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आउट्सॉर्सिंग के मुद्दे पर सुशील मोदी क्यों दे रहे हैं सफ़ाई

शुक्रवार को उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को एक बयान में ये कहना पड़ा कि बिहार सरकार ने भाजपा के सहयोग से आउटसोर्सिंग में पहली बार कोटा लागू किया.

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आउट्सॉर्सिंग के मुद्दे पर सुशील मोदी क्यों दे रहे हैं सफ़ाई

बिहार के उपमुख्‍यमंत्री सुशील कुमार मोदी (फाइल फोटो)

पटना:

बिहार में नीतीश सरकार ने आउट्सॉर्सिंग में आरक्षण का प्रावधान क्या किया, सभी दलो में इसके पीछे खड़ा होने की होड़ लगी है. लेकिन भाजपा की मुश्किल ये है कि इसके एक सांसद डॉक्टर सी पी ठाकुर और विधान पार्षद सच्चिदानंद राय ने इसकी आलोचना की है. संविदा पर नियुक्ति में आरक्षण के फैसले से नाराज बीजेपी सांसद डॉ. सीपी ठाकुर ने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि अगर ऐसा है तो सड़क पर चलने में भी आरक्षण लागू कर दिया जाए. उधर सच्चिदानंद राय ने भी आपत्ति जाहिर की थी.

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शुक्रवार को उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को एक बयान में ये कहना पड़ा कि बिहार सरकार ने भाजपा के सहयोग से आउटसोर्सिंग में पहली बार कोटा लागू किया. पार्टी पूरी तरह आरक्षण के पक्ष में है. मोदी ने अपने बयान में कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए क्रीमी लेयर (सालाना आय) का दायरा 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख रुपये करने के केंद्र सरकार के निर्णय को भी लागू किया जाएगा.


हालांकि उन्होंने कहा कि लेकिन पार्टी ST/SC वर्ग के लोगों के आरक्षण में कोई छेड़छाड़ नहीं चाहती. मोदी ने कहा कि 'हम अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों को क्रीमीलेयर से पूरी तरह मुक्त रखने के पक्ष में हैं, ताकि इस वर्ग को नौकरियों में आरक्षण का अधिकतम लाभ मिल सके. आउटसोर्सिंग में कोटा वंचितों के लिए रोजगार के अवसरों का विस्तार है. आरक्षण पर पिछड़ों-दलितों को गुमराह करने वाले नेताओं की दाल गलने वाली नहीं.'



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