NDTV Khabar

वेंकैया नायडू ने जनता दल यूनाइटेड के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव को दिया कुछ और समय

हालांकि शरद यादव और उनके समर्थकों का प्रयास हैं कि इस मामले को राज्य सभा के ऐथिक्स कमिटी के पास भेज दिया जाए जिससे ये मामला कुछ और लम्बा खिंचा जा सके.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
वेंकैया नायडू ने जनता दल यूनाइटेड के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव को दिया कुछ और समय

राज्य सभा के सभापति वेंकैया नायडू (फाइल फोटो)

पटना: राज्य सभा, के सभापति वेंकैया नायडू ने जनता दल यूनाइटेड के पूर्व अध्यक्ष , शरद यादव को कुछ और समय दिया हैं. यादव, के मामले की सुनवाई अब 8 नवंबर  को होगी पहले इस सुनवाई का समय 30 अक्टूब को रखा गया था. शरद यादव को ये समय, नायडू ने उनके आग्रह पर दिया हैं. हालांकि उन्हें ये साफ़ कर दिया गया हैं कि इसके बाद उन्हें और समय नहीं दिया जाएगा लेकिन राज्य सभा, के सभापति के सामने इस सुनवाई के दौरान यादव के साथ उनके वक़ील रह सकते हैं. माना जा रहा हैं कि पूर्व केंद्रीय मंत्री, कपिल सिब्बल यादव के लिए जिरह कर सकते हैं.

हालांकि शरद यादव और उनके समर्थकों का प्रयास हैं कि इस मामले को राज्य सभा के ऐथिक्स कमिटी के पास भेज दिया जाए जिससे ये मामला कुछ और लम्बा खिंचा जा सके. हालाँकि सभापति नायडू ने जो रुख़ अख़्तियार किया हैं उससे शरद समर्थक तय मान रहे हैं कि उनकी सदस्यता बचना मुश्किल हैं.

यह भी पढ़ें : एंजियोप्लास्टी के बाद उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू को मिली एम्स से छुट्टी

इसके पीछे नायडू जब पार्टी अध्यक्ष होते थे तब राजद की एक सभा में भाग लेने के आधार पर जयनारायण निषाद की राज्य  सभा सदस्यता रद करवाई थी. वहीं वर्तमान स्थिति में शरद ने ना केवल राजद की रैली में भाग लिया बल्कि पार्टी के अध्यक्ष नीतीश कुमार के आग्रह के बावजूद समानांतर सभा की.

हालाँकि शरद समर्थक मानते हैं कि गठबंधन के ख़िलाफ़ जाने का जहां तक मामला हैं तो नीतीश जब भाजपा के साथ पूर्व में थे तब भी राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया. उसके बाद महागठबंधन में रहने के बावजूद उन्होंने रामनाथ कोविंद को पहले दिन से अपना समर्थन दिया. फिर भाजपा के साथ सरकार बनाने के बाद उन्होंने उप राष्ट्रपति के चुनाव में नायडू के ख़िलाफ़ गोपालकृष्ण गांधी को वोट दिया.

टिप्पणियां
VIDEO : शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता रद्द करने की मांग उठाई जेडीयू ने​


अपनी सदस्यता ख़तरे में देख शरद ने हालाँकि समानांतर पार्टी बनायी हैं. उन्होंने चुनाव आयोग के सामने असल पार्टी होने का दावा किया हैं लेकिन अभी तक चुनाव आयोग ने अपना अंतिम फ़ैसला उनके मामले में नहीं दिया हैं. लेकिन शरद समर्थक और विरोधी दोनों को उम्मीद हैं कि ये फ़ैसला अब 8 नवंबर  के पहले आ सकता हैं.


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement