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तेजप्रताप का 55 और तेजस्वी का 30 लाख का क़र्ज़ बिना पैसे दिए कैसे हो गया माफ़?

ये कोई आरोप नहीं बल्कि आयकर विभाग की जांच में इस बात का ख़ुलासा हुआ है.

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तेजप्रताप का 55 और तेजस्वी का 30 लाख का क़र्ज़ बिना पैसे दिए कैसे हो गया माफ़?

अमित कत्याल, तेजस्वी और तेजप्रताप यादव के सबसे बड़ी बहन मीसा भारती पर भी मेहरबान रहे...

खास बातें

  1. आयकर विभाग की जांच में हुआ ख़ुलासा हुआ है
  2. दोनों भाइयों ने एक ही व्यक्ति अमित कत्याल से क़र्ज़ लिया
  3. अमित कत्याल राजद के सांसद प्रेम गुप्ता के क़रीबी हैं
नई दिल्ली: राजद अध्यक्ष लालू यादव के दोनों बेटों तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव में कई समानताएं हैं. दोनों पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ने के बाद पहली बार में ही मंत्री बने. एक और समानता भी है जिसकी चर्चा हो रही है. आयकर विभाग के अनुसार दोनों भाइयों ने क़र्ज़ लिया लेकिन क़र्ज़ देने वाले ने बिना पैसे लिए ख़ुद माफ कर दिया.

ये कोई आरोप नहीं बल्कि आयकर विभाग की जांच में इस बात का ख़ुलासा हुआ है. दोनों भाई ने एक ही व्यक्ति अमित कत्याल से 30 लाख और 55 लाख रुपये का क़र्ज़ लिया और बाद में अमित कत्याल ने ये क़र्ज़ माफ़ कर दिया. अमित कत्याल, लालू यादव के परिवार के क़रीबी रहे हैं. अमित कत्याल, तेजस्वी और तेजप्रताप यादव के सबसे बड़ी बहन मीसा भारती पर भी मेहरबान रहे.

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आयकर विभाग का कहना है कि अमित की कंपनी पर छापेमारी में उन्हें एक दस्तावेज़ मिला जिसके अनुसार 31 मार्च 2012 को मीसा भारती को को 2,70,000 (दो लाभ सत्तर हजार रुपये) का भुगतान ब्रोकरिज के रूप में भुगतान किया गया.

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मीसा 2006 से अमित कत्याल के साथ किंगडम होटल एंड रिजॉर्ट प्रा. लिमिटेड में निदेशक हैं. इन लोगों ने मिलकर पटना के पास बिहटा में एक बियर फ़ैक्टरी लगाई थी जिसे बाद में बेच दिया.

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जांच एजेंसियो का मानना है कि अमित कत्याल राजद के सांसद प्रेम गुप्ता के क़रीबी हैं और आयकर विभाग के अनुसार जब लालू यादव रेल मंत्री थे तब वह उन कंपनियों को सलाह देते थे जो रेलवे में कोई ठेका लेने को इच्छुक होते थे और कुछ कंपनियों में उनकी सीधी भागीदारी होती थी लेकिन लालू यादव और उनके परिवार के लोगों द्वारा अगर कोई बेनामी संपत्ति अर्जित की गई तो अमित कत्याल की सक्रिय भूमिका रही है. 


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