठक का आयोजन किया. 

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तेजस्वी भी बन सकते हैं अध्यक्ष
पार्टी के इन विधायकों का कहना है कि अगर परिस्थिति आई तो राष्ट्रीय अध्यक्ष का ताज तेजस्वी यादव को दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसके अलावा पार्टी अब प्रचार और पार्टी के कार्य कुछ वरिष्ठ नेताओं को दे सकती हैं. लालू यादव फ़िलहाल तेजस्वी यादव के साथ दिल्ली में कैंप कर रहे हैं. जहां सीबीआई होटल के बदले ज़मीन मामले में उनसे पूछताछ का इंतज़ार कर रही है. अभी तक दो बार लालू यादव सीबीआई से पूछताछ टालने का आग्रह कर चुके हैं.

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सीबीआई के पास पुख्ता सबूत
इस मामले में सीबीआई का दावा हैं कि लालू यादव के ख़िलाफ़ उनके पास पुख़्ता सबूत हैं. हालांकि पार्टी नेताओं का कहना है कि बुधवार को बैठक के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि लालू यादव एक प्रतीक हैं और पार्टी उनकी अनुपस्थिति में भी चल सकती हैं. वही कुछ अन्य नेताओं का मानना हैं कि इस बैठक में सृजन घोटाले के मुद्दे पर आक्रामक होने की रणनीति बनाई गई.


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