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विचार
  • हैदराबाद में ओवैसी पर निशाना साध रही BJP- एक गोपनीय उद्देश्य?
    स्वाति चतुर्वेदी
    कोई भी चुनाव इतना छोटा नहीं है कि उसे नजरअंदाज किया जाए. मोदी-शाह युग में भाजपा के लिए तो कतई नहीं. हर चुनाव सहयोगियों को परखने, तैयार करने या उनकी ताकत खत्म करने का अवसर है. यह विस्तार, विस्तार और ज्यादा विस्तार है.
  • अहमद पटेल और सोनिया गांधी क्यों थे परफेक्ट टीम : वीर सांघवी की कलम से
    वीर सांघवी
    पटेल गुजरात से आए राजनेता थे, जो राष्ट्रीय पटल पर पहली बार तब दिखे थे, जब राजीव गांधी ने 1985 में उन्हें अपने तीन संसदीय सचिवों में स्थान दिया.
  • 'अहमद भाई राजनेताओं के भी राजनेता थे'
    स्वाति चतुर्वेदी
    अहमद पटेल सोनिया गांधी के सबसे भरोसेमंद संकटमोचक थे, उनके राजनीतिक सचिव और एकमात्र कांग्रेसी नेता थे, जिन पर उन्होंने भरोसा किया था. वह गांधी परिवार के लिए 24x7 (चौबीसों घंटे, सातों दिन) उपलब्ध थे. उन्हें कभी भी बुलाया जा सकता था.
  • राहुल गांधी के लिए गद्दी संभाले रखना सोनिया गांधी के लिए हुआ मुश्किल
    स्वाति चतुर्वेदी
    दशकों तक गांधी परिवार की एकछत्र भूमिका के चलते कांग्रेस को राजनैतिक दल के स्थान पर पारिवारिक संगठन की तरह चलाए जाने का आरोप लगाने का अवसर आलोचकों को मिलता रहा. यह आप्रासंगिक-सा हो गया कि कांग्रेस चुनाव कब जीतेगी. अब, पार्टी मशीनरी का अभाव तथा मतदाताओं व पार्टी के ही एक हिस्से द्वारा गांधी परिवार के नेतृत्व को खारिज कर दिया जाना उजागर हो चुका है.
  • कैसे नरेंद्र मोदी ने बिहार चुनाव में नीतीश को निपटाने के चक्कर में तेजस्वी और चिराग को नेता बना दिया
    मनीष कुमार
    बिहार के चुनाव परिणाम की हर जगह, हर व्यक्ति अपने तरह से विवेचना कर रहा है. लेकिन इस चुनाव का सबसे बड़ा संदेश यही है कि नीतीश कुमार इस बार अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी तेजस्वी यादव, चिराग पासवान, उपेन्द्र कुशवाहा को पराजित कर कुर्सी पर नहीं बैठे हैं बल्कि एक बार फिर वे अपने सहयोगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रचे चक्रव्यूह को भेदकर निकले हैं.
  • बिहार चुनाव : कांग्रेस से नुकसान, क्या कहता है गणित
    मनोरंजन भारती
    बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की सरकार ना बन पाने पर उसका सारा ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ा जा रहा है. कांग्रेस को लेकर कहा जा रहा लिखा जा रहा है उसने महागठबंधन को नीचे की ओर खींचा है. इसलिए कांग्रेस के नजरिए से इस विधानसभा चुनाव के नतीजों का विश्लेषण करना जरूरी है.
  • 'हमलोग आ गए हैं', 4 बजे सुबह फोन कर बोले नीतीश कुमार
    स्वाति चतुर्वेदी
    शनिवार को एग्जिट पोल सर्वे ने जो भविष्यवाणी की थी, चुनावी नतीजे उसके पूरी तरह विपरीत थे. एग्जिट पोल में तेजस्वी यादव के वैभवशाली जीत की संभावना जताई गई थी, जिसने हेलिकॉप्टर के जरिए इस चुनाव में करीब ढाई सौ यानी लगभग हर विधानसभा इलाके में एक चुनावी रैली की थी.
  • क्या नीतीश अपने तरकश से अंतिम तीर चला चुके हैं?
    मनोरंजन भारती
    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्णिया के धमदाहा की रैली में अपने उम्मीदवार के लिए वोट मांगते हुए कहा कि आज चुनाव का आखिरी दिन है और परसों चुनाव है और ये मेरा भी अंतिम चुनाव है.. अंत भला तो सब भला..
  • मायावती ने लिया पक्ष, राज्यसभा में बड़ी कामयाबी हाथ लगी-भाजपा को बड़ा फायदा
    स्वाति चतुर्वेदी
    मायावती का बड़ा दलित समर्थन भाजपा के उत्तर प्रदेश में दोबारा जीत की योजना में मदद कर सकता है. उत्तर प्रदेश के साथ पश्चिम बंगाल पर भाजपा का सबसे बड़ा फोकस है. यह बेहद सुनियोजित और समय का ध्यान रखते हुए किया गया है.
  • कितना दम है सरकारी नौकरी के चुनावी वादे में? 
    अखिलेश शर्मा
    बिहार के विधानसभा चुनाव में इस बार नौकरियों और रोजगार का मुद्दा छाया हुआ है. आरजेडी के दस लाख सरकारी नौकरियों के वादे को खूब प्रचार मिल रहा है और बीजेपी को भी इसके जवाब में अगले पांच साल में चार लाख नौकरियों और 15 लाख रोजगार का वादा करना पड़ा है.
  • पुलवामा, फ़वाद चौधरी का बयान और हिंदुस्तान
    प्रियदर्शन
    पाकिस्तान के कैबिनेट मंत्री फ़वाद चौधरी ने अपनी संसद में कह दिया है कि पुलवामा हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ था. भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने और उसमें सक्रिय हिस्सेदारी निभाने का आरोप पाकिस्तान पर पुराना है और गाहे-ब-गाहे उसके सबूत भी मिलते रहते हैं. मगर पहली बार संसद में किसी मंत्री का यह बयान एक अलग अहमियत रखता है.
  • प्रधानमंत्री की मगही और भाषाओं का दर्द
    प्रियदर्शन
    बिहार में पटना की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मगही बोलने की कोशिश करते नज़र आए. बिहार की तीन प्रमुख भाषाओं में मगही कुछ लटपटाई हुई सी भाषा है. उसमें न भोजपुरी वाली अक्खड़ता है और न मैथिली वाला माधुर्य, बल्कि इसकी जगह एक घरेलूपन है जिसमें प्रेम और क्रोध दोनों एक सीमा के भीतर ही प्रगट होते हैं.
  • हम साथ-साथ हैं! चिराग पर क्यों चुप हैं प्रधानमंत्री
    मनोरंजन भारती
    बिहार के विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री 6 रैलियां कर चुके हैं. पहली रैली से ही जेडीयू नेताओं को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री चिराग पासवान पर कुछ बोलेंगे, मगर प्रधानमंत्री की 6 रैलियों के बाद भी जेडीयू के नेता ये जानने की कोशिश में लगे हैं कि चिराग पासवान को लेकर प्रधानमंत्री के मन में क्या है.
  • कांग्रेस और बीजेपी, दोनों के सामने अपनी अहमियत साबित करने को तैयार ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया
    स्वाति चतुर्वेदी
    कमलनाथ और कांग्रेस अभी भी उम्मीद कर रहे हैं कि मध्य प्रदेश में 28 सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में जोरदार मुकाबला होगा. मंगलवार को होने वाले इस महामुकाबले में अगर किन्हीं दो स्टार खिलाड़ियों की टक्कर है, तो वो सचिन पायलट बनाम ज्योतिरादित्य सिंधिया है.
  • भारत-अमेरिका साथ, चीन को संदेश
    कादम्बिनी शर्मा
    भारत और अमेरिका के बीच 2 प्लस 2 बैठक खत्म हुई. बैठक का महत्व इतना कि महामारी के वक्त और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से महज़ एक हफ्ता पहले अमेरिका के विदेश और रक्षा मंत्री दोनों भारत आए और आमने सामने अपने समकक्षों के साथ बैठक की - एक तथ्य जो विदेश मंत्री एस जयशंकर से प्रेस के सामने भी नोट किया.
  • यह कैसी भाषा है नीतीश कुमार जी? इसका असली मतलब क्या है?
    प्रियदर्शन
    नीतीश कुमार को हम क़सूरवार क्यों मानें? दरअसल हमारी राजनीति ही नहीं, हमारे समूचे सार्वजनिक विमर्श की भाषा बहुत सपाट और निरर्थक हो चुकी है. इस विमर्श में शब्द अपने अर्थ जैसे खो चुके हैं. वे तभी चुभते या तंग करते हैं जब वे बहुत अश्लील या फूहड़ ढंग से इस्तेमाल किए जाते हैं.या तब भी वे चुभते नहीं हैं, बस हमारे राजनीतिक इस्तेमाल के लायक हो जाते हैं. हम अपना पक्ष देखकर उनका विरोध या बचाव करते हैं.
  • Mirzapur2: कालीन भैया का कोई जोड़ नहीं... गुड्डू भैया का कोई तोड़ नहीं...मुन्ना भैया में कोई खोट नहीं, लेकिन...
    मनीष शर्मा
    ओरिजनल सीरीज (Original Web/real series) की पहली और अनिवार्य शर्त यह है वह अपनी "आत्मा" अपने "मिजाज व चरित्र" (पटकथा, फिल्मांकन, डायलॉग, अभिनय, वगैरह-वगैरह) के लिहाज से "वास्तविकता" सामने लेकर आए!! पता नहीं मिर्जापुर (#Mirzapur Part-1) भाग-1 कितने प्रतिशत वास्तविक थी और कितनी काल्पनिक, लेकिन पहला भाग वास्तविकता के दर्शन कराने में कामयाब रहा था. पहले भाग में लेखक पूरी तरह महसूस कराने में यह असल ही है!! कई सीन (फिल्मांकन) गैंग्स ऑफ वासेपुर से "प्रेरित" थे, लेकिन यह इतना बड़ा मुद्दा नहीं था!! वास्तव में जो स्तर सेक्रेड गेम्स ने स्थापित किया, उसे मिर्जापुर भाग-1 और आगे लेकर गया था. लोगों को भरपूर मजा आया, भारी सफलता मिली और नए मानक स्थापित हुए.
  • तेजस्वी ने साबित किया, नहीं हैं वो 'बिहार का पप्पू'
    स्वाति चतुर्वेदी
    31 साल के तेजस्वी यादव को मध्यम वर्ग की उम्मीदों के अनुरूप चलने वाले और अधिकारप्राप्त नेता के तौर पर देखा गया था. नीतीश कुमार के साथ राजद के गठजोड़ के दौरान जब 2015 में गठबंधन सरकार बनी थी तो वह मंत्री थे.
  • क्या बिहार की हवा तेजस्वी के पक्ष में बहने लगी है?
    प्रियदर्शन
    एक बड़ी अंतर्दृष्टि से भरी किताब है- 'टॉकिंग टु माई डॉटर: अ ब्रीफ़ हिस्ट्री ऑफ़ कैपिटलिज़्म.' इसके लेखक हैं यानिस वारौफ़किस, जो यूनान के संकट में वित्त मंत्री भी बने. अर्थशास्त्री और दार्शनिक के रूप में उनकी ख्याति रही है. वे अर्थशास्त्र के इस ज़िक्र में साहित्य और सिनेमा भी लाते हैं. किताब उन्होंने अपनी पंद्रह साल की बिटिया को संबोधित करते हुए लिखी है- तो बहुत सरल भाषा में है.
  • रवीश का डोनाल्ड ट्रंप के नाम खुला खत : लगता है बिहार वाला भैक्सीन घोंपना पड़ेगा
    रवीश कुमार
    'ए ट्रंप बाबू. ढेर डिबेट का शौक़ चढ़ल है न तो आ जाइये बिहार.आपके फ़्रेंड जाने वाले हैं. ऊहां भैक्सीन बाँटने वाले हैं. फिरी में बाँटेंगे. आठ करोड़ भैक्सीन फिरी में देंगे. त हम बूझे कि सगरो फिरी बंटेगा लेकिन फ़्रेंड भाई का पलानिंग त आप जानते ही हैं.'
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