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बड़े भाई की सगाई और पिता की अनुपस्थिति पर तेजस्वी यादव ने लिखी 'दिल की बात'

तेजस्वी ने लिखा कि सुख के क्षणों में हमने पिता की कमी महसूस की. हालाँकि मानसिक और वैचारिक रूप से सदैव वो हमारे अंग-संग रहते हैं.

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बड़े भाई की सगाई और पिता की अनुपस्थिति पर तेजस्वी यादव ने लिखी 'दिल की बात'

तेजस्वी यादव की फाइल फोटो

नई दिल्ली:

बिहार में नेता विपक्षा तेजस्वी यादव ने अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव की सगाई और इस दौरान पिता लालू प्रसाद यादव की अनुपस्थिति पर एक पत्र में अपने दिल की बात लिखी है. उन्होंने लिखा है कि हम सभी नौ भाई-बहनों ने जीवन के हर सफर की शुरुआत हमेशा पिताजी के पैर छूकर और उनका आशीर्वाद लेकर ही किया है. बड़े भाई की सगाई के दौरान मन थोड़ा व्यथित था कि भाई के नए सफर की शुरुआत के मौके पर पिताजी हमारे साथ शरीक नहीं हो पाए. तेजस्वी ने लिखा कि सुख के क्षणों में हमने पिता की कमी महसूस की. हालाँकि मानसिक और वैचारिक रूप से सदैव वो हमारे अंग-संग रहते हैं. बचपन से सुनते आया हूँ वो हमें अक्सर कहते है, जो जनसेवा को समर्पित हो उसका कोई निजी जीवन नहीं होता, निजी खुशियां नहीं होती, निजी दुःख नहीं होता. जन-जन के संघर्ष के आगे परिवार की खुशियों का कोई मोल नहीं है.

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उन्होंने लिखा कि भाई के सगाई समारोह में पिता जी की यही बात बार-बार याद आ रही थी. भाई के नए सफर पर पिता के आशीर्वाद का हाथ उनके सिर पर नहीं था, ये शायद पहली बार था. पिता की कमी बहुत खली, लेकिन उनकी ये सीख हमारे साथ रही की निजी सुख-दुःख से ऊपर होकर हमारा जीवन बिहार के लिए समर्पित है और रहेगा. तेजस्वी ने आगे लिखा कि कई बार समझौते आपको और आपके परिवार को सुकून के पल और खुशियां दे जाते हैं. मेरे पिता ने आवाम के हितों से कभी समझौता नहीं किया है.

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उन्होंने आगे लिखा कि विकट से विकट परिस्थिति में भी भी अपने विचार, नीति और सिद्धांत को नहीं छोड़ा और यही कारण है कि सुखद क्षण में वो हमारे साथ नहीं है. मुझे गर्व की अनुभूति होती है कि मैं एक ऐसे पिता का बेटा हूं जिसने अपना जीवन बिहार के लिए, बिहार के लोगों के लिए, शोषितों, पीड़ितों, वंचितो और दबे-कुचलों के लिए समर्पित कर दिया जिसे जेल जाना मंजूर था लेकिन झुकना नहीं.

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VIDEO: तेजस्वी यादव ने रखी अपनी बात.

उन्होंने लिखा कि बिहार की इस संघर्ष यात्रा में ख़ुशी के पल भी कुछ उदास हैं लेकिन हमारे साथ हमारे पिताजी का दिया आत्मबल और विश्वास है. हम भी साधारण इंसान है इसलिए दुख हुआ लेकिन बिहार के लोगों के मान-सम्मान की लड़ाई मे यह दुख बहुत छोटा पड़ गया.


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