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सुशील मोदी ने बालू माफिया से लालू यादव के संबंधों पर और सबूत पेश किये

सुशील मोदी ने बीजेपी दफ्तर में आयोजित संवादाता सम्मलेन में आरोप लगाया कि राज्य के एक बालू माफिया अरुण यादव ने रबाड़ी देवी के मरछिया देवी अपार्टमेंट में एक ही दिन में पांच फ्लैट का रजिस्ट्रेशन कराया.

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सुशील मोदी ने बालू माफिया से लालू यादव के संबंधों पर और सबूत पेश किये

बिहार के उपमुख्‍यमंत्री सुशील कुमार मोदी (फाइल फोटो)

पटना: बिहार में राजद अध्यक्ष लालू यादव की मुश्किलें ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहीं. लालू यादव भले सृजन घोटाले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी के इस्तीफे की मांग कर रहे हों लेकिन सुशील मोदी उल्‍टे उनके खिलाफ राज्य के बालू माफिया से नजदीकी संबंध पर सबूत के साथ आरोप लगाने का अपना सिलसिला जारी रखे हुए हैं. शुक्रवार को सुशील मोदी ने बीजेपी दफ्तर में आयोजित संवादाता सम्मलेन में आरोप लगाया कि राज्य के एक बालू माफिया अरुण यादव ने रबाड़ी देवी के मरछिया देवी अपार्टमेंट में एक ही दिन में पांच फ्लैट का रजिस्ट्रेशन कराया. मोदी द्वारा जारी किये गए कागजात के अनुसार अरुण यादव ने 13 जून 2017 को दो करोड़ 53 लाख में पांच फ्लैट का रजिस्ट्रेशन अपने बेटे राजेश कुमार रंजन, दीपू कुमार और किरण देवी जो उनकी पत्नी हैं, उनके नाम कराया. इससे पहले मोदी ने ही आरोप और सबूत दिए थे कि लालू यादव के करीबी और इन दिनों पुलिस छापेमारी के कारण फरार चल रहे सुभाष यादव ने 3 फ्लैट ख़रीदे थे. सुभाष और अरुण दोनों ने फ्लैटों का रजिस्ट्रेशन एक ही दिन यानी 13 जून को कराया.

सुशील मोदी के अनुसार इनकम टैक्स उनके अपार्टमेंट के फ्लैट जब्त न कर ले इसलिए उन्‍होंने आनन-फानन में ये रजिस्ट्रेशन कराया. और इसके लिए अपने नजदीकी लोगों से ही खरीद बिक्री जल्दी में निबटाया. लेकिन राजद के नेतओं का कहना है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं हैं और अरुण और सुभाष अगर बालू के खनन में लगे थे तब सरकार ने ही इसके लिए उनका चयन किया था.

लेकिन जानकार मानते हैं कि अरुण और सुभाष, लालू यादव से अपनी नजदीकी का फायदा उठाते हुए सारे नियम कानून को धाता बताते हुए अपनी मर्जी से अवैध खनन जिसमें आवश्यक अनुमति के बिना सब काम करना शामिल है, करते रहे. लेकिन जब से सत्ता परिवर्तन हुआ तब से जिस बिहार पुलिस की नाक के नीचे उन्होंने अवैध खनन को महागठबंधन की सरकार के समय एक मुकाम तक पहुंचाया, वही अब उनके पीछे पड़ गई है.

लेकिन जानकार मानते हैं कि जहां सुशील मोदी फ्लैट की खरीद बिक्री की जांच इनकम टैक्स से करने की मांग कर रहे हैं वहीं वो बालू हो या गिट्टी, इन दोनों चीजों के अवैध धंधे की पूरी जांच सीबीआई से करने से क्यों हिचक रहे हैं? ये बात किसी से छिपी नहीं कि राजद के नेता हों या बीजेपी या जनता दल यूनाइटेड, वामपंथी दलों को छोड़कर इस धंधे में सभी दलों के आधे दर्जन से नेता शामिल रहे हैं.

और करीब 100 से अधिक पुलिस अधिकारी, वो चाहे मुख्यलय में बैठने वाले हों या थाना में पदस्थापित अधिकारी या सिपाही, सबकी मिली भगत से ही राज्य में हर साल सरकारी खजाने को 1000 करोड़ से अधिक की चपत लगायी जाती रही है. और जब बिहार पुलिस खुद चोरी में शामिल हो तब उससे उसी जांच में ईमानदारी और निष्‍पक्षता की उम्मीद करना बेमानी होगा. लेकिन देखना यह होगा कि इस मामले में विशेषता रखने वाली केंद्रीय एजेंसी सीबीआई को राज्य सरकार जांच देती भी है या अपने पुलिस से जांच और छापेमारी की औपचारिकता कर पूरे मामले को रफा दफा कर देगी.


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