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दिल्ली से बिहार तक कयासबाजी के बीच 'खीर' वाले बयान पर मोदी सरकार में मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की सफाई

उपेंद्र कुशवाहा ने पहले कहा था, 'यदुवंशी का दूध, और कुशवंशी का चावल मिल जाये तो खीर बढ़िया होगी'. उनके इस बयान के बाद बिहार से लेकर दिल्ली तक कयास लगाये जाने शुरू हो गये थे

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दिल्ली से बिहार तक कयासबाजी के बीच 'खीर' वाले बयान पर मोदी सरकार में मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की सफाई

उपेंद्र कुशवाहा मोदी सरकार में मंत्री हैं. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. उपेंद्र कुशवाहा ने कहा किसी समुदाय विशेष न जोड़ा जाये
  2. शनिवार को दिया था खीर वाला बयान
  3. तेजस्वी यादव ने दी थी प्रतिक्रिया
पटना: मोदी सरकार में मंत्री और राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी के नेता उपेंद्र कुशवाहा के खीर वाले बयान के बाद लगाये जा रहे कयासों के बीच अब उन्होंने सफाई दी है कि सामाजिक एकता की बात की थी, इसे किसी समुदाय विशेष न जोड़ा जाए. कुशवाहा ने कहा, 'न तो आरजेडी का दूध मांगा है, न बीजेपी की चीनी. मैंने सामाजिक परिप्रेक्ष्य में ये बात कही थी, किसी पार्टी का नाम नहीं लिया था'. इससे पहले शनिवार को उपेंद्र कुशवाहा ने पहले कहा था, 'यदुवंशी का दूध, और कुशवंशी का चावल मिल जाये तो खीर बढ़िया होगी'. उनके इस बयान के बाद बिहार से लेकर दिल्ली तक कयास लगाये जाने शुरू हो गये थे कि क्या लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए का एक और घटक दल टूटने जा रहा है. कुशवाहा इससे पहले भी एनडीए के रुख के खिलाफ बयान देते रहे हैं. 
 

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तेजस्वी ने किया था बयान का स्वागत
कुशवाहा के इस बयान के बाद आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी प्रतिक्रिया देने में देर नहीं लगाई. तेजस्वी ने कहा, 'नि:संदेह उपेन्द्र जी, स्वादिष्ट और पौष्टिक खीर श्रमशील लोगों की ज़रूरत है. पंचमेवा के स्वास्थ्यवर्धक गुण ना केवल शरीर बल्कि स्वस्थ समतामूलक समाज के निर्माण में भी ऊर्जा देते हैं. प्रेमभाव से बनाई गई खीर में पौष्टिकता, स्वाद और ऊर्जा की भरपूर मात्रा होती है. यह एक अच्छा व्यंजन है.'

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आखिर कुशवाहा का क्या था पूरा बयान
शनिवार को पटना में एक कार्यक्रम में उपेन्द्र कुशवाहा ने खीर बनाने की एक विधि बतायी. उनके अनुसार अगर यदुवंशियों मतलब यादव का दूध और कुशवंशी मतलब कुशवाहा उसमें चावल मिलाये तो दुनिया का सबसे स्वादिष्ट खीर तैयार होगी. फिर उन्होंने अपनी पार्टी के ब्राह्मण नेता शंकर झा आज़ाद की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि ये चीनी मिलाएंगे और दलित नेता भूदेव चौधरी उसमें तुलसी डालेंगे. कुशवाहा ने कहा कि अगर यह समीकरण एक साथ हो जाये तो राज्य की सता पर क़ाबिज़ हो सकते हैं. हालांकि इस सम्मेलन में कुशवाहा की पार्टी के कई नेताओं ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग की है.

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मंत्री पद की वजह से साथ नहीं छोड़ रहे कुशवाहा?
जानकारों के अनुसार कुशवाहा अभी धीरे-धीरे लोकसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति साफ़ कर रहे हैं. माना जा रहा है कि उपेन्द्र कुशवाहा फिलहाल मंत्री पद की वजह से भाजपा के साथ रहना चाहते हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव से पूर्व अगर राजद के साथ सीट बंटवारे पर ठीक-ठाक बात बन जाती है तो वे एनडीए के ख़िलाफ़ गठबंधन के साथ होने में परहेज़ नहीं करेंगे.
 




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