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मुजफ्फरपुर सेक्स स्कैंडल की सीबीआई जांच पर इतनी नाउम्मीदी क्यों? यह हैं कारण

मुजफ्फरपुर बालिका गृह के सेक्स स्कैंडल मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सीबीआई जांच का आदेश दिया

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मुजफ्फरपुर सेक्स स्कैंडल की सीबीआई जांच पर इतनी नाउम्मीदी क्यों? यह हैं कारण

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. राज्य में कई मामलों में सीबीआई की जांच पूरी तरह विफल रही
  2. भागलपुर के सृजन घोटाले के कर्ताधर्ताओं को छू नहीं सकी सीबीआई
  3. नवरुना हत्याकांड के मास्टरमाइंड को एजेंसी अभी तक गिरफ़्तार नहीं कर पाई
पटना:

बिहार में मुजफ्फरपुर बालिका गृह के सेक्स स्कैंडल मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भले सीबीआई जांच का आदेश दिया है लेकिन राज्य के एक एक बड़े तबके को यह विश्वास नहीं है कि इस जांच से दोषियों को सजा मिल पाएगी.

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने घोषणा की थी कि अगर राज्य सरकार सिफारिश करे तो केंद्र तुरंत सीबीआई से जांच कराएगी. राज्य सरकार ने जांच का आदेश भी दे दिया लेकिन इस जांच से दोषियों को सजा मिलने पर कई लोगों में संशय है. इसके पीछे कारण यह है कि राज्य में एक नहीं कई मामलों में सीबीआई की जांच पूरी तरह विफल रही हैं.

1. पिछले साल भागलपुर में सृजन घोटाला हुआ. सृजन के कर्ताधर्ता ने बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया होगा, कोई सोच नहीं सकता. अधिकांश भाजपा नेताओं के फ़ोटो और वीडियो सामने आए. उनसे पूछताछ छोड़िए, सीबीआई ने इस मामले के दो मुख्य आरोपियों सृजन की सचिव प्रिया और उनके पति अमित, जिनकी स्वर्गीय मां मनोरमा देवी इस घोटाले की सृजनकर्ता थीं, को आज तक गिरफ़्तार नहीं किया.


2. सृजन घोटाले में सीबीआई ने कई आरोप पत्र दायर किए लेकिन किसी आईएएस अधिकारी तक भी वह नहीं पहुंच पाई. अब नीतीश कुमार के विरोधी भी मानते हैं कि भागलपुर पुलिस का विशेष जांच दल कहीं बेहतर काम कर रहा था. सृजन घोटाले की जांच सीबीआई के लिए एक काला धब्बा है, जहां जांच के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है.

3 . इससे पूर्व मुजफ्फरपुर शहर के ही नवरुना हत्याकांड को ले लीजिए जिसमें जमीन मफिया ने एक बच्ची की हत्या कर फेंक दिया. इसकी जांच अब करीब पांच वर्षों से एजेंसी कर रही है लेकिन इस हत्याकांड के पीछे शामिल मुख्य लोगों को अभी तक गिरफ़्तार नहीं कर पाई है. हालांकि अभी तक छह लोगों को गिरफ़्तार जरूर किया गया, लेकिन वे बहुत छोटे लोग हैं. सब जानते हैं कि मास्टरमाइंड को एजेंसी अभी तक गिरफ़्तार नहीं कर पाई है.

4. रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या की जांच सीबीआई पांच साल से अधिक समय से कर रही है लेकिन यहां भी आज तक वह चार्ज शीट दायर नहीं कर पाई है.

5. इसके अलावा शिल्पी-गौतम कांड लोग भूले नहीं जिसमें उस समय के मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के भाई साधु यादव पर शक किया जा रहा था लेकिन इस जांच में भी सीबीआई की जांच फिसड्डी साबित हुई. सीबीआई सूत्रों  का कहना है कि ये ऐसे मामले थे जहां सबूतों को स्थानीय पुलिस की मदद से नष्ट करने के बाद जांच उन्हें दी गई.

6. अस्सी के दशक के बॉबी कांड को कौन भूल सकता है, जब तत्कालीन एसपी किशोर कुणाल की जांच में कई रसूखदार नेता फंसने लगे तो जांच सीबीआई को दी गई. जिससे इस मामले को दफ़ना दिया गया. सीबीआई को जांच देकर कैसे राजनीतिक प्रभाव वाले लोगों को बचाया जाता है, इस मामले में सीबीआई जांच उसका एक उदाहरण आज तक है.

7.  हत्या के कई मामले -जैसे संतोष टेकरीवाल हत्याकांड , आकाश पांडेय अपहरण और राहुल गौतम के गायब होने की जांच के मामले हैं. इनमें कोर्ट के आदेश से जांच सीबीआई को दी गई लेकिन प्रभावित परिवार के लोग आज तक न्याय का इंतजार कर रहे हैं.

8. अजीत सरकार हत्याकांड में जब पप्पू यादव को पटना हाई कोर्ट से बरी किया गया तब सुप्रीम कोर्ट में समय पर उसने अपील नहीं की. इसका एक कारण उस समय पप्पू यादव की भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से नजदीकी रही है.

9. हालांकि सीबीआई ने चारा घोटाले की जांच जिस गति से की उसके कारण आज तक इस मामले में आरोपियों को सजा मिल रही है. लेकिन इसका बड़ा श्रेय जांच का नेतृत्व कर रहे उपेन विश्वास को जाता है.

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VIDEO : बालिका गृह रेप कांड की होगी सीबीआई जांच

10 . इन सभी उदाहरणों की पृष्ठभूमि में बिहार के आम लोगों में मुजफ्फरपुर स्कैंडल की सीबीआई जांच को लेकर अभी से काफी संशय की स्थिति बनी हुई है.



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