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तेजस्वी यादव की रघुवंश प्रसाद को चेतावनी, अनर्गल बयानबाजी की तो होगी कार्रवाई

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खास बातें

  1. अपने हर बयान में नीतीश कुमार को निशाना बनाते रहते हैं रघुवंश प्रसाद
  2. तेजस्वी ने कहा, बयानबाजी की तो अध्यक्ष से कार्रवाई के लिए कहेंगे
  3. कांग्रेस ने राजद और जदयू के नेताओं को संयम बरतने की नसीहत दी
पटना: बिहार में राष्ट्रीय जनता दल, अब अपने नेताओं के खिलाफ भी अनर्गल बयानबाजी करने पर कार्रवाई करेगा. यह संकेत उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने दिया. तेजस्वी ने अपनी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह के बयान कि, 'अगर सेनापति का समर्थन मिल जाए तो गर्दा छोड़ा देंगे', पर कहा कि पार्टी उनके इस बयान का समर्थन नहीं करती. तेजस्वी ने रघुवंश को यह भी नसीहत दे डाली कि उन्हें ऐसी ओछी बयानबाजी नहीं करनी चाहिए. ऐसी बयानबाजी से वे बीजेपी को फायदा पहुंचा रहे हैं.

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तेजस्वी ने रघुवंश को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आने वाले दिनों में उन्होंने ऐसे बयान दिए तो वे राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव से अनुरोध करेंगे कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करें. तेजस्वी का यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि रघुवंश जो अपने हर बयान पर नीतीश कुमार को निशाने पर रखते हैं, उत्तर प्रदेश चुनाव के परिणाम के बाद जनता दल यूनाइटेड के नेताओं के अनुसार सारी सीमाएं पार कर चुके हैं. उन्होंने चुनाव परिणाम आने पर न केवल नीतीश कुमार पर यह आरोप लगाया कि वहां बीजेपी के खिलाफ प्रचार नहीं कर उन्होंने बीजेपी को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन किया है. हालांकि तेजस्वी यादव ने जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता को भी नसीहत दी कि वे बयान देने में शब्दों की मर्यादा न भूलें.

इस बीच बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने राजद और जनता दल यूनाइटेड के नेताओं को संयम से काम करने की नसीहत दी. अशोक का मानना है कि महागठबंधन के तीनों दलों में ऐसे लोग हैं जो सरकार बनने के बाद मौका नहीं मिलने के कारण महागठबंधन के खिलाफ परस्पर विरोधी बयान दे रहे हैं. हालांकि कांग्रेस की भूमिका को स्पष्ट करते हुए चौधरी ने कहा कि जब भी कोई महागठबंधन के मूल सिद्धांत से भटकेगा तब कांग्रेस पार्टी मूक दर्शक नहीं  बनी रहेगी.
 
तेजस्वी यादव और अशोक चौधरी के बयान के बाद जनता दल यूनाइटेड बुधवार को नरम दिखी लेकिन उसके नेताओं ने स्पष्ट किया कि अगर महागठबंधन के नेता पर, विपक्ष हो या सहयोगी, कोई उंगली उठाने की हिम्मत करेगा तो उसका जवाब देना उनकी मजबूरी है. हालांकि राजनैतिक जानकर मानते हैं कि बदली हुई राजनैतिक परिस्थितयों में लालू यादव अब नीतीश कुमार से नजदीकी बनाने की कोशिश करेंगे. नीतीश हालांकि पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साधे हुए हैं लेकिन उनकी नाराजगी रघुवंश के हर दूसरे दिन आने वाले बयानों से ज्यादा लालू यादव और तेजस्वी यादव के उन बयानों से भी है जिनमें सार्वजनिक मंच से उन्होंने यह कहा कि उनकी पार्टी के ज्यादा विधायक होने बाबजूद उन्होंने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया.


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