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विचार
  • छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़ क्यों ?
    रवीश कुमार
    ज़िंदगी बर्बाद करने का कारखाना आपने देखा है? भारत में महानगरों से लेकर ज़िलों में ज़िंदगी बर्बाद करने का कारखाना खुला हुआ है, जिसे हम अंग्रेज़ी में यूनिवर्सिटी और हिन्दी में विश्वविद्यालय कहते हैं. इस कारखाने की ख़ूबसूरती यही है कि जिसकी ज़िंदगी बर्बाद होती है उसे फर्क नहीं पड़ता. जो बर्बाद कर रहा है उसे भी कोई फर्क नहीं पड़ता. उत्तर प्रदेश के डॉक्टर राम मनोहर लोहिया यूनिवर्सिटी में इस साल बीए और एमए के 80 फीसदी छात्र फेल हो गए हैं. जिस यूनिवर्सिटी में चार लाख से अधिक छात्र फेल हो जाएं वो दुनिया की सबसे बड़ी ख़बर होनी चाहिए. क्या आपने सुना है कि ऑक्सफोर्ड, हावर्ड, मिशिगन यूनिवर्सिटी के 80 प्रतिशत छात्र फेल हो गए? और किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है.
  • फादर्स डे - पि‍ता को बधाई ही नहीं, ‘छुट्टी’ भी दो
    पितृत्व को एक व्यवस्थित स्वरूप देकर उसे कानून प्रावधानों और नीतियों में लाया जाए। देखना है कि यह कब तक हो पाता है।
  • FIFA WORLD CUP: जब पिछली बार मिस्र की टीम यहां थी तब सालाह पैदा भी नहीं हुए थे
    संजय किशोर
    जब बॉल सालाह के बूट से टकराकर गोलपोस्ट के भीतर जाती है, तो लिवरपूल फुटबॉल क्लब स्टेडियम का नज़ारा कुछ ऐसा हो उठता है - पहले जश्न और शोर, फिर कुछ क्षण की खामोशी, फिर हाथ आसमान की तरफ उठता है खुदा को शुक्रिया कहने के लिए, और फिर जब वह धरती को चूमता है, तो उन लम्हों की पवित्रता के लिए ज़रूरी शांति का उसके प्रशंसक सम्मान करते हैं.
  • किस-किस खतरे का सामना करते हैं शुजात बुखारी और कश्मीर घाटी के उनके जैसे पत्रकार
    निधि राज़दान
    वह मुझे कभी यह बताना नहीं भूलते थे कि किस तरह कुछ अन्य TV चैनलों ने अपने नफरत से भरे एजेंडा के तहत कश्मीर में लगातार ज़हर घोला है. मीडिया के ऐसे हिस्से ने बहुत नुकसान पहुंचाया है, और सभी कश्मीरियों की छवि पत्थरबाज़ों और आतंकवादी की बना देने में इन्हीं चैनलों की खास भूमिका रही है.
  • जिनका कोई देश नहीं, उनका ब्राज़ील है
    प्रियदर्शन
    पेले भारत के लिए फुटबॉल खिलाड़ी कम और एक किंवदंती ज़्यादा रहा. अब वक्त बदल रहा है. कोलकाता के एक चाय बेचने वाले ने मॉस्को जाकर वर्ल्डकप देखने के लिए पैसा जुटाया, लेकिन रकम कम पड़ गई. तब उसने अपने मकान को ही अर्जेंटीना के रंगों में रंग लिया
  • विश्व बालश्रम निषेध दिवस : नोबेल पुरस्कार मिलने से बच्चों का क्या बदला...?
    अंतरराष्ट्रीय बाल श्रमिक दिवस भी ऐसा ही मौका है. भले ही हमें नोबेल पुरस्कार मिल गया हो, लेकिन शर्मनाक है कि देश में बाल मजदूरों की हालत अब भी चिंतनीय बनी हुई है. सरकारी आंखों को बाल मजदूर दिखाई ही नहीं देते हैं, इसलिए वह इस पर लगातार गलत जवाब देते हैं. इसलिए कोई कार्रवाई भी नहीं होती, सब हरा-हरा दिखाई देता है.
  • किम जोंग उन की ताकत और डोनाल्ड ट्रंप की सियासत
    प्रियदर्शन
    किम भी अमेरिका से डरकर अगर ऐटमी कार्यक्रम से पीछे हट जाते तो क्या होता...? अमेरिका एक 'रोग नेशन' को ख़त्म करने के जज़्बे के साथ उत्तर कोरिया पर टूट पड़ता और लोकतंत्र के नाम पर अमेरिकी सैन्य आधिपत्य का एक नंगा नाच चल रहा होता.
  • रजनीकांत की छतरी और फिल्‍म 'काला'...
    प्रियदर्शन
    जिस दौर में किसी रोहित वेमुला को हैदराबाद विश्वविद्यालय में आत्महत्या करनी पड़े, जिस दौर में उत्साही गोरक्षकों का हुजूम कहीं अल्पसंख्यकों को निशाना बनाता हो और कभी दलितों की पीठ उधेड़ता हो, जिस दौर में दलित प्रतिरोध तरह-तरह की शक्लें अख़्तियार कर रहा हो, उस दौर में कोई कारोबारी फिल्म ऐसी भी बन सकती है जैसी 'काला' है.
  • एक‌ ई-मेल और कई‌ सवाल
    प्रियदर्शन
    रअसल, पुलिस ने इस दौरान एक चिट्ठी निकाल ली जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या का इरादा जताया गया था.
  • प्रणब के दांव से चित्त हुई कांग्रेस
    अखिलेश शर्मा
    पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के संघ मुख्यालय पर कल के भाषण के बाद अब नई बहस शुरू हो गई है. क्या कांग्रेस ने तीखा विरोध कर जल्दबाजी तो नहीं की. कम से कम प्रणब दा के भाषण के बाद आई कांग्रेस और अन्य वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया तो यही बता रही है. हालांकि एक बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है कि प्रणब मुखर्जी आखिर संघ मुख्यालय क्यों गए.
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कैसे होगा SC/ST प्रमोशन
    विराग गुप्ता
    गर्मियों की छुट्टी के दौरान काम कर रही अवकाशकालीन पीठ के जजों ने सरकार के विशेष निवेदन पर सिर्फ यह स्पष्टीकरण दिया कि कानून के अनुसार SC/ST वर्ग में प्रमोशन देने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन उसे प्रमोशन के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश बताकर प्रचारित कर दिया गया, जिससे आने वाले समय में समस्या और जटिल हो सकती है. केंद्र और राज्य सरकारें सुप्रीम कोर्ट के 2006 के आदेश के बावजूद कानूनी प्रक्रिया का पालन करने में विफल रही हैं, तो फिर इस स्पष्टीकरण से हज़ारों कर्मचारियों का प्रमोशन कैसे हो जाएगा...?
  • आदरणीय योगी जी, UPPSC के इन छात्रों को बुलाकर बात कर लीजिए!
    रवीश कुमार
    यूपी के नौजवान ट्विटर पर मुख्यमंत्री से लेकर सांसदों तक के ट्विट कर रहे हैं. अपील कर रहे हैं. मैं लंबी छुट्टी पर हूं. इतनी रात को जग कर लिख रहा हूं ताकि इन बच्चों को मायूस नहीं होना पड़े.
  • अखिलेश शर्मा
    लोकसभा उपचुनावों की करारी हार ने बीजेपी के मिशन 2019 पर सवालिया निशान लगा दिया है. नए सहयोगी मिलना तो दूर की बात, मौजूदा सहयोगी दलों ने ही आंखें दिखाना शुरू कर दिया है.
  • नीतीश कुमार और शराबबंदी
    मनोरंजन भारती
    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बयान आया है कि वे राज्य में शराबबंदी कानून में बदलाव करना चाहते हैं. जाहिर है हाल के उपचुनावों में हार के बाद नीतीश कुमार अब अपनी रणनीति में बदलाव करना चाहते हैं.
  • बीजेपी-शिवसेना : यह रिश्ता क्या कहलाता है? शायद कल मिले इसका जवाब
    अखिलेश शर्मा
    बीजेपी शिवसेना का गठबंधन भारतीय राजनीति के सबसे पुराने और मजबूत गठबंधनों में से एक है लेकिन 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद से ही इसकी दरार गहराती जा रही है.
  • 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सहयोगी बन रहे हैं बीजेपी के लिये सिरदर्द
    मनोरंजन भारती
    उपचुनाव में बीजेपी के प्रदर्शन के बाद अब उसके सहयोगी दल अपनी ताकत दिखाने में लग गए हैं. एक तरफ बिहार में जेडीयू ने इसकी शुरूआत कर दी है. जेडीयू के नेता नीतीश कुमार को गठबंधन का बड़ा भाई बता रहे हैं जबकि बिहार में जेडीयू के पास केवल 2 सांसद हैं और बीजेपी के पास 22 सांसद.
  • ऐलान पर है सारा ज़ोर, हुज़ूर अब तो बताइये काम कब होगा...
    रवीश कुमार
    एयर इंडिया को ख़रीदार नहीं मिला है. यही नहीं मोदी सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की 30 कंपनियों को बेचने की तैयारी कर चुकी है मगर बिक नहीं रही हैं. दूसरे शब्दों में इसे कहा जाता है कि सरकार अपनी हिस्सेदारी कम कर रही है
  • रेलवे को लेकर सरकार के दावे ज़मीन पर कितने खरे?
    रवीश कुमार
    इधर कुछ दिनों में रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड के चैयरमैन के लेट से चलने को लेकर कई बयान आए हैं. हम उन बयानों के ज़रिए समीक्षा करेंगे कि कारण क्या है, सवाल क्या है और सबके जवाब क्या हैं. क्या सभी एक बात कर रहे हैं या जो कह रहे हैं वो सही बात कर रहे हैं.
  • बिहार में एनडीए में क्यों हो रही है रस्साकशी?
    मनोरंजन भारती
    बिहार में लोकसभा चुनाव से पहले जोर आजमाईश शुरू हो गई है. जेडीयू और बीजेपी के नेताओं के तरह-तरह के बयान आ रहे हैं. कई चीजें ऐसी हैं जो नीतीश कुमार को चुभ रही हैं. जैसे बिहार को विशेष राज्य का दर्जा ना मिलना. यह एक ऐसा मुद्दा है जो नीतीश कुमार के लिए काफी संवेदनशील है और जरूर उनके मन में इस बात की टीस रहती होगी कि बीजेपी के साथ सरकार बनाने के बाद भी बिहार को ये पैकेज नहीं मिल पाया.
  • 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले 'बड़े भाई' पर तक़रार...
    अखिलेश शर्मा
    कैराना, गोरखपुर और फूलपुर की हार के बाद अब बीजेपी को उसके सहयोगी दलों ने आंखें दिखाना शुरू कर दिया है. जो सहयोगी दल राज्यों में ताकत में हैं वे चाहते हैं कि बीजेपी वहां छोटा भाई बन कर रहे.
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