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आखिर फेसबुक पर यह कविता शेयर का क्‍या संदेश देना चाहते हैं शिवानंद तिवारी...

शिवानंद तिवारी ने इस बार अपने फेसबुक वॉल पर एक कविता शेयर की है. शिवानंद लिखते हैं, 'इस कविता में आप भोजपुरी व्यंग्‍य की ताक़त देख सकते हैं.'

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आखिर फेसबुक पर यह कविता शेयर का क्‍या संदेश देना चाहते हैं शिवानंद तिवारी...

राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी

पटना:

राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी (Shivanand Tivary) अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं. वो अक्‍सर अपने फेसबुक वॉल पर पीएम मोदी या नीतीश कुमार के खिलाफ कुछ न कुछ लिखते रहते हैं. शिवानंद तिवारी ने इस बार अपने फेसबुक वॉल पर एक कविता शेयर की है. शिवानंद लिखते हैं, 'इस कविता में आप भोजपुरी व्यंग्‍य की ताक़त देख सकते हैं. स्व. रामजी सिंह मेरे जवारी थे. यदा-कदा उनको सुनने का मौक़ा मिला है. उनकी कविताएं लोगों की बात कहती हैं. यही उनकी ताक़त थी. भोजपुरी धीरे-धीरे मर रही है. इस क्षेत्र के जो लोग शहरों में रहते हैं वे अपने घर में भोजपुरी नहीं बोलते हैं. उनको या उनके बाल-बच्चों को भोजपुरी बोलने में शर्म आती है. रामजी सिंह जिस स्थान के वे हक़दार थे वह उनको नहीं मिला. उनके व्यंग्‍य की धार देखिए.

यह कविता देश के मौजूदा हालात पर काफी हद तक चोट करती है. चाहे बात किसानों की हालत की हो या गरीब और अमीर के बीच की खाई की यह कविता सब पर कटाक्ष करती है. यहां तक कि इंसानी फितरत यानी जिनकी कथनी और करनी में अंतर होता है उसे भी बड़ी खूबसूरती से कहा गया है.


मौजूदा राजनीतिक दौर में किसानों की कर्ज माफी की सबसे ज्‍यादा चर्चा होती है. इस कविता में भी किसानों के कर्ज और सरकारी योजनाओं की चर्चा है. कहा गया है कि कर्ज की बीमारी बढ़ती ही जा रही है. नई नई योजनाएं बन रही हैं लेकिन जरूरतमंदों को उसका लाभ नहीं मिल रहा.

आप भी पढ़ें यह कविता...

हुकूमत के हाथी निअर दांत दु गो
देखावे के दोसर, चबावे के दोसर!

चलल अहिंसा के अइसन झकोरा
कि आंधी में उड़ गईलें लन्दन के गोरा
खुलल आंख देखलीं आजादी के झांकी
अमीरन के दोसर, गरीबन के दोसर।

ना उजड़ल गरीबवन के मंडई छवाईल
ना कुचलल किसनवन के हियरा जुड़ाइल
मजदूर किसनवा गरीबवन के घर में
आजादी के किरिन ना तनिको समाइल

बुझाता जे भगवान हो गईलें दु गो
हजूरन के दोसर, मजूरन के दोसर

कहल जाता दोसर, कइल जाता दोसर
देखल जाता दोसर, सुनल जाता दोसर
कइसन बा जादू ई कइसन बा टोना
लिखल जाता दोसर, पढ़ल जाता दोसर।

बढ़ल जाता दिन-दिन करज के बेमारी
बढ़े जइसे द्वापर में द्रोपदी के साड़ी
नया-नया योजना बने आजकल में
कि महंगी में उठेला कोठा-अटारी

चलल घुस अइसन रूप आपन बना के
अन्हारा में दोसर, अंजोरा में दोसर।

बढ़ल रोग अइसन दवाई दियाइल
कि लाखों-करोड़न के गठरी कटाइल
बैदराज अइलन जे नाड़ी निरेखे
ना रोगी के रोगन के लच्छन चिन्हाइल

टिप्पणियां

भला आसरा अब कवन जिनिगी के
दवा बाटे दोसर, दरद बाटे दोसर।

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