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शरद यादव ने कहा, बिहार में अंधेर नगरी, चौपट राजा

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार पर सीधा वार शुरू कर दिया है.

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शरद यादव ने कहा, बिहार में अंधेर नगरी, चौपट राजा

शरद यादव की फाइल तस्वीर

पटना: जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार पर सीधा वार शुरू कर दिया है. सोमवार को बिहार के चार-दिवसीय दौरे पर पहुंचे शरद यादव ने नीतीश कुमार को 'चौपट राजा' की संज्ञा दे डाली. शरद ने कहा कि बिहार में 'अंधेर नगरी और चौपट राजा' वाली स्थिति है. शरद यादव ने पहली बार इतने तीखे लहजे का इस्तेमाल किया है. उन्होंने पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राज्य के इतिहास में पहली बार उद्घाटन के ठीक एक दिन पहले किसी कैनाल में दरार आ गई. उन्होंने इसे भ्रष्टाचार का उदाहरण बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी लूट देखने को नहीं मिली, जब उद्घाटन से पहले सब कुछ पानी में बह जाए.

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शरद अपने चार-दिवसीय दौरे के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे. हालांकि पटना पहुंचने पर अब उनके समर्थकों की संख्या और उत्साह दोनों में कमी दिखी. इसका एक बड़ा कारण राजद के नेताओं का उपस्थित न रहना बताया जाता है. फिलहाल राजद  अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव दिल्ली में है.  सोमवार को उनसे रेलवे होटल के बदले मॉल की जमीन के मामले में पूछताछ होनी थी, लेकिन लालू ने अपने वकील के माध्यम से दो हफ्ते का समय मांगा. यह वही मामला है, जिसमें शरद यादव ने 2008 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलकर पूरे कागजात दिए थे और सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी. लेकिन आज इस बारे में उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने बस इतना कहा कि कानून अपना काम करेगा.  

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फिलहाल शरद यादव की सदस्यता रद्द करने के लिए नीतीश गुट द्वारा राज्यसभा के सभापति को अर्जी दी जा चुकी है. वहीं शरद यादव ने दावा किया है कि अधिकांश राष्ट्रीय परिषद और राज्य इकाई के लोग उनके साथ हैं. हालांकि नीतीश गुट द्वारा पटना में आयोजित राष्ट्रीय परिषद की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग और इसमें शामिल विधायकों-सांसदों के हस्ताक्षर शपथ पत्र पर चुनाव आयोग को दिया गया है. जेडीयू महासचिव आरसीपी सिंह ने रविवार को शरद यादव को सलाह दी थी कि जब बिहार का कोई विधायक उनके साथ नहीं है, तब वो अपने गृह राज्य मध्य प्रदेश पर ध्यान केंद्रित करें. इस बारे में पूछे जाने पर शरद यादव ने साफ किया कि वह किसी की प्रतिक्रिया पर जवाब देना उचित नहीं समझते हैं.

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फिलहाल शरद गुट हो या नीतीश गुट सबका ध्यान चुनाव आयोग और राज्यसभा के सभापति के ऊपर टिका है कि वो कितनी जल्दी लंबित याचिका पर निर्णय लेते हैं. शरद समर्थकों का मानना हैं कि जब तक चुनाव आयोग का फैसला नहीं आ जाता, तब तक नई पार्टी बनाने की घोषणा और योजना दोनों को लंबित रखा गया है. हालांकि उन्हें इस बात का अंदाजा है कि चुनाव आयोग में उनके तरफ से दायर याचिका में बहुत ऐसे सबूत और तथ्य नहीं हैं, जिससे पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह उनके पास रह पाएगा. नीतीश कुमार और उनके समर्थक जिस आक्रामक तरीके से उनकी सदस्यता रद्द कराने में लगे हैं, ऐसे में शरद यादव अपने स्वभाव के अनुसार कुछ समय के लिए इस पूरे मामले को कानूनी दांव पेंच में उलझाना चाहते हैं.


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