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नीतीश कुमार पर दिये एक बयान पर शिवानंद तिवारी ने फेसबुक पर मानी गलती

आरजेडी नेता तिवारी यहीं नहीं रुके उन्होंने नीतीश कुमार से पूछा कि आपकी सरकार में मुज़फ़्फ़रपुर बालिकाग़ृह में बच्चियों के साथ जो दरिंदगी हुई उस पर आपकी अंतरात्मा क्यों नही जग रही है.

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नीतीश कुमार पर दिये एक बयान पर शिवानंद तिवारी ने फेसबुक पर मानी गलती

फाइल फोटो

नई दिल्ली: आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी  ने अपने एक बयान पर माफी मांगी है. उन्होंने फेसबुक पर लिखा, 'अपने पिछले बयान में गैसल रेल दुर्घटना की नैतिक जवाबदेही लेकर नीतीश कुमार द्वारा अटल मंत्रिमंडल से त्याग पत्र देने का ज़िक्र मैंने किया था. यह भी आरोप लगाया था कि नीतीश जानते थे कि उनका इस्तीफ़ा अटल जी नामंज़ूर कर देंगे. इसीलिए तौलकर उन्होने इस्तीफ़ा दिया था जिसको अटल जी नामंज़ूर कर दिया था. उस बयान में मुझसे तथ्य की ग़लती हुई है. ललन सिंह ने फ़ोन पर मुझे इसका स्मरण कराया'.  उन्होंन कहा, 'ललन ने बताया कि नीतीश ने उस घटना में अटल जी से अपना इस्तीफ़ा मंज़ूर कराया था. मुझे स्मरण नहीं है. फिर भी ललन की बात पर यक़ीन कर अपनी उस ग़लती के लिए मैं खेद व्यक्त करता हूं. लेकिन मेरा सवाल बना हुआ है. मंत्री के रूप में रेल दुर्घटना की नैतिक जवाबदेही लेकर अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर मंत्रिमंडल से आप इस्तीफ़ा देते हैं'. 




शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार को प्रेस की आजादी की याद दिलाई

आरजेडी नेता तिवारी यहीं नहीं रुके उन्होंने नीतीश कुमार से पूछा कि आपकी सरकार में मुज़फ़्फ़रपुर बालिकाग़ृह में बच्चियों के साथ जो दरिंदगी हुई उस पर आपकी अंतरात्मा क्यों नही जग रही है. आपकी सत्तालोलुपता आपकी अंतरात्मा पर आज क्यों सवार हो गई है. मुज़फ़्फ़रपुर की घटना से बिहार का चेहरा में दुनिया में कलंकित हुआ है. हम इस सवाल को लेकर बिहार के घर-घर में जाएंगे और लोग कान पकड़ कर आपको सत्ता से बेदख़ल करें इसका आह्वान करेंगे. 

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नीतीश अवसरवादी राजनीति कर रहे हैं : शिवानंद तिवारी​

आपको बता दें कि इससे पहले शिवानंद तिवारी ने फेसबुक पर कहा था कि  फेसबुक पोस्ट में कहा कि गैसल में रेल दुर्घटना की नैतिक जवाबदेही लेते हुए प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल से उन्होंने त्यागपत्र दिया था. लेकिन उस त्यागपत्र से उनकी कुर्सी जानेवाली नहीं है यह उन्होंने पहले ही तौल लिया था. नीतीश आश्वस्त थे कि अटल जी उनके त्यागपत्र को मंज़ूर नहीं करेंगे. कुर्सी जाने का कोई जोखिम नहीं था. बल्कि नैतिकता के आधार पर सत्ता त्याग देने वाले राजनेता की छवि भी बनेगी और कुर्सी भी बची रहेगी. यही हुआ भी. अटल जी ने इस्तीफ़ा नामंज़ूर कर दिया था.

 


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