NDTV Khabar

तेजस्‍वी यादव ने पूछा, 'आठ लाख रुपये सालाना कमाने वाला गरीब कैसे हैं'

उन्होंने कहा कि नई आरक्षण व्यवस्था में आठ लाख सालाना तक की सीमा रखी गयी है. तेजस्वी ने पूछा कि जो व्यक्ति महीने में 66,666 रुपये कमाता है वो ग़रीब कैसे है.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
तेजस्‍वी यादव ने पूछा, 'आठ लाख रुपये सालाना कमाने वाला गरीब कैसे हैं'

कर्पूरी ठाकुर जयंती पर आयोजित पार्टी की सभा में तेजस्‍वी यादव व अन्‍य राजद नेता

पटना:

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अब पूरे बिहार में 'बेरोज़गारी हटाओ, आरक्षण बचाओ' आंदोलन करेगी. इसकी घोषणा नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने की. तेजस्वी गुरुवार को पटना में आयोजित कर्पूरी ठाकुर जयंती पर आयोजित पार्टी की एक सभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि नई आरक्षण व्यवस्था में आठ लाख सालाना तक की सीमा रखी गयी है. तेजस्वी ने पूछा कि जो व्यक्ति महीने में 66,666 रुपये कमाता है वो ग़रीब कैसे है. जो व्यक्ति आयकर के रूप में 72,500 रुपये देता है उसे सरकार ग़रीब कैसे मानती है. इस बैठक में अपने सम्बोधन में तेजस्वी ने कहा को सवर्णों के आरक्षण के वो विरोधी नहीं हैं लेकिन जो मोदी सरकार ने व्यवस्था की है वो अमीर सवर्ण के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गयी है.

तेजस्‍वी यादव ने कहा, 'हम सवर्ण आरक्षण लागू करने के तरीक़े का विरोध कर रहे हैं. बिना किसी पद्धति, जांच, आयोग, सर्वे और सर्वेक्षण के इन्होंने मात्र चंद घंटों में संविधान से छेड़छाड़ कर संशोधन कर दिया. जातिवादी मोदी सरकार द्वारा जल्दबाज़ी में लागू किए गए इस आरक्षण का हश्र नोटबंदी जैसा ही होगा.


पीएम मोदी का विपक्ष पर हमला, बोले- अगड़ी जाति के आरक्षण से विपक्षी दलों की नींद उड़ गई

उन्‍होंने कहा, 'देश के बहुजन वर्षों से 50% फ़ीसदी आरक्षण की सीलिंग बढ़ाने की मांग कर रहे थे लेकिन अन्यायी जातिवादियों ने नहीं बढ़ाया और ना ही बढ़ने दिया लेकिन सवर्ण आरक्षण बिन मांगे चंद घंटों में दे दिया. नागपुरिए जातिवादियों को आपके वोट से डर नहीं लगता. समझिये, ये आरक्षण समाप्ति की शुरुआत है. बताइये, 8 लाख सालाना यानी 66,666 रुपये महीने में कमाने वाला ग़रीब कैसे हुआ? अजीब गणित है भाई? 8 लाख सालाना कमाने पर आपको 20% टैक्स यानी 72,500 रुपये सालाना टैक्स देना पड़ रहा है. जो व्यक्ति 72500 रुपये टैक्स देता है सरकार उसे ग़रीबी का आरक्षण दे रही है. वाह रे विद्वानों! वाह मोदी जी वाह!

आरक्षित कोटे के 28 हजार से ज्यादा पद खाली, OBC कैटेगरी की बड़ी चिंता और अब 10% सवर्ण आरक्षण

बिहार में विपक्ष के नेता ने कहा, 'वो दूसरों की हक़मारी भी करेंगे और वर्ण व्यवस्था में ख़ुद को दूसरों से श्रेष्ठ भी समझेंगे. दूसरों का सामाजिक तिरस्कार भी करेंगे. उनकी जात का मज़ाक़ बनाएंगे. शोषण करेंगे लेकिन समानता का अधिकार नहीं देंगे. उनकी जाति की भी गणना नहीं करेंगे और ना ही होने देंगे. वो असमानता के पक्षधर हैं. आरक्षण विरोधी पहले मेरिट-मेरिट चिल्लाते थे, आरक्षण को भीख कहते थे. अब बहुत ख़ुश हैं. ये दोहरापंथी नहीं चलेगी. या तो आप ये मानिए कि आप जातिवादी हैं और योग्य व प्रतिभाशाली दलित-पिछड़ों की हक़मारी में लगे हैं या फिर ये मानिए की आप सामाजिक श्रेष्ठता के आधार पर आरक्षण के सबसे बड़े अधिकारी हैं. वो पद का दुरूपयोग कर आपकी जाति भी नहीं गिनने देंगे और अपनी जाति भी नहीं गिनेंगे क्योंकि इससे उनकी पोल खुल जाएगी कि कैसे मुट्ठी भर लोगों ने देश के सभी क्षेत्रों और संसाधनों पर जातीय बाहुबल और ठगी के दम पर क़ब्ज़ा जमा रखा है. हमने लड़ाई ठान ली है अब चाहे जेल जाएं या गोली लगे, लड़ेंगे.'

आर्थिक आधार पर आरक्षण पर RJD का यूटर्न: रघुवंश प्रसाद बोले- संसद में हमसे चूक हुई

तेजस्वी के अनुसार जहां अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए वर्तमान कोटा में बढ़ोतरी की जानी चाहिए वहीं पिछड़ी जातियों के लिए वर्तमान 27 फीसदी को 40 फीसदी की सुविधा दी जानी चाहिए. तेजस्वी ने सामाजिक और जातिगत आरक्षण के आंकड़ों को भी सार्वजनिक करने के लिए केंद्र सरकार से एक बार फिर आग्रह किया.

टिप्पणियां

राजद के तेवर से साफ़ है कि वह आरक्षण के मुद्दे पर एक ओर आरक्षण की व्यवस्था ख़त्म करने का डर दिखा रही है वहीं दूसरी ओर पिछड़ी और अनुसूचित जाति के लिए अधिक कोटा की मांग कर इन्हें अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिश भी कर रही है.

VIDEO: आरक्षण का फिर क्या फ़ायदा?


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान प्रत्येक संसदीय सीट से जुड़ी ताज़ातरीन ख़बरों, LIVE अपडेट तथा चुनाव कार्यक्रम के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


Advertisement