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खत्म होने की कगार पर है लोकनायक का गांव, ग्रामीणों की गुहार पर भी नहीं ली गई सुध

लोकनायक जयप्रकाश नारायण का गांव सिताबदियरा खत्म होने की कगार पर है. वजह है सरयू नदी के पानी के कारण हो रहा बहुत ज्यादा कटाव.

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खत्म होने की कगार पर है लोकनायक का गांव, ग्रामीणों की गुहार पर भी नहीं ली गई सुध

खत्म होने की कगार पर है जेपी का गांव

खास बातें

  1. खत्म होने की कगार पर है जयप्रकाश नारायण का गांव सिताबदियरा
  2. गांव में तेजी से बढ़ रहा है बाढ़ पानी का जलस्तर
  3. राज्य सरकार से नहीं मिली ग्रामीणों को मदद
नई दिल्ली: लोकनायक जयप्रकाश नारायण का गांव सिताबदियरा खत्म होने की कगार पर है. वजह है सरयू नदी के पानी के कारण हो रहा बहुत ज्यादा कटाव. हालत ये आन पड़ी है कि अगर पानी का स्तर ऐसे ही बढ़ता रहा और मिट्टी का कटाव जारी रहा, तो बिहार और उत्तरप्रदेश को बांटने वाला बांध टूट जाएगा. ये ही एकमात्र सड़क है,  जो जेपी के गांव को सड़क मार्ग से जोड़ती है. इसे बीएसटी यानि बकुलाहा संसारटोला बांध भी कहा जाता है. इसके टूटने से हजारों लोगों को जान-माल का नुकसान होगा.  इसका नतीजा ये होगा कि सिताबदियारा गांव के यूपी और बिहार में पड़ने वाले कई टोले जलमग्न हो जायेंगे. इसमें वो घर भी शामिल होगा, जहां पर जेपी रहा करते थे और वो घर भी है, जहां के बारे में दावा है कि वहां जेपी का बचपन गुजरा है. सरकार और नेताओं की उदासीनता के कारण गांव के युवक आगामी 11 अक्टूबर को एक दिन के लिए अनशन पर बैठने जा रहे है. इनकी मांग है कि कोरे आश्वासन से कोई काम नहीं चलेगा बल्कि जमीन पर जब तक ठोस कदम नही दिखेगा, तब तक आंदोलन किसी ना किसी रूप में जारी रहेगा.  

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गौरतलब है कि  छपरा जिले के रिविलगंज ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सिताब दियरा इलाके में करीब पांच सात सालों से सरयू नदी  रास्ता बदल चुकी है. पहले ये नदी रिविलगंज से होकर गुजरती थी, परंतु अब ये अपनी मूल जगह  से हटकर गांव के पास से बहने लगी है. नदी को पुराने जगह पर लाने की कोई कोशिश भी नहीं की गई. नदी के बहाव को रोकने के लिए सरकार की ओर से करीब 70 करोड़ खर्च करने का दावा किया गया है, लेकिन हालात जस के तस बने हुए है.
 
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खत्म होने के कगार पर है जेपी का गांव

स्थानीय लोगो का मानना है प्रशासनिक अधिकारी और ठेकेदार इसे सिर्फ इसे कमाई का जरिया मान रहे है, जिस वजह से कटाव पर रोक नहीं लग पा रही. हालत ये है कि कई टोला के टोला सरयू नदी में समा  चुके है. हजारों एकड़ खेत भी नदी के गोद में समा गए है. बावजूद इसके ना तो प्रशासन और ना ही सरकार की तरफ से लोगों को कोई मुआवजा मिला है और ना ही  रोजगार.कई लोगों के बर्षों की जमा पूंजी लगाकर बनाए गए घर नदी के कटाव में समा चुके है, जो लोग गांव से नहीं निकले है वो भूखे मरने के कगार पर है.


जेपी फाउंडेशन के शशि भूषण सिंह ने इस मामले में स्थायी समाधान की उम्मीद जताते हुए  प्रधानमंत्री तक को पिछले महीने चिट्ठी लिखी थी, लेकिन कोई जवाब अभी तक नहीं मिला है. वहीं, सिताबदियरा के अलेखटोला के अनिल कुमार सिंह उर्फ डब्बू कहते है कि जेपी के जन्मदिन पर 11 अक्टूबर को  हम जैसे कई युवक आठगांवा के पास सखिया ढ़ाला पर उस जगह धरना पर बैठेंगे, जहां से बांध का कटाव हो रहा है. उस दिन धरना स्थल पर गांव के लोग जुटेंगे और फिर फैसला लिया जाएगा कि आगे क्या कार्रवाई करनी है.           

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बिहार और उत्तरप्रदेश के तीन जिले आरा, बलिया और छपरा में है जेपी का गांव सिताबदियरा. मोदी सरकार आने पर लालाटोला में  बिहार सरकार की ओर से पुस्तकालय और केंद्र सरकार का जेपी राष्ट्रीय स्मारक बन रहा है. कहने को कागजी तौर पर कई योजनाएं जरुर बनी है, लेकिन कोई भी सरयू नदी के कटाव को रोक पाने में सक्षम नहीं हो पा रही है. यहां जेपी के नाम पर लूट खसोट तो जारी है, लेकिन गांव बचेगा या नहीं इसको लेकर कोई कुछ बताने को तैयार नहीं है. ध्यान रहे कि बिहार में जेपी के राजनीतिक शिष्य रहे नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं तो और दूसरे शिष्य सुशील मोदी उप मुख्यमंत्री. 

VIDEO: जेपी की विरासत पर सियासत
राजद के सुप्रीपो लालू प्रसाद भी जेपी के शिष्य ही कहे जाते है  फिर भी जेपी के गांव का दर्द कोई सुनने वाला नहीं है. और तो और पूर्व केन्द्रीय मंत्री और छपरा के सांसद राजीव प्रताप रुढ़ी ने सिताबदियरा पंचायत को  सांसद आदर्श ग्राम योजना  के तहत गोद भी लिया है फिर भी हालात में अब तक कोई सुधार नजर नही आ पाया है.


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