नीतीश ने फिर 'प्रचार-प्रसार करने वाले मुख्यमंत्री' पर साधा निशाना, कहा - आप सरकारी ख़ज़ाने के ट्रस्टी हैं ना कि मालिक

नीतीश कुमार बुधवार को दिल्ली में अपने पार्टी के कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि कुछ लोग ख़ूब विज्ञापन देते हैं लेकिन आप देख लीजिए मेरा विज्ञापन बहुत कम मिलेगा.

नीतीश ने फिर 'प्रचार-प्रसार करने वाले मुख्यमंत्री' पर साधा निशाना, कहा - आप सरकारी ख़ज़ाने के ट्रस्टी हैं ना कि मालिक

बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली:

ये बात किसी से छिपी नहीं है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) प्रचार-प्रसार में अन्य मुख्यमंत्रियों या केंद्र सरकार की तुलना में काफ़ी पीछे हैं. ख़ासकर पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री रघुबर दास (Raghubar das) के मुक़ाबले तो वो कहीं नहीं टिकते. लेकिन नीतीश कुमार ने अपने बचाव में कहा है कि वो काम करने में और लोगों की सेवा करने में विश्वास करते हैं और जो काम नहीं करते वो केवल प्रचार-प्रसार से सुर्ख़ियों में बने रहते हैं. नीतीश कुमार ने दावा किया कि विज्ञापनों पर सबसे कम पैसे बिहार सरकार ही खर्च करती है.

नीतीश कुमार बुधवार को दिल्ली में अपने पार्टी के कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि कुछ लोग ख़ूब विज्ञापन देते हैं लेकिन आप देख लीजिए मेरा विज्ञापन बहुत कम मिलेगा. जहां ज़रूरत होती है उतना ही सरकार की उपलब्धि के लिए बिहार सरकार विज्ञापन देती है. लेकिन कुछ लोग केवल विज्ञापन के माध्यम से छाये रहते हैं. मेरा मानना है कि आप सरकारी ख़ज़ाने के ट्रस्टी हैं मालिक नहीं. सरकारी पैसा मत ख़र्च करो अनाप-शनाप तरीक़े से अपने प्रचार पर, ये कहकर नीतीश ने कहा कि गांधी जी ने भी लोगों की सेवा करने को बात कही थी.

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दरअसल नीतीश मीडिया में विज्ञापन ख़ासकर झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास जिस प्रकार से सरकारी विज्ञापनों के माध्यम से क्षेत्रीय चैनलों पर ख़बर से लेकर विज्ञापनों तक में छाए रहते हैं, उससे चिढ़े हुए हैं. नीतीश ने यहां तक कि अपने मंत्रिमंडल में BJP के सहयोगियों को भी ये बात साफ़ कर दी है कि पैसे देकर ख़बर दिखाए जाने के वो ख़िलाफ़ हैं और वही पैसा वो लोगों के ऊपर ख़र्च करना चाहेंगे ना कि अपने प्रचार प्रसार पर. BJP के मंत्रियों का कहना था कि जैसे झारखंड सरकार क्षेत्रीय चैनलों पर विज्ञापन देती है वैसे ही बिहार सरकार को भी चैनलों से डील करना चाहिए.

दिल्ली की सभा की ख़ास बात यह रही कि नीतीश कुमार ने दो बातें साफ़ की, एक उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव लड़ेगी और दूसरी उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग का समर्थन किया. हालांकि उन्होंने अरविंद केजरीवाल का नाम नहीं लिया लेकिन माना जा रहा है कि पूर्ण राज्य का दर्जा जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के मैनिफेस्टो में पहले से रहा है और नीतीश कुमार अभी भी अपनी मांगों पर अडिग हैं. उनके विरोधियों का कहना है कि यही वही नीतीश कुमार हैं जिन्‍होंने सत्ता में बने रहने के लिए जब जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा ख़त्म किया गया तो सांकेतिक विरोध दिखाकर मौन धारण कर लिया.

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