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गांधी की सिद्धांत विहीन राजनीति की कसौटी पर क्या खरे हैं नीतीश : शिवानंद तिवारी

नीतीश कुमार गांधी जी का सिर्फ नाम ही नहीं लेते, बल्कि उनका यह भी दावा है कि वे गांधी जी के 'फ़ॉलोवर' हैं.

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गांधी की सिद्धांत विहीन राजनीति की कसौटी पर क्या खरे हैं नीतीश : शिवानंद तिवारी

खास बातें

  1. शिवानंद तिवारी ने कहा- गांधी जी का जीवन ही उनका संदेश
  2. नीतीश जी के जीवन या राजनीति पर गांधी जी का कितना स्पर्श
  3. नीतीश की राजनीति में सिद्धांत तलाशना तो समुद्र की थाह लगाने जैसा
नई दिल्ली:

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी ) के नेता शिवानंद तिवारी ने कहा है कि नीतीश जी गांधी जी का सिर्फ नाम ही नहीं लेते हैं. बल्कि उनका यह भी दावा है कि मैं गांधी जी का 'फ़ॉलोवर' यानी उनके रास्ते का अनुसरण करने वाला हूं. इस दावेदारी की कसौटी क्या होगी!

तिवारी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि गांधी जी ने लिखा बहुत है. एक सौ से ज्यादा खंडों में उनका समग्र छपा है. लेकिन उन्होंने यह कभी नहीं कहा कि मुझे जानने या समझने के लिए मेरा कहा या लिखा पढ़ो. उनका कहना था कि मेरा जीवन ही मेरा संदेश है. नीतीश जी के जीवन में या उनकी राजनीति पर गांधी जी का कितना स्पर्श है, यह परखने की कसौटी तो गांधी ही हो सकते हैं.

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उन्होंने कहा है कि अभी दो अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर नीतीश जी ने आदेश दिया कि जिन सात बातों को गांधी जी पाप के रूप में देखते थे उन्हें सार्वजनिक जगहों पर लिखा जाए ताकि लोग उनसे सबक ले सकें. गांधी जी द्वारा गिनाए गए सात पापों में एक है सिद्धांत विहीन राजनीति. नीतीश जी की राजनीति में सिद्धांत की तलाश करना तो समुद्र की थाह लगाने जैसा है. पिछले पांच वर्षों की उनकी राजनीति को ही देख लिया जाए. अपनी राजनीति के इस छोटे से अंतराल में जिस प्रकार उन्होंने एक के बाद एक पलटी मारी है उसके आगे तो भजन लाल का आया राम, गया राम फेल हैं! उसके बाद भी जब वे दावा करते हैं कि मैं गांधी के रास्ते पर चलने वाला हूं तो इतनी थेथरई तो नीतीश कुमार के ही बस का है.

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VIDEO : अवसरवादी नीतीश

शिवानंद तिवारी ने लिखा है कि गांधी अनुसरण का उनका दूसरा नमूना भी देख लिया जाए. देश में नीतीश जी अकेले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिनके नाम पर वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्री की दो कोठियां आवंटित हैं. दोनों का बजाप्ता वे उपभोग कर रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री वाली कोठी में वे आजीवन रहेंगे. इसका विधान बना चुके हैं. लोग बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री वाली कोठी के सामने वर्तमान मुख्यमंत्री की कोठी तो दीन-हीन जैसी है. बहुत निर्मम ढंग से बगैर किसी संकोच के करोड़ों की सरकारी राशि उस कोठी में ख़र्च कराई गई है. उसके बाद ताल ठोक कर यह दावा कि मैं गांधी का अनुयायी हूं, इसके लिए एक खास तरह की हिम्मत चाहिए. मानना पड़ेगा कि वैसी हिम्मत नीतीश कुमार के पास है.


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