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भाजपा जलजमाव के बहाने आख़िर नीतीश कुमार को निशाने पर क्यों रख रही है?

जानकारों का मानना है कि भाजपा के हर नेता और कार्यकर्ता को मालूम है कि जलजमाव के बाद लोगों में सरकार और अपने जन प्रतिनिधियों को लेकर काफ़ी आक्रोश है.

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भाजपा जलजमाव के बहाने आख़िर नीतीश कुमार को निशाने पर क्यों रख रही है?
पटना:

बिहार की राजधानी पटना में जलजमाव के बहाने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को जितना विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की आलोचना का सामना नहीं करना पड़ रहा है उससे कहीं अधिक आलोचना उनको अपने सहयोगी भाजपा के नेताओं की झेलनी पड़ रही है जिसका नेतृत्व केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) कर रहे हैं. अभी तक जलजमाव के बहाने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, नीतीश कुमार की आलोचना में हर दिन अपनी वाणी से लेकर सोशल मीडिया पर जीजान लगाये हुए हैं.

सिंह के समर्थक उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं. इसलिए गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) को लगता है कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और सुशील मोदी (Sushil Modi) को निशाने पर रखकर वो अपने जीवन का सपना पूरा कर सकते हैं. इसलिए उन्होंने विद्रोही तेवर अख़्तियार किया हुआ है. उधर अब नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा ने भी अपनी ज़िम्मेवरियो से हाथ ये कह कर झाड़ लिया है कि नगर आयुक्त तक उनकी बात नहीं सुनते.

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लेकिन इससे पूर्व जब पटना की मेयर सीता साहू ने एक संवादाता सम्मेलन कर अपनी ज़िम्मेवारी से भागने की कोशिश की तो वो चाल उल्‍टी पड़ गई क्योंकि उनका बेटा हर जवाब पीछे से दे रहा था और जब मीडिया वालों ने पूछा कि आख़िर कितने पंप ख़राब हैं और कितना पैसा ख़र्च हुआ तो वो बग़लें झांक रही थीं. भाजपा के अधिकांश विधायक भी मीडिया से बच रहे हैं. हालांकि जनता दल यूनाइटेड ने नीतीश कुमार के बचाव में साफ़ कर दिया है कि जब नगर विकास विभाग आपके पास है, विधायक व मेयर सब आपके तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ज़िम्मेवार कैसे ठहराया जा सकता है.

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जानकारों का मानना है कि भाजपा के हर नेता और कार्यकर्ता को मालूम है कि जलजमाव के बाद लोगों में सरकार और अपने जन प्रतिनिधियों को लेकर काफ़ी आक्रोश है. ऐसे में नीतीश को निशाने पर रखकर लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है कि अधिकारी तो हमारी सुनते ही नहीं थे. लेकिन ख़ुद भाजपा के नेता भी मानते हैं कि नगर विकास के नाम पर जो बैठकें होती थीं और जिसमें केवल भाजपा के लोग और मंत्री होते थे तो क्या वहां हरिभजन होता था. दूसरा भाजपा का एक तबक़ा मानता है कि नीतीश के बहाने गिरिराज, संजय जायसवाल, संजय पासवान जैसे नेता ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि अब वो सुशील मोदी की नहीं सुनते. बिहार भाजपा में अपने शीर्ष नेता को चुनौती देने की पुरानी परंपरा रही है. जैसे कैलाशपति मिश्र को इंदर सिंह नामधारी या ताराकांत झा चुनौती देते थे. फिर गोविंदाचार्य ने सुशील मोदी, नंद किशोर यादव और सरयू राय को बढ़ाया. लेकिन भाजपा के नेता मानते हैं कि गिरिराज जैसे नीतीश और सुशील मोदी को एक साथ निशाने पर रख रहे हैं तो बिहार के पिछड़े वोटर का सेंटिमेंट नीतीश के साथ उतनी ही मज़बूती के साथ जुटेगा.

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वहीं जनता दल यूनाइटेड के नेताओं का कहना है कि निश्चित रूप से जलजमाव से सरकार को सबसे ज़्यादा झटका लगा है लेकिन ये अति आत्मविश्वास और नगर विकास विभाग में हर दिन सही ढंग से मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण इतनी ख़राब स्थिति हुई है. इन नेताओं का मानना है कि हर ख़ामी और हर चीज़ का श्रेय लेने के चक्कर में भाजपा के नेता निश्चित रूप से जल्दबाज़ी दिखा रहे हैं. जहां तक गिरिराज और अन्य नेताओं द्वारा आलोचना का प्रश्न है, उनका कहना है कि वो जिस जाति से आते हैं उसकी गालियां और विरोध का नीतीश कुमार 2010 और 2015 में सामना कर चुके हैं और चुनाव परिणाम बताते हैं कि उसका परिणाम नीतीश कुमार के लिए मनोकूल हुआ.

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