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बिहार के जोकीहाट विधानसभा उपचुनाव पर क्यों टिकीं सबकी नज़रें, यह हैं कारण

इस सीट पर चार बार चुनाव जीत चुका है जनता दल यूनाईटेड, आरजेडी को लोकसभा उपचुनाव में इस क्षेत्र में अस्सी हज़ार वोटों की बढ़त मिली थी

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बिहार के जोकीहाट विधानसभा उपचुनाव पर क्यों टिकीं सबकी नज़रें, यह हैं कारण

बिहार के जोकीहाट विधानसभा सीट के उपचुनाव में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है.

पटना:

बिहार के जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में प्रचार अपने अंतिम चरण में है. पिछले चार बार से इस सीट पर जनता दल यूनाइटेड विरोधी कोई हो दल विजय दर्ज नहीं करा सका है. इस बार भी मुख्य मुक़ाबला जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार मुर्शीद आलम और राजद के शहनवाज आलम के बीच है.

जोकीहाट में कुछ कारणों से चुनाव रोचक हो गया है-

1. भाजपा के साथ रहने के बावजूद नीतीश कुमार के जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार भले मंज़र आलम हों या सरफ़राज़ आलम, जो अब राजद के अररिया से सांसद हैं, 2005 से जनता दल यूनाइटेड का उम्मीदवार कभी पराजित नहीं हुआ.

2. इस बार राजद ने पूर्व सांसद तसलीमुद्दीन के बेटे और अब राजद सांसद सरफ़राज़ आलम के छोटे भाई शहनवाज आलम को उम्मीदवार बनाया है. जहां तसलीमुद्दीन छह बार इस सीट से चुनाव जीते वहीं सरफ़राज़ दो बार विधायक और दो बार जनता दल उम्मीदवार मंज़र आलम से पराजित भी हुए.

3. इस बार इस सीट से जनता दल उम्मीदवार मुर्शीद आलम भी पूर्व विधायक और अब सांसद सरफ़राज़ आलम की तरह कई मामलों में आरोपी हैं, जिनमें बलात्कार, मूर्ति चोरी और हत्या के प्रयास जैसे मामले हैं.


4. जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को इस बात का अंदाज़ा था कि उम्मीदवार के चयन में कहीं न कहीं पार्टी से ग़लती हुई है इसलिए बृहस्पतिवार को जब वे प्रचार के लिए जोकीहाट आए तो उन्होंने कहा कि उम्मीदवार के चयन में स्थानीय लोगों की राय और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ विमर्श किया गया था.

5. इस बार का मुक़ाबला त्रिकोणीय है लेकिन राजद अपनी जीत के प्रति अश्वस्त इस आधार पर दिख रहा है कि दो महीने पूर्व हुए अररिया लोकसभा सीट के उपचुनाव में जोकीहाट विधानसभा से राजद को अस्सी हज़ार को बढ़त मिली थी. यह अंतर कम हो सकता है लेकिन हार में फ़िलहाल नहीं बदल सकता.

यह भी पढ़ें : नीतीश कुमार ने रेप और मूर्ति चोरी के आरोपी को उम्मीदवार बनाया!

6. वहीं जनता दल यूनाइटेड के नेता जीत का दावा इस आधार पर कर रहे हैं कि मुस्लिम बहुल इस इलाक़े में जहां मुस्लिम वोटर का विभाजन होगा वहीं हिंदू वोटर उनके उम्मीदवार के समर्थन में गोलबंद होंगे. लेकिन वे मानते हैं कि अगर मुस्लिम यादव एकजुट रहे तो फिर ये दावा हवा हवाई हो सकता है.

7. हाल में मुस्लिम समुदाय के छात्रों के लिए भी कई घोषणाओं की चर्चा तो लोग कर रहे हैं लेकिन नीतीश कुमार के लिए ये क्या वोट में तब्दील हो पाएगा? ये मतगणना के दिन 31 मई को ही पता चल पाएगा.

8. जहां नीतीश कुमार ने इस उप चुनाव में एक सभा की वहीं अब उनके राजनीतिक विरोधी तेजस्वी यादव दो जनसभाएं कर रहे है. तेजस्वी उसी उदाहाट हाई स्कूल में शुक्रवार को सभा करेंगे जहां बृहस्पतिवार को नीतीश कुमार ने अपने प्रत्याशी के समर्थन में वोट मांगे.

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9. अधिकांश मुस्लिम मतदाताओं का कहना है कि लोकसभा उपचुनाव से बड़े उलटफेर की उम्मीद करना फ़िलहाल सम्भव नहीं दिखता. हालांकि नीतीश कुमार से उनकी कोई नाराज़गी नहीं दिखती लेकिन भाजपा के साथ ख़ासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने जिस प्रकार वे अब नतमस्तक रहते हैं वैसे में राजद को वोट देना उनकी मजबूरी है.

10. राजद की प्रचार की कमान आख़िरी दो दिनों में तेजस्वी यादव के कंधे पर होगी और अगर वे इस सीट पर जनता दल यूनाइटेड को हराने में कामयाब होते हैं तो निश्चित रूप से उनका क़द पार्टी और राज्य की राजनीति में बढ़ेगा.


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