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शिवानंद तिवारी ने नई आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाये

शिवानंद ने कहा, 'आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए मोदी सरकार ने जो नियम बनाए गए हैं उसके आधार पर भाजपा की नज़रों में समाज का कौन तबक़ा मायने रखता है यह बिलकुल स्पष्ट हो जाता है.

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शिवानंद तिवारी ने नई आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाये

राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी(फाइल फोटो)

पटना:

राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता और उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने पर सवाल खड़े किए हैं. शिवानंद ने कहा, 'आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए मोदी सरकार ने जो नियम बनाए गए हैं उसके आधार पर भाजपा की नज़रों में समाज का कौन तबक़ा मायने रखता है यह बिलकुल स्पष्ट हो जाता है. जैसे इस आरक्षण व्यवस्था में सामान्य वर्ग यानी सवर्ण जाति के उन परिवारों को आर्थिक दृष्टिकोण से पिछड़ा माना गया है जिनकी मासिक आमदनी आठ लाख रुपए से कम होगी. दूसरी ओर पिछड़ी जाति को मिलने वाली आरक्षण व्यवस्था में जिनके परिवार की आमदनी आठ लाख रुपए या अधिक होगी उनको 'मलाईदार' मानकर आरक्षण के लाभ से वंचित कर दिया जाएगा. शिवानंद तिवारी का कहना है कि शिक्षा के मामले में भी दोनों प्रकार की आरक्षण व्यवस्थाओं में गंभीर भेद-भाव किया गया है.

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तिवारी के अनुसार पिछड़े, दलित या आदिवासी समाज के छात्रों के लिए निजी उच्च शिक्षण संस्थानों के नामांकन में आरक्षण की व्यवस्था लागू नहीं है. जबकि आर्थिक आधार पर आरक्षण के जो नियम बनाए गए हैं उसके मुताबिक़ निजी उच्च शिक्षण संस्थाओं में भी सवर्ण जाति के ग़रीब छात्रों के लिए नामांकन में आरक्षण प्राप्त होगा. आश्चर्य है कि आर्थिक आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण के जो नियम बनाए गए हैं उसमें पलड़ा सवर्ण ग़रीबों के पक्ष में नहीं बल्कि 'मलाईदारों' के पक्ष में ही झुका हुआ दिखाई दे रहा है. सवर्णों में कितने ऐसे हैं जिनकी मासिक कमाई 65 हजार रुपए होगी या पांच एकड़ के आसपास जोत वाले कितने सवर्ण होंगे. यानी आर्थिक दृष्टिकोण से ग़रीब लोगों को आरक्षण देने के नाम पर सवर्ण समाज के 'मलाईदार' लोगों के ही पक्ष में ही इसके नियम बनाए गए हैं.


VIDEO: आर्थिक आधार पर आरक्षण को राष्‍ट्रपति की मंजूरी


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