NDTV Khabar

नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाने के लिए हमें लोहिया जैसे नेता की जरूरत - शिवानंद तिवारी

राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने भी इस मौके पर अपनी बात रखी. उन्होंने इस बाबत एक फेसबुक पोस्ट भी लिखा. उन्होंने लिखा कि अगर आज लोहिया होते तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से बेदख़ल करने के लिए विपक्षी दलों को एक जुट कर रहे होते.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाने के लिए हमें लोहिया जैसे नेता की जरूरत - शिवानंद तिवारी

शिवानंद तिवारी का पीएम मोदी पर तंज

पटना:

राम मनोहर लोहिया की जयंती को लेकर ट्वीट और बयानों का सिलसिला धमने का नाम नहीं ले रहा है. पीएम मोदी ने भी लोहिया की जंयती शनिवार को ट्वीट कर महागठबंधन के नेताओं को आड़े हाथ लिया. वहीं, राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने भी इस मौके पर अपनी बात रखी. उन्होंने इस बाबत एक फेसबुक पोस्ट भी लिखा. उन्होंने लिखा कि अगर आज लोहिया होते तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से बेदख़ल करने के लिए विपक्षी दलों को एक जुट कर रहे होते. शिवानंद तिवारी ने अपने पोस्ट में लिखा कि लोहिया मानते थे देश की राजनीति पर कांगरेसी एकाधिकार की वजह से लोकतंत्र ख़तरे में है. लोकतंत्र को बचाने के लिए उन्होने ग़ैर कांगरेसवाद का अभियान शुरू किया था. गैर कांगरेसवाद उनकी रणनीति थी. उसका एक ख़ास संदर्भ था.

जो बीजेपी के साथ है वह 'हरिश्चंद्र', जो विरोध में वह भ्रष्ट : शिवानंद तिवारी


जनसंघ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय और कम्युनिस्ट पार्टी के कामरेड भुपेश गुप्त उनके गैर-कांग्रेसवाद की रणनीति के सक्रिय सहयोगी थे. तब के संदर्भ में वह एक सफल रणनीति थी. उस रणनीति का परिणाम था कि आज़ादी के बाद पहली मर्तबा आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें बनीं. कांग्रेस की अपराजयता की धारणा टूटी. शिवानंद ने आगे लिखा कि जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, किसी भी रणनीति का मकसद तात्कालिक होता है. इसके उलट नीति स्थाई या लंबे समय के लिए होती है. लोहिया अगर आज होते और आज भी गैर-कांग्रेसीवाद का नारा दे रहे होते तो लोग उनका उपहास उड़ाते. देश की राजनीति में कांग्रेस की आज की हालत को दयनीय ही कहा जा सकता है. लोकसभा में तो आज उसे विरोधी दल की मान्यता भी प्राप्त नहीं है.

बिहार में 'एक अधिकारी' के तबादले को लेकर शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार पर लगाये गंभीर आरोप


लोहिया के विचारों और नीतियों की थोड़ी भी समझ रखने वाला व्यक्ति शिवानंद तिवारी के अनुसार यह सहज अनुमान लगा सकता है कि आज अगर वे होते तो नरेंद्र मोदी की सरकार को सत्ता से अपदस्त करने के लिए संपूर्ण विपक्ष को गोलबंद करने की दिशा में बेचैन रहते. लोकतंत्र और संविधान आज ख़तरे में है. पिछले पांच वर्षों में कट्टरवाद मज़बूत हुआ है. मोदी सरकार की कट्टरवादी नीतियों की वजह से देश की सीमा पर घोर अशांति है. चाहे वह पाकिस्तान से लगा कश्मीर हो या चीन से लगा उत्तर पूर्व के राज्य हों. ऐसी सरकार जो देश की सीमाओं पर रहने वाले अपने नागरिकों के मन में अपनी नीतियों की वजह से भय और शंका पैदा करती है उसको लायक सरकार नहीं कहा जा सकता है. आज अगर लोहिया होते तो कहते कि ऐसी नालायक़ सरकार को सत्ता से बेदख़ल करना ही आज का राजनीतिक धर्म है.

शिवानंद तिवारी ने नई आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाये

पंडित नेहरू के शेरवानी और चुस्त पाजामे वाली पोशाक के विषय में लोहिया कहते थे कि मुग़ल दरबार के तबलची ऐसा पोशाक पहनते थे. नरेंद्र मोदी के सजधज के विषय में लोहिया क्या कहते ! मोदी राज में जिस तरह असहिष्णुता बढ़ी है वह तो भयानक है. मोदी के विरूद्ध बोलने में ख़तरा है. मीडिया जिस तरह आज साष्टांग है उसे देखते हुए कैसे कहा जा सकता है हम लोकतंत्रिक देश है ! देश में स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना के मकसद से कांग्रेस को सत्ता से हटाने के लिए लोहिया ने गैरकांग्रेस वाद की रणनीति बनाई थी. लोहिया आज होते तो मोदी सरकार की धार्मिक कट्टरवादी नीतियों से लोकतंत्र को बचाने के लिए देश की सत्ता से मोदी सरकार च्युत करने के मकसद से सड़क से संसद तक की नीति बनाने की दिशा में बेचैनी के साथ सक्रिय होते. लोहिया की राजनीति में लड़ाकुपन था.,आक्रमकता थी. लोहिया आज होते तो मोदी सरकार की नीतियों के विरूद्ध अपने सहयोगियों के साथ संघर्ष करते हुए लाठी खाकर किसी जेल मे बंद होते. नरेंद्र मोदी जी ख़ैर मनाएं कि आज लोहिया या लोहिया जैसा कोई नहीं हैं. नही तो यह पांच वर्ष का उनका यह निरंकुश  शासन अब तक डगमगा गया होता.

VIDEO: नीतीश कुमार अवसरवाद की राजनीति कर रहे हैं- शिवानंद तिवारी

टिप्पणियां



Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


Advertisement