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देश-दुनिया में बसे मैथिल लोगों को बुला रहा है मिथिलांचल, आइए 'सौराठ सभा' में भाग लें

इस वर्ष सौराठ सभा की प्राचीन गरिमा को बचाए रखने के लिए इस बार कई सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने सामूहिक प्रयास किए हैं. इस दिशा में 'मिथिलालोक फाउंडेशन' नामक गैर-सरकारी संगठन विशेष रूप से सक्रिय है.

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देश-दुनिया में बसे मैथिल लोगों को बुला रहा है मिथिलांचल, आइए 'सौराठ सभा' में भाग लें

सौराठ सभा मेले की फाइल फोटो.

मधुबनी: बिहार के मिथिलांचल के मधुबनी जिले में 25 जून से सौराठ सभा लगने जा रही है. इसमें लोगों को शामिल करने के लिए इस वर्ष गीतों के जरिए निवेदन किया जा रहा है. इन गीतों का शीर्षक गीत आजकल सोशल साइटों पर काफी वायरल हो रहा है. मैथिली गीत 'प्रीतम लेने चलू हमरो सौराठ सभा यो' में मिथिलांचल की सांस्कृतिक भूमि पर आने के लिए देश-विदेश में रहने वाले सभी मिथिलावासियों से अपील की गई है. 'दूल्हों का मेला' के नाम से प्रसिद्ध सौराठ सभा मिथिला की एक अति प्राचीन परंपरा है, जिसके तहत मधुबनी के सौराठ में वर्षो से न केवल दहेजमुक्त सामूहिक विवाह का आयोजन होता रहा है, बल्कि विद्वानों द्वारा विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किए जाने की भी परिपाटी रही है. पिछले कुछ वर्षो से हालांकि इस सभा को लेकर मिथिलावासी ही उदासीन से हो गए हैं. 

इस वर्ष सौराठ सभा की प्राचीन गरिमा को बचाए रखने के लिए इस बार कई सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने सामूहिक प्रयास किए हैं. इस दिशा में 'मिथिलालोक फाउंडेशन' नामक गैर-सरकारी संगठन विशेष रूप से सक्रिय है. 

फाउंडेशन का कहना है कि सौराठ सभा को लेकर जागरूकता लाने के उद्देश्य से ही 25 जून को 'चलू सौराठ सभा' नामक एक लोक अभियान भी शुरू किया गया है. इसका उद्देश्य अधिक से अधिक मैथिलिवासियों को अपनी धरती और उसकी संस्कृति से जुड़ने के लिए पर आमंत्रित करना है. 

उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत लोगों को इस सभा से जोड़ने के लिए गीतों का भी सहारा लिया गया है. इनमें से कई गीत काफी लोकप्रिय भी हुए हैं. इन गीतों का शीर्षक गीत 'प्रीतम लेने चलू हमरो सौराठ सभा यो' काफी लोकप्रिय हुआ है. इस गीत के गीतकार जहां खुद डॉ़ बीरबल झा हैं, वहीं इस गीत को मैथिली की गायिका ज्योति मिश्रा ने अपनी मधुर आवाज से और आकर्षक बनाया है.

फाउंडेशन की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "हमारी नई पीढ़ी के लिए परंपरा और आधुनिकता दोनों जरूरी है, इसलिए हमारा प्रयास जहां इन दोनों के बीच समन्वय करना है, वहीं मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करना भी है. इसके लिए हमने बिहार सरकार सहित केंद्र सरकार को भी पत्र लिखा है." 

उन्होंने पत्र के द्वारा मांग की है कि सौराठ सभा के महत्व को देखते हुए इसे देश के एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, ताकि लोगों का रुझान इस ओर बढ़ सके.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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