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आखिर क्यों झारखंड की रघुवर सरकार लालू यादव को हजारीबाग ओपन जेल नहीं भेजना चाहती?

रघुवर सरकार लालू यादव समेत अन्य दोषियों को हजारीबाग के ओपन जेल में रखने के पक्ष में नहीं है.

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आखिर क्यों झारखंड की रघुवर सरकार लालू यादव को हजारीबाग ओपन जेल नहीं भेजना चाहती?

लालू यादव (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. लालू यादव को कोर्ट ने साढ़े तीन साल जेल की सजा सुनाई है.
  2. सुरक्षा कारणों से रघुवर सरकार कोर्ट की अनुशंसा नहीं मानना चाहती है.
  3. कोर्ट ने हजारीबाग के जेल में रखने की अनुशंसा की थी.
पटना:

चारा घोटाले के एक मामले में सजा काट रहे लालू यादव समेत सभी दोषियों को सीबीआई स्पेशल कोर्ट के जज शिवपाल सिंह भले ही झारखंड सरकार को हजारीबाग के ओपेन जेल में रखने की अनुशंसा कर चुके हों, मगर सुरक्षा और अन्य कारणों के आधारा पर रघुवर दास सरकार इसके पक्ष में नहीं है. रघुवर दास सरकार लालू प्रसाद समते अन्य दोषियों को रांची के बिरसा मुंडा जेल में ही रखने पर कायम है. 

झारखंड सरकार के अधिकारियों का कहना है कि सज़ा पर शनिवार को फ़ैसला देते हुए जज शिवपाल सिंह ने आदेश नहीं बल्कि सरकार को अनुशंसा की थी कि दोषी व्यक्तियों के लिए हज़ारीबाग के ओपन जेल का इस्तेमाल करना चाहिए. इसके लिए फ़ैसले में दो आधार दिया गये हैं कि अधिकांश दोषी जानवरों के चारा, दवा के विशेषज्ञ हैं और कुछ तो जानवरो के डॉक्टर भी हैं. इसके अलावा अधिकांश दोषियों के उम्र अधिक हैं. इसलिए ओपन जेल में डेयरी के काम में ये लोग अधिक मदद कर सकते हैं.

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लेकिन झारखंड सरकार का कहना है कि दोषियों में से लालू यादव समेत अधिकांश लोगों के ख़िलाफ अभी भी तीन से अधिक मामले रांची की अलग-अलग कोर्ट में चल रहे हैं. जहां ट्रायल के दौरान खुद कोर्ट द्वारा लालू यादव समेत अन्य लोगों की उपस्थिति अनिवार्य है. लालू यादव के खिलाफ अन्य दो मामले की सुनवाई आख़िरी चरण में है. जहां फैसला अगले महीने तक आने की संभावना है. 

वहीं, ओपन कोर्ट में फिलहाल विडीओ कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा नहीं है. इसलिए हजारीबाग से रोज लाने और ले जाने की व्यवस्था करना सरकार के लिये आसान नहीं होगा. हालांकि, पटना की एक कोर्ट से भी लालू यादव के खिलाफ प्रोडक्शन वॉरंट जारी हुआ है, जिसके बाद आने वाले कुछ दिनों में उन्हें पटना लाना पड़ सकता है. 

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लेकिन फिलहाल लालू यादव के वकीलों का कहना है कि उनका प्रयास होगा कि देवघर कोषागार के जिस 89 लाख के मामले में उन्हें साढ़े तीन साल की सज़ा हुई है, उसमें जल्द से जल्द झारखंड हाईकोर्ट से जमानत की याचिका दायर की जाये. 

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