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शिवानंद तिवारी ने अब मीडिया को दी नसीहत, कहा- 'जो बातें समाज में कु-संस्कार फैलाती हैं, उनका संपादन तो होना चाहिए'

आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी के निशाने पर हमेशा नीतीश कुमार रहते हैं. लेकिन इस बार उन्होंने मीडिया को अपना निशाना बनाया है.

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शिवानंद तिवारी ने अब मीडिया को दी नसीहत, कहा- 'जो बातें समाज में कु-संस्कार फैलाती हैं, उनका संपादन तो होना चाहिए'

शिवानंद तिवारी सोशल मीडिया के द्वारा विरोधियों पर तंज कसते रहते हैं (फाइल फोटो)

पटना: आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी के निशाने पर हमेशा नीतीश कुमार रहते हैं. लेकिन इस बार उन्होंने मीडिया को अपना निशाना बनाया है. दरअसल, शिवानंद तिवारी ने नीतीश सरकार की ओर से जारी बयानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नीतीश के सलाहकार आए दिन गलत भाषा में बयान जारी करते हैं और मीडिया उन्हें ऐसे ही छाप देता है. उन्होंने कहा कि ऐसी बातें जो समाज में भाषा को लेकर कु-संस्कार फैलाती हैं, उनका संपादन तो होना चाहिए.

मीडिया को यह नसीहत उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर साझा की है. उन्होंने लिखा है, 'अगर मैं कहूं कि नीतीश कुमार में नीरज या संजय सिंह या आलोक का अंश है तो आपको ताज्जुब हो सकता है. यही लोग नीतीश कुमार के प्रवक्ता हैं. नीतीश की ओर से विरोधियों पर रोज़ाना हमला करते हैं. आप इनकी भाषा देख लीजिए.'



वे लिखते हैं, 'शरद यादव या लालू जी को लेकर क्या-क्या बोलते हैं ये लोग! पता नहीं अख़बार वाले कैसे उनकी ऐसी बातों को छाप देते हैं. सब नहीं. लेकिन ऐसी बातें जो समाज में भाषा को लेकर कु-संस्कार फैलाती हैं, उनका संपादन तो होना चाहिए. ये लोग रोज़ाना बोलते हैं. नीतीश कुमार उनको पढ़ते हैं. उनको इन लोगों की भाषा पढ़कर आनंद मिलता होगा. तभी तो इन पर लगाम लगाने की ज़रूरत उन्होंने ने नहीं समझी. 

मुझे याद है जब नीतीश एनडीए से बाहर आ गए थे तब सुशील मोदी आदतन नीतीश पर रोज़ हमला करते थे. मीडिया के लोगों ने नीतीश का ध्यान इस ओर खींचा. नीतीश का जवाब था कि मैं तो सुशील मोदी को कभी पढ़ता नहीं हूं. उनको जवाब देने के लिए हमारे संजय सिंह पर्याप्त हैं. इस जवाब में एक तरफ़ तो अहंकार है तो दूसरी ओर वैचारिक विरोधी के प्रति हिक़ारत का भाव भी है. जो अपने लिए अहंकार और विरोधी के प्रति हिक़ारत का भाव रखता है उसके मुंह से वही भाषा निकलेगी जो नीतीश की ओर से बोलने वालों के मुंह से निकलती है. इसलिए यह नहीं माना जाए कि प्रवक्ता अपना बोल रहे हैं. भले ही मुंह प्रवक्ताओं का हो लेकिन बात तो वे नीतीश की बोलते हैं. बावजूद इसके अख़बारों में छपने वाली भाषा का ध्यान तो रखा ही जाना चाहिए.'

बता दें कि शिवानंद तिवारी आए दिन अपने कड़े शब्दों से नीतीश पर हमला बोलते रहते हैं. अपनी बात रखने के लिए वे सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं. 


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