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जानिए जयप्रकाश नारायण को 'लोकनायक' की उपाधि किसने दी?

लालू ने कहा कि उनकी लोकप्रियता नीतीश कुमार से पहले की है और जेपी आंदोलन के वक्त उन्होंने ही नीतीश को आगे बढ़ाया.

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जानिए जयप्रकाश नारायण को 'लोकनायक' की उपाधि किसने दी?

जयप्रकाश नारायण (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. लालू प्रसाद ने नीतीश कुमार पर 'धोखा' देने का आरोप लगाया
  2. कहा - तेजस्वी इस्तीफा भी देते तो भी नीतीश बीजेपी के साथ मिलते
  3. लालू ने आरोप लगाया कि नीतीश 'अवसरवादी' हैं
पटना:

राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर महागठबंधन तोड़कर 'धोखा' देने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को पलटवार किया. उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी इस्तीफा भी दे देते तो भी वह बीजेपी के साथ सरकार बनाते. लालू ने आरोप लगाया कि नीतीश 'अवसरवादी' हैं. राजद प्रमुख ने कहा, 'अब तो जदयू रहा नहीं, ढोल—झाल ले लो और जय सियाराम करते रहो.' इसके बाद, लालू ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट डाली जिसमें उन्होंने विस्तार से अपनी छात्र राजनीति का जिक्र किया. लालू ने कहा कि उनकी लोकप्रियता नीतीश कुमार से पहले की है और जेपी आंदोलन के वक्त वही नीतीश को आगे लाए. उन्होंने कहा कि 1985 में नीतीश पहली बार विधायक बना तब तक मैं एक बार सांसद और विधायक रह चुका था और उससे पहले नीतीश दो चुनाव हार चुका था.

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यह लिखा अपनी फेसबुक पोस्ट में
लालू ने लिखा "नीतीश कहता है कि उसने मुझे नेता बनाया. ये तो झूठ की सभी मर्यादाएं और बांध तोड़ रहा है. मैं 1970 में पटना यूनिवर्सिटी में जनरल सेक्रेटरी था, दो साल में पटना विश्वविधालय का अध्यक्ष बना..उससे पूर्व में डेलीगेट नॉमिनेट कर अध्यक्ष बनाते थे. मैंने लड़ाई लड़ी कि पटना विश्वविधालय का अध्यक्ष नॉमिनेट नहीं होना चाहिए बल्कि इसके लिए खुला चुनाव होना चाहिए ताकि वंचित और उपेक्षित वर्गों के छात्र अपना नेता चुने. वंचित वर्गों के छात्रों के सहयोग से मैं पटना विश्वविधालय का अध्यक्ष बना. उस वक़्त नीतीश को शायद ही इसकी कक्षा के बाहर कोई जानता हों. इसका कहीं कोई अता-पता नहीं था."

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'जेपी को लोकनायक की उपाधि हमने दी'
उन्होंने आगे लिखा, "1974 के छात्र आंदोलन में जयप्रकाश नारायण जी ने मुझे छात्र आंदोलन का संयोजक घोषित किया. उसी दौरान छात्रों की सहमति से हमने जेपी जी को लोकनायक की उपाधि दी और मुझे छात्र आंदोलन का संयोजक बनाने के लिए लोकनायक का धन्यवाद किया."

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'नीतीश को सांसद बनाने के लिए मैंने क्या नहीं किया'
पोस्ट में आगे लिखा, "1977 में महज़ 29 वर्ष की उम्र में देश का सबसे कम उम्र का सांसद बनकर मैंने जनता पार्टी की सरकार में छपरा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. 1985 में नीतीश पहली बार विधायक बना तब तक मैं एक बार सांसद और विधायक रह चुका था और उससे पहले नीतीश दो चुनाव हार चुका था.ये दो-दो चुनाव हारने के बाद गिड़गिड़ाता हुआ मेरे पास आया था और दावा करता है इसने मुझे नेता बनाया. नीतीश अपनी अंतरात्मा से पूछे इसे बाढ़ से सांसद बनाने के लिए मैंने इसके लिए क्या-क्या नहीं किया? इसे आगे करने के लिए मैंने पार्टी के कई पुराने नेताओं से भी संबंध ख़राब कर लिए थे. अब चारों तरफ़ से घिर चुका है तो झूठ का सहारा ले रहा है."
(इनपुट भाषा से)



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