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महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम से क्‍या बिहार में बीजेपी लेगी सबक?

दोनों दलों के नेताओं का मानना है कि एक ऐसे समय में जब भाजपा के पास पुराने सहयोगियों में केवल जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और अकाली दल बच गए हैं, वैसे हालात में भाजपा नीतीश कुमार को अब खोना नहीं चाहेगी.

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महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम से क्‍या बिहार में बीजेपी लेगी सबक?

बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उप मुख्‍यमंत्री सुशील मोदी (फाइल फोटो)

पटना:

महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम का असर बिहार के राजनीति ख़ासकर सत्तारूढ़ एनडीए में देखने को मिल रहा है. शनिवार को जहां देवेंद्र फडनवीस ने शनिवार को शपथ ली तो भाजपा के नेता आक्रामक मुद्रा में दिखे वहीं मंगलवार को उनके इस्तीफ़े के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जो भी परिस्थिति थी, जो होना था वो हुआ है, उसमें कोई ख़ास बात नहीं है. वहीं शनिवार से एक के बाद एक ट्वीट कर सुर्ख़ियो में बने रहे उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि राजनीति में कब क्या होता है देखिए.

लेकिन दोनों दलों के नेताओं का मानना है कि एक ऐसे समय में जब भाजपा के पास पुराने सहयोगियों में केवल जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और अकाली दल बच गए हैं, वैसे हालात में भाजपा नीतीश कुमार को अब खोना नहीं चाहेगी. ख़ासकर झारखंड के चुनाव में सुदेश महतो की आजसु जैसी पार्टी का साथ छूटा है. उसके बाद नीतीश कुमार को नाराज करने का कोई जोखिम फ़िलहाल भाजपा नहीं उठायेगी.

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जब से नीतीश भाजपा के साथ वापस गये हैं, एक ओर जहां राजनीतिक हिस्सेदारी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव में उन्हें बराबर बराबर सीट दी तो नीतीश कुमार ने भी उन्हें राज्य की 40 में से 39 सीटें जीत कर दीं. लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल में जब हिस्सेदारी का प्रश्न आया तो वही मोदी और शह इस बात पर अड़ गये कि सहयोगी दलों को एक से ज्‍यादा सदस्‍य को प्रतिनिधव नहीं मिलेगा. जिसके बाद नीतीश को नाराज़ होकर दिल्ली से वापस आना पड़ा. इसके अलावा जब पटना विश्वविद्यालय के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय के दर्जे की मांग नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री से की तब नरेंद्र मोदी ने वहीं उसे ख़ारिज कर दिया. इसके अलावा जब पटना में जल जमाव हुआ तो नीतीश को विरोधी दलों से ज़्यादा भाजपा के केंद्रीय मंत्रियों से फ़ज़ीहत झेलनी पड़ी.


फ़िलहाल न केवल नीतीश बल्कि बिहार भाजपा के नेताओं को उम्मीद है कि अब भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व महाराष्ट्र और झारखंड के बाद जनता दल यूनाइटेड से घमंड और अहंकार की नीति त्याग कर सहयोगी का भाव देगी.



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