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छठ पर्व के बहाने ट्विटर पर क्यों भिड़े सुशील मोदी और तेजस्वी यादव

दोनों नेता छठ पर्व को लेकर एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं, जिसमें परिवारवालों को भी नहीं छोड़ रहे. यह विवाद सुशील मोदी के ट्वीट से शुरू हुआ.

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छठ पर्व के बहाने ट्विटर पर क्यों भिड़े सुशील मोदी और तेजस्वी यादव

बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. दोनों नेताओं ने में शुरू हुआ ट्वीट वार
  2. सुशील मोदी ने पहले किया था ट्वीट
  3. तेजस्वी सुशील मोदी को दे डाली चुनौती
पटना: बिहार में इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद अध्यक्ष लालू यादव में वाकयुद्ध नहीं हो रहा. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव छठ पर्व को लेकर एक-दूसरे पर हमला बोल रहे हैं. दोनों छठ पर्व को लेकर एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं, जिसमें परिवारवालों को भी नहीं छोड़ रहे. यह विवाद सुशील मोदी के इस ट्वीट से शुरू हुआ.
 
भले सुशील मोदी ने अखबारों के खबर के आधार पर यह ट्वीट कर दिया हो कि जांच के दबाव में राबड़ी देवी छठ पर्व करने को लेकर दुविधा में हैं. इस ट्वीट में उन्होंने तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव पर यह भी आरोप लगाए हैं कि तंत्र मंत्र और वास्तुदोष निवारण के नाम पर इन लोगों ने करोड़ों खर्च किए. यह सब मिट्टी घोटाला के बाद शुरू हुआ. हालांकि मोदी ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज नहीं दिया. तेजस्वी यादव के लिए यह ट्वीट जैसे आग में घी डालने का काम किया.  तेजस्वी ने मोदी को 'मर्द हो तो मेरी चुनौती स्वीकार करो' कहकर ललकारने की कोशिश की. पहली बार मोदी की पत्नी को निशाना पर रखते हुए तेजस्वी ने कहा कि गंगा माता में एक तरफ उनकी मां राबड़ी देवी और दूसरी तरफ मोदी की पत्नी पूजा करे. तेजस्वी ने कहा कि कौन कितने लंबे समय तक कितनी कठिन पूजा कर सकती है उससे उसका औकात का पता चल जाएगा. निश्चित रूप से तेजस्वी ने जिस लहजे का इस्तेमाल किया, उसका मोदी को आभास नहीं हुआ. शायद तब वह इस मुद्दे को तब छेड़ते भी नहीं.

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इस वाकयुद्ध के बाद दोनों के समर्थक भी ट्विटर पर एक दूसरे से भिड़ गए हैं. दोनों तरफ से मनपसंद अपशब्दो का इस्तेमाल किया गया, लेकिन बिहार के राजनेता हैं इसलिये सबसे पवित्र पर्व छठ पर भी राजनीति करने से नहीं भूले. हालांकि राजद के लोगो का कहना है कि मोदी ने इस बार पर्व के नाम पर सभी मर्यादा लांघ दी. सुशील मोदी ने कहा कि तेजस्वी के जवाब को उन्होंने नहीं देखा, लेकिन गाली देना उनकी सभ्यता है. इसके कारण ही इतनी कम उम्र में उपमुख्यमंत्री जैसे पद से हाथ धोना पड़ गया. 


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