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कानून का राज स्थापित रखना बिहार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : राज्यपाल

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कानून का राज स्थापित रखना बिहार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : राज्यपाल

बिहार के राज्‍यपाल रामनाथ कोविंद (फाइल फोटो)

पटना:

बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने गुरुवार को कहा कि कानून का राज स्थापित रखना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में संगठित अपराध पर कड़ाई से अंकुश लगाया गया है तथा बिना किसी भेदभाव के कानूनी प्रावधानों का अनुसरण कराते हुए राज्य में अपराध-नियंत्रण की ठोस व्यवस्था लागू है. 68वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में तिरंगा फहराने के बाद अपने संबोधन में कोविंद ने कहा कि कानून का राज्य स्थापित रखना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. संगठित अपराध पर कड़ाई से अंकुश लगाया गया है. यही व्यवस्था आगे भी जारी है. बिना किसी भेदभाव के कानूनी प्रावधानों का अनुसरण कराते हुए अपराध-नियंत्रण की ठोस व्यवस्था लागू है. पुलिस तंत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए अनेक कदम उठाये गये हैं ताकि वह अपने दायित्वों का निर्वहन कुशलतापूर्वक कर सके.

उन्होंने कहा कि यह सरकार के संकल्प का ही परिणाम है कि राज्य में समाजिक सौहार्द एवं सद्भाव का वातावरण है. राज्यपाल ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ’कतई बर्दाश्त नहीं’ की नीति पर राज्य सरकार की मुहिम जारी है. भ्रष्ट लोक सेवकों के विरूद्ध प्रभावी कार्रवाई की गयी है. प्रशासन के निचले स्तरों पर भ्रष्टाचार की समस्या के निदान के लिए लोक सेवा का अधिकार कानून लागू है. अब तक 14 करोड़ 78 लाख से अधिक आवेदनों का निष्पादन कर नागरिकों को विभिन्न लोक-सेवाएं एक नियत समयसीमा के अन्तर्गत उपलब्ध कराई गई हैं.


उन्होंने कहा कि बिहार में पूर्ण मद्य-निषेध लागू कर राज्य में सामाजिक पर्वितन की बुनियाद रखी गयी है. संपूर्ण बिहार में इसके प्रति जनसामान्य, विशेषकर महिलाओं, युवाओं एवं बालक-बालिकाओं में काफी उत्साह है. शराबबंदी के अन्य प्रयासों की तुलना में बिहार सरकार का यह प्रयास अनूठा है, क्योंकि मजबूत तंत्र और सामाजिक भागीदारी दोनों इस अभियान के विभिन्न अंग हैं. राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने कहा कि सभी के सहयोग से शराबबंदी एक सामाजिक अभियान का रूप ले चुकी है. पूर्ण शराबबंदी से समाज अधिक सशक्त, स्वस्थ एवं संयमी हो रहा है, जिसका सकारात्मक प्रभाव बिहार की प्रगति में परिलक्षित होगा.

उन्होंने कहा कि शराबबंदी के कारण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार तथा पारिवारिक हिंसा घरेलू कलह एवं सामाजिक अपराध में कमी आई है. राज्यपाल ने कहा कि गत 21 जनवरी को तीन करोड़ से अधिक बिहारवासियों ने लगभग 11 हजार 400 किलोमीटर लंबी अभूतपूर्व एवं ऐतिहासिक राज्यव्यापी मानव श्रृंखला बनाकर शराबबंदी एवं नशा-मुक्ति के पक्ष में अपने संकल्प का प्रकटीकरण किया है. इतनी व्यापक भागीदारी, उत्साह एवं एकता प्रदर्शित कर बिहार वासियों ने सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में शराबबंदी एवं नशा मुक्ति के पक्ष में सशक्त संदेश दिया है. यह एक अनोखी घटना है जिसने इतिहास रच दिया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सुशासन एवं न्याय के साथ विकास के लिए सार्थक प्रयास किये हैं जिसके परिणामस्वरूप राज्य के सभी क्षेत्रों सार्थक में उल्लेखनीय प्रगति हो रही है. न्याय के साथ विकास का नजरिया रखते हुए सभी लोगों, क्षेत्रों और वर्गों को साथ लेकर चलने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है.

राज्यपाल ने कहा कि राज्य में विकास की रणनीति समावेशी, न्यायोचित और सतत होने के साथ-साथ आर्थिक प्रगति पर आधारित है. बिहार को देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लिये सुशासन के कार्यक्रम 2015-2020 निर्धारित कर उसे सम्पूर्ण राज्य में लागू किया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रशासनिक एवं वित्तीय संरचनाओं का सूत्रण इस प्रकार से किया है कि हर क्षेत्र एवं हर वर्ग का सम्यक विकास हो सके. राज्य ने केवल उच्च विकास दर ही हासिल नहीं की है, बल्कि अधिकतर गरीबों को भी गरीबी रेखा के ऊपर उठाया है. यह दर्शाता है कि राज्य के आर्थिक विकास में सभी लोगों की भागीदारी है. राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सात निश्चयों से संबंधित सभी योजनाओं की स्वीकृति दी गई है. आगामी चार वर्षों के लिए लक्ष्य निर्धारित करते हुए योजनाओं का कार्यान्वयन भी प्रारंभ कर दिया गया है.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिला सशक्तीकरण के प्रति हमेशा से संवेदनशील रही है और यह सरकार की नीतियों का अभिन्न अंग है. इस निमित्त राज्य में महिला सशक्तीकरण नीति लागू की गयी है. सरकार ने अपने एक निश्चय आरक्षित रोजगार, महिलाओं का अधिकार के तहत राज्य की सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू कर दी है. राज्यपाल ने राज्य सरकार द्वारा शुरू किए जा चुके दो निश्चय ‘हर घर, नल का जल’ तथा ‘शौचालय निर्माण, घर का सम्मान’ का जिक्र करते हुए कहा कि ‘लोहिया स्वच्छता अभियान’ के तहत अबतक एक अनुमंडल, 9 प्रखंड, एवं 162 पंचायतें ‘खुले में शौच’ से मुक्त हो चुके हैं.

उन्होंने कहा कि बिहार की नई पीढ़ी को शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार का अवसर प्रदान कर सक्षम बनाने के लिए ‘आर्थिक हल, युवाओं को बल’ निश्चय के तहत तीन योजनाओं ‘बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना, ‘मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना’ एवं ‘कुशल युवा कार्यक्रम’ का शुभारंभ गत दो अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर किया गया. राज्यपाल ने बताया कि ‘कुशल युवा कार्यक्रम’ के तहत तीन लाख से अधिक युवाओं ने आनलाइन पंजीकरण कराया है और अब तक 185 केंद्रों पर प्रशिक्षण शुरू किया गया है.

राज्‍यपाल ने कहा कि युवाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ‘बिहार स्टार्ट अप नीति 2016 को मंजूरी देकर 500 करोड़ रुपये की उद्यम पूंजी का प्रावधान किया गया है तथा उद्यमियों से प्रस्ताव प्राप्त करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है. राज्यपाल ने बताया कि युवाओं के लिए सभी सरकारी विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में ‘वाई फाई’ के माध्यम से नि:शुल्क इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने के निश्चय को अगले माह पूरा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार के एक और निश्चय ‘अवसर बढें, आगे पढ़ें’ के तहत राज्य के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान में युवाओं का योगदान, उच्च शिक्षा के विकास एवं कुशल कामगारों के आपूर्ति पक्ष को मजबूत करने के लिए प्रत्येक जिले में जीएनएम संस्थान, पैरा मेडिकल इंस्टीट्यूट, पॉलिटेक्निक संस्थान, महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान एवं अभियंत्रण महाविद्यालय की स्थापना, सभी चिकित्सा महाविद्यालय में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना तथा प्रत्येक अनुमंडल में एएनएम संस्थान एवं सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना के लिए भूमि चिन्हित कर योजनाओं की स्वीकृति दी गयी है.

राज्यपाल ने कहा कि राज्य में पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए बेगूसराय, वैशाली, सीतामढ़ी, भोजपुर और मधुबनी जिले का चयन किया गया है. उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से पूर्णिया, पाटलिपुत्र एवं मुंगेर विश्वविद्यालयों तथा पटना में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय लिया गया है. राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा एक और निश्चय ‘घर तक पक्की गली नालियों का शुभारंभ गत 28 अक्टूबर को किया गया है. इसके तहत गांव एवं शहरों में ‘गली नाली पक्कीकरण निश्चय योजना एवं ‘ग्रामीण टोला संपर्क निश्चय योजना’ का क्रियान्वयन कराया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि बिजली की स्थिति में सुधारने का काम राज्य सरकार ने चुनौती मानकर स्वीकार किया है और इसमें उत्तरोत्तर सुधार आने के साथ राज्य में अधिक विद्युत आपूर्ति 3769 मेगावाट पहुंच गयी है. प्रदेश के 3973 गांवों में से 3856 गांवों में वर्तमान में विद्युत संपर्क उपलब्ध है. शेष गांवों में दिसंबर 2017 तक विद्युत संपर्क उपलब्ध करा दिया जाएगा. दुर्गम क्षेत्रों में स्थित राज्य के 211 गांवों को अक्षय ऊर्जा के माध्यम से विद्युत संपर्कता प्रदान की जाएगी. राज्यपाल ने राज्य सरकार के गत 15 नवंबर को शुरू किए गए ‘हर घर बिजली लगातार’ निश्चय का जिक्र करते हुए कहा इसके तहत वर्ष 2018 के अंत तक ग्रामीण क्षेत्रों में सभी घरों को बिजली का कनेक्शन उपलब्ध करा दिया जाएगा. उन्होंने पथ निर्माण के क्षेत्र में प्रदेश सरकार द्वारा किए गए कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि अब सुदूर क्षेत्र से पांच घंटे में राजधानी पटना पहुंचने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्य योजना बनाकर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है.

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राज्यपाल ने कहा कि राज्य में त्वरित औद्योगिक विकास के लिए ‘बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2016’ लागू की गयी है. औद्योगिक निवेश को अधिक सहज बनाने के उद्देश्य से बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन अधिनियम 2016’ को लागू किया गया है. एकीकृत क्लीयरेंस प्रणाली के तहत औद्योगिक इकाइयों के क्लीयरेंस एवं अनुमोदन के लिए आनलाइन प्रणाली विकसित की गयी है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने समावेशी विकास के लक्ष्यों के साथ कभी समझौता नहीं किया है. सरकार की रणनीति उन सभी नागरिकों को सशक्त बनाने की रही है, जो तुलनात्मक रूप से वंचित हैं और हाशिए पर हैं. राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं तथा बच्चों के शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास पर बल देते हुए अनेक कल्याणकारी कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. इससे पूर्व राज्यपाल ने गारद का निरीक्षण किया तथा मार्च पास्ट की सलामी ली. इस अवसर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित उनके मंत्रिमंडल के कई अन्य सदस्यगण उपस्थित थे.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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