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RJD का भाजपा पर निशाना: राम ने तो देश जोड़ा था. ये उनका नाम लेकर तोड़ना चाहते हैं

शिवानंद तिवारी ने कहा, 'राम का नाम लेकर ये लोग बराबर देश को ठगते आए हैं. राम ने तो देश को जोड़ा था. ये उनका नाम लेकर देश को तोड़ना चाहते हैं.'

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RJD का भाजपा पर निशाना: राम ने तो देश जोड़ा था. ये उनका नाम लेकर तोड़ना चाहते हैं

खास बातें

  1. आरडेजी का भाजपा का हमला.
  2. बोला- पांच साल से मंदिर पर चर्चा नहीं
  3. 'चुनाव आए तो याद आया राम मंदिर'
पटना:

राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता और उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है. मंगलवार को उन्होंने कहा कि आजादी के बाद ऐसी नाकामयाब और नालायक सरकार देश में कभी नहीं बनी. लेकिन बात इतनी ही भर नहीं है. समाज में अमन-चैन कायम रखना किसी भी सरकार का पहला दायित्व है. लेकिन ये लोग तो बराबर नफरत की भाषा बोलते हैं. समाज में जहर फैला रहे हैं. वोट के लिए समाज में वैर और तनाव फैला कर देश को कमजोर करने में लगे रहते हैं. कोई भी समाज, जहां आपसी तनाव और नफरत पैदा की जा रही हो, कैसे आगे बढ़ सकता है?' 

शिवानंद तिवारी ने बयान जारी कर कहा, 'जो भी अयोध्या गए होंगे, उन्होंने देखा होगा कि संपूर्ण अयोध्या में राम के नाम से मंदिरों की भरमार है. याद होगा कि जहां मंदिर बनाने का अभियान चलाया जा रहा है, वहां एक मस्जिद थी. यह कहा गया कि ठीक उसी स्थान पर राम जी की जन्म हुआ था. पूर्व में वहां मंदिर था. जिसको बाबर के सेनापति मीर बांकी ने तोड़ दिया और उसी स्थान पर मस्जिद का निर्माण कर दिया. इस सवाल पर विशेषज्ञ भी बंटे हुए हैं. कुछ का कहना है कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई. कुछ का मानना है कि नहीं यहां मंदिर नहीं था. इस विवाद के हल का क्या तरीक़ा होगा?'

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इस विवाद को सुलझाने के तरीके के बारे में तिवारी का कहना है, 'इस तरह के विवाद के निपटारे का पुराना रास्ता पंचायत का है. अगर पंचायत से मामले का समाधान नहीं निकलता है तो दूसरा रास्ता अदालत का है. पंचायत से इस मामले का हल नहीं निकल पाया. इस बीच मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका और वहां लंबित है. अब ये सुप्रीम कोर्ट पर जल्द फैसले के लिए सार्वजनिक रूप से दबाव बना रहे हैं. इतना ही नहीं, फैसला भी इनके मन मुताबिक़ होना चाहिए. अन्यथा फैसला नहीं मानेंगे. किसी भी तरह के विवाद में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अंतिम होगा. हमारे संविधान की यही व्यवस्था है. मुंह से ये जो भी कहें, इनका आचरण बता रहा है कि इनका यकीन संविधान में नहीं है. यह चिंताजनक है. विशेष रूप से पिछड़ों, दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और स्वतंत्र विचार रखने वाले तमाम लोगों के लिए यह और भी ज्यादा चिंताजनक है. क्योंकि इन्हें जो भी थोड़ा बहुत हासिल हुआ है वह हमारे संविधान के ही बदौलत मिला है.'

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इसके साथ ही शिवानंद ने कहा कि पांच वर्षों से दिल्ली में मोदी जी की सरकार है. इस बीच कभी राम मंदिर की चर्चा नहीं. अब पांच वर्ष बीतने वाले हैं. मोदी जी ने प्रधानमंत्री बनने के पहले देश की जनता से ढेर सारे वादे किए थे. उनको पूरा नहीं किया. बल्कि इनकी सरकार ने आम आदमी का जीवन कठिन बना दिया है. इधर जितने भी उपचुनाव हुए हैं, अधिकांश में भाजपा हारी है. यहां तक कि इनके स्टार प्रचारक और ताकतवर मुख्यमंत्री योगी जी भी अपनी सीट नहीं बचा पाए. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोग मोदी सरकार को बदलना चाहते हैं. भाजपा और इसके समर्थक पराजय की संभावना से डरे हुए हैं. इसलिए ये लोग राम मंदिर का कानफाड़ू शोर मचा रहे हैं. ये चाहते हैं कि राम के नाम पर लोग रोजी, रोटी और रोजगार का सवाल भूल जाएं. बेरोज़गार युवा, किसान, तथा मेहनत-मज़दूरी कर अपना और परिवार का पेट चलाने वाले लोग अपनी तकलीफ और पिछले चुनाव के इनके वादे को भूल जाएँ. राम के नाम पर देश के लोगो के बुद्धि-विवेक पर ये लोग परदा डाल देना चाहते हैं.'

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इसके अलावा तिवारी ने कहा, 'राम का नाम लेकर ये लोग बराबर देश को ठगते आए हैं. राम ने तो देश को जोड़ा था. ये उनका नाम लेकर देश को तोड़ना चाहते हैं. सावधान रहने की ज़रूरत है. इनसे अपने संविधान को बचाना है, देश को बचाना है तो चूकना नहीं है. अगले चुनाव में इनको पलट देना है.'

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