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क्या लालू यादव पहली बार लोकसभा चुनाव में प्रचार करने से वंचित रह जाएंगे?

लालू यादव की मुश्किल है कि सीबीआई ने उन मामलों में जहां उन्हें कम सज़ा हुई है वहां उनकी सज़ा बढ़ाने के लिए झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की है जो लालू यादव के लिए परेशानी का एक अलग कारण है.

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क्या लालू यादव पहली बार लोकसभा चुनाव में प्रचार करने से वंचित रह जाएंगे?

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव (फाइल फोटो)

पटना:

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव और उनके परिवार के लिए शनिवार का दिन काफ़ी मिला जुला रहा. जहां एक ही आईआरसीटीसी मामले में राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव व अन्य आरोपियों को दिल्ली स्थित सीबीआई की विशेष अदालत से नियमित ज़मानत मिल गयी वहीं प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर इसी मामले में अंतरिम ज़मानत मिली.

लेकिन लालू यादव को ना तो सीबीआई कोर्ट और ना ही प्रवर्तन निदेशालय कोर्ट से ज़मानत मिली. इसका मतलब आने वाले समय में अब लालू यादव को चारा घोटाले के तीन मामलों में सर्वोच्च न्यायालय से ज़मानत लेनी होगी. उसके अलावा उन्हें आईआरसीटीसी मामले में भी अब दिल्ली की सीबीआई कोर्ट में ज़मानत याचिका दायर करनी होगी. मतलब पांच मामलों में लालू यादव को जब तक ज़मानत नहीं मिलती तब तक वो जेल से बाहर नहीं निकलेंगे.

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लालू यादव की मुश्किल है कि सीबीआई ने उन मामलों में जहां उन्हें कम सज़ा हुई है वहां उनकी सज़ा बढ़ाने के लिए झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की है जो लालू यादव के लिए परेशानी का एक अलग कारण है. लालू के वकीलों को मालूम है कि सर्वोच्च न्यायालय में जब उनकी ज़मानत याचिका पर बहस होगी तब सीबीआई वर्तमान सरकार और जांच एजेंसी के अंदर के समीकरण के दबाव में उसका जमकर विरोध करेगी. संभावना है कि सर्वोच्च न्यायालय में सीबीआई विरोध का मुख्य आधार यही रखेगी कि उन्होंने सज़ा का 50 प्रतिशत जेल में नहीं बिताया है. झारखंड उच्‍च न्यायालय द्वारा चारा घोटाले में कई आरोपियों को हाल के दिनों में इसी आधार पर ज़मानत मिली है कि उन्होंने अपने सज़ा का पचास प्रतिशत समय हिरासत में काट लिया है.

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इस पृष्‍ठभूमि में लालू यादव का अगले साल मार्च-अप्रैल तक रिहा होना मुश्किल दिखता है. अगर मेडिकल ग्राउंड पर उन्हें ज़मानत मिल भी गयी तो उसकी शर्तों में शायद ही कोर्ट उन्हें चुनाव प्रचार में जाने की अनुमति दे. इन परिस्थितियों में अगर लालू यादव पहली बार 1977 के बाद चुनाव प्रचार से अलग रहे तो उनके पार्टी के नेताओं का मानना है कि कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी. हालांकि पार्टी के लिए राहत की बात यह है कि तेजस्वी यादव अब पपार्टी के सर्वमान्य नेता हो गये हैं और चुनाव प्रचार में भी उन्होंने परिपक्वता का परिचय दिया है.

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