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NRC के मुद्दे पर बिहार में बीजेपी और जेडीयू के बीच 'वाकयुद्ध'

जेडीयू और बीजेपी के बीच तू-तू, मैं-मैं तेज़ हो गई तो मामले को ठंडा करने की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने अपने ऊपर लिया और उन्होंने इस समस्या के लिए कांग्रेस पार्टी के ऊपर ठीकरा फोड़ दिया.

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NRC के मुद्दे पर बिहार में बीजेपी और जेडीयू के बीच 'वाकयुद्ध'

अब बीजेपी नेता बिहार में एनआरसी की मांग कर रहे हैं.

पटना:

बिहार में एनआरसी के मुद्दे पर सत्तारूढ़ जनता दल युनाइटेड और बीजेपी के बीच वाकयुद्ध तेज़ होता जा रहा है. जबसे असम में नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजन की सूची आई है तब से एक ओर बीजेपी के नेता बिहार में भी बांग्लादेशी घुसपैठियां की संख्या लाखों में बताते हैं और यहां भी एनआरसी लागू करने की मांग कर रहे हैं. इस पूरे विवाद की शुरुआत पिछले शनिवार को जैसे ही असम के लिस्ट आयी उसके बाद जनता दल युनाइटेड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने कहा कि ग़लत तरीक़े से कराए गए एनआरसी के कारण आज लाखों लोग अपने ही देश में विदेशी हो गए हैं और इतने जटिल विषय को बिना सूझ-बूझ के लागू करना और वह भी केवल राजनीतिक फ़ायदे के लिए इसका निश्चित रूप से परिणाम ग़लत होगा.  इसके बाद बारी आरएसएस से जुड़े और अब राज्यसभा सांसद प्रोफ़ेसर राकेश सिन्हा ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक पोल शुरू किया कि क्या बिहार के सीमांचल में एनआरसी होना चाहिए. उनका तर्क है कि घुसपैठ एक तरह का मौन आक्रमण है जो कि बिहार के कुछ ज़िलों ख़ासकर अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज में साफ़ दिखता है जिसके कारण वहां का सामाजिक वातावरण और धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र भी कमज़ोर हुआ है. 

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साफ़ था कि बीजेपी के नेता जनता दल युनाइटेड के नेताओं से इस मुद्दे पर इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते लेकिन अगर जेडीयू के नेता अगर कुछ बोलेंगे उसका वो जवाब भी देंगे. लेकिन बुधवार को नीतीश मंत्रिमंडल के मंत्री भी इस विवाद में कूद गए और पिछड़ा या अति पिछड़ा कल्याण मंत्री और भाजपा नेता विनोद सिंह ने कहा कि बिहार में क़रीब 40 लाख घुसपैठिया हैं और एनआरसी लागू कर इन्हें निकाला जाना चाहिए. विनोद सिंह जो ख़ुद कटिहार ज़िले से आते हैं उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठिया अवैध रूप से आकर बस गए हैं और ये दिन-रात अपराध में लगे रहते हैं. इस पर जवाब देने की बारी जनता दल यूनाइटेड की थी और उद्योग मंत्री श्याम रजक ने कहा कि बिहार में NRC की बिलकुल ज़रूरत नहीं है. यहां पर कोई घुसपैठिया नहीं है. 

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जेडीयू और बीजेपी के बीच तू-तू, मैं-मैं तेज़ हो गई तो मामले को ठंडा करने की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने अपने ऊपर लिया और उन्होंने इस समस्या के लिए कांग्रेस पार्टी के ऊपर ठीकरा फोड़ दिया. मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और असम ऐसे सीमावर्ती राज्य हैं, जहां कांग्रेस सरकारों की लापरवाही के चलते कई दशकों तक पड़ोसी देशों से बड़े पैमाने पर घुसपैठ जारी रहने से इन राज्यों की संस्कृति पर बुरा असर पड़ा, स्थानीय लोगों को रोजगार के मौके गंवाने पड़े और देश की सुरक्षा को गंभीर चुनौतियां मिलने लगीं. मोदी के अनुसार 1979 में असम के छात्रों ने घुसपैठियों के विरुद्ध व्यापक आंदोलन कर केंद्र सरकार को समस्या का समाधान निकालने के लिए बाध्य किया था. एनडीए सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एनआरसी को अपडेट करने में लगी है. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में घुसपैठियों की पहचान के लिए एनआरसी की जो सूची तैयार की गई है, उसकी कमियों को दूर करने के लिए कई स्तरों पर विकल्प भी दिये गए हैं. दुर्भाग्यवश, जम्मू-कश्मीर में धारा-370 और असम में एनआरसी के मुद्दे पर कांग्रेस और आरजेडी जैसी पार्टियां राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर नहीं उठ पा रही हैं. 

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केंद्र सरकार घुसपैठियों की बड़ी संख्या को देश के विभिन्न हिस्सों में अलगाववाद, आतंकवाद,  उग्रवाद और तस्करी जैसे कई गंभीर अपराधों की जड़ के रूप देखती है, इसलिए घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए राजनीतिक नफा-नुकसान की चिंता किये बिना सख्ती से काम कर रही है. जिनके लिए सबसे पहले दल, परिवार, सत्ता और सम्पत्ति है, वे एनआरसी के मुद्दे को वोटबैंक के नजरिय देख रहे हैं, लेकिन भाजपा के लिए देश पहले है हम राजनीति में 'नेशन फर्स्ट' के सिद्धांत को जीते हैं. 
 

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