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विचार
  • राजद्रोह जैसा आरोप लगाना कुछ ज्यादा नहीं है?
    रवीश कुमार
    एक छोटी सी कहानी सुनाना चाहता हूं. यह कहानी आपको याद दिलाएगी कि हम कहां से कहां आ गए हैं. यह हालत हो गई है कि उस मुल्क का नाम सुनते ही इस मुल्क के होश उड़ने लगे हैं. जो अधिकारी अपना काम शायद ही कभी ठीक से कर पाते हों वो तुरंत केस दर्ज कर हीरो बन जाते हैं. राजद्रोह ही लगता है इस वक्त का सबसे प्रचलित अपराध है. पब्लिक लड़की के घर भी चली जाती है और पत्थर मारने लगती है. हम बंगलूरू की अमूल्या को लेकर ही बात करना चाहते हैं.
  • हौसलों के पांव, उपलब्धियों के रन, दंतेवाड़ा में धराशायी हो रही हैं धारणाएं
    तारन प्रकाश सिन्‍हा
    कभी नक्सल हिंसा ग्रस्त रहा दंतेवाड़ा जिला भी मड्डाराम की तरह अपने हौसले से उपलब्धियां हासिल कर रहा है.
  • क्या समिति और NGO से चलने लगा है विदेश मंत्रालय
    रवीश कुमार
    एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार की ज़ुबान फिसल गई और उन्होंने नागरिक अभिनंदन समिति का नाम ले लिया.
  • क्या है फेक न्यूज का नया सरगना डीप फेक वीडियो?
    रवीश कुमार
    झूठ के पैर नहीं होते लेकिन टेक्नालॉजी ने झूठ को ताकतवर बना दिया है. अभी ही हम जैसे लोग परेशान हैं कि जो बात कहीं नहीं होती वो भी तस्वीर के साथ लिखकर वायरल हो रहा होता है. आल्ट न्यूज़ जैसी साइट वायरल तस्वीर और वायरल वीडियो के पीछे का झूठ तो पकड़ लेते हैं लेकिन वो उन सभी के पास नहीं पहुंच पाता है जिनके व्हाट्स ऐप के इनबाक्स में झूठ पहुंचा होता है.
  • क्या ऐसे ट्रंप की नजरों से छुप जाएगी गरीबी?
    रवीश कुमार
    अभी तो माहौल जम रहा था कि अमेरिका से राष्ट्रपति ट्रंप का जहाज़ उड़ेगा और न्यूज़ चैनलों पर ईवेंट कवरेज का मजमा जमेगा..सूत्रों के हवाले से खूब हलवे बनाए जाएंगे, कुछ बातों का पता होगा, कुछ का पता ही नहीं होगा लेकिन तभी आज ट्रंप साहब ने होली जैसे बन रहे मूड को बिगाड़ दिया. उन्हें सोचना चाहिए था कि हम कुछ न पता चले उसके लिए कितनी मेहनत कर रहे हैं. जबकि हमें पता है कि ट्रंप साहब के पास ड्रोन कैमरा है. इसके बाद भी हमने दीवार बनाई ताकि गरीबों का घर न दिखे. अब ट्रंप साहब कार से उतरकर ड्रोन तो उड़ाएंगे नहीं. इस दीवार से अलग एक और दीवार है. मोटेरा स्टेडियम की तरफ. उस बस्ती की दीवार को रंगा जा रहा है, ईस्टमैन कलर वाले लुक में.
  • क्या कोरोना वायरस से लड़ने के लिए दुनिया और भारत सक्षम हैं?
    रवीश कुमार
    न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि उनका विश्लेषण बताता है कि कोरोना वायरस के कारण चीन में करीब 15 करोड़ की आबादी सरकारी पाबंदी में है कि वे अपने घरों से कितने दिनों में और कितनी देर के लिए घर से बाहर निकल सकते हैं. घर से बाहर निकलने पर उनके शरीर का तापमान चेक होता है, डॉक्टर चेक कर एक प्रमाण देता है, फिर परिचय पत्र दिखाना होता है तब कोई सोसायटी से बाहर अपने पड़ोस में जा पाता है. एक समय में घर से एक ही आदमी बाहर जा सकता है. वो भी रोज़ नहीं.
  • पुरुष-प्रधान, पिछड़ी सोच का परिचायक है अरविंद केजरीवाल का बासी कैबिनेट
    आशुतोष
    भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली में प्रचार में जान लगा दी थी. वह अपनी वोट हिस्सेदारी छह फीसदी बढ़ाने में कामयाब रही. बेशक उनका प्रचार अभियान बेहद अनैतिक और नकारात्मक था, लेकिन वोट शेयर में बढ़ोतरी इस तथ्य का संकेत है कि अभियान का असर पड़ा.
  • हमारे देश में क़ानून का डर कितना बचा है?
    रवीश कुमार
    जस्टिस अरुण मिश्रा ने टेलिकॉम मामले की सुनवाई के समय कह दिया कि इस देश में कोई कानून नहीं बचा है. बेहतर है इस देश में रहा ही नहीं जाए, बल्कि यह देश ही छोड़ दिया जाए. मैं विक्षुब्ध हूं. लग रहा है कि इस कोर्ट के लिए काम ही न करूं. कोर्ट की नाराज़गी इस बात को लेकर थी कि टेलिकॉम मंत्रालय के डेस्क अफसर ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी. ज़ाहिर सी बात है. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर कोई अफसर रोक लगा सकता है.
  • सरकार जब पीछे पड़ जाए तो क्या होता है?
    रवीश कुमार
    एक सरकार किसी के पीछे पड़ जाए तो वह क्या-क्या कर सकती है यह जानना हो तो इस वक्त एक कहानी काफी है. डॉ. कफ़ील ख़ान की कहानी. सोमवार को अलीगढ़ के चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ज़मानत देते हैं लेकिन उन्हें 72 घंटे तक रिहा नहीं किया जाता है. 72 घंटे बाद यूपी की पुलिस को ख्याल आता है और वह डॉ. कफील ख़ान पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगा देती है जिसके तहत 1 साल तक जेल में रखा जा सकता है.
  • दिल्ली में BJP की हार से चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर पर उठने लगे हैं सवाल
    रवीश रंजन शुक्ला
    दिल्ली के चुनाव नतीजे आने के बाद से ही अब तक न तो वो प्रदेश दफ्तर में दिखाई दिए और न ही इस करारी हार पर उनका कोई ट्वीट मिला. एक निजी टीवी इंटरव्यू में उन्होंने हार की ठीकरा कांग्रेस के गिरते वोट पर फोड़ा. हां, बीजेपी की हार का एक बड़ा कारण कांग्रेस का वोट बैंक 5 फीसदी से नीचे आना भी रहा. चुनाव त्रिकोणीय होने के बजाए बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच हुआ, जिसमें वोट परसेंटेज बढ़ने के बजाए बीजेपी को करारी हार मिली.
  • अमित शाह की दिल्ली में हार का नरेंद्र मोदी, BJP के लिए क्या होगा परिणाम...?
    स्वाति चतुर्वेदी
    शाह ने खुद भी बार-बार मतदाताओं से BJP के पक्ष में 'इतनी ज़ोर से EVM पर बटन दबाने के लिए कहा, ताकि करंट शाहीन बाग में महसूस हो...' अब इसी समिट में वह आत्मावलोकन के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि विशेष रूप से यह टिप्पणी आक्रामक नहीं थी.
  • ट्रंप से असलियत छुपाने की कोशिश क्यों?
    रवीश कुमार
    अहमदाबाद की एक झुग्गी न दिखे इसके लिए दीवार न बनाई जाए. नई बन रही आधी किलोमीटर लंबी यह दीवार अहमदाबाद एयरपोर्ट से गांधीनगर की ओर बनाई जा रही है. इस दीवार के पीछे सरानियावास नाम की एक झुग्गी बस्ती है. यहां के लोग अचानक से दीवार बनते देख हैरान भी हैं और चिन्तित भी. उनके आने जाने का रास्ता एक तरफ से बंद हो जाएगा. यह दीवार इसलिए बनाई जा रही है कि जब अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत आएं तो उन्हें यह झुग्गी न दिखे. 
  • जामिया के छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर सवाल
    रवीश कुमार
    अगर मामूली चोटें ही आईं तो फिर वे 5 छात्र कौन से हैं, जिनके अल शिफा अस्पताल में अभी भी भर्ती होने का दावा किया जा रहा है. कई छात्रों ने सांस लेने में तकलीफ की गंभीर शिकायत की है. ये सारी जानकारी जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी की प्रेस कांफ्रेंस में दी गई.
  • दिल्ली नतीजे : माई नेम इज केजरीवाल एंड आई एम नॉट अ टेररिस्‍ट
    रवीश कुमार
    एक मुख्यमंत्री को आतंकवादी बताना एक ऐसा प्रयोग था जो संयोग से फेल कर गया. दिल्ली की जनता ने केजरीवाल से कहा कि हम आपको जानते हैं और आप आतंकवादी नहीं हैं. आम आदमी पार्टी ने 60 से अधिक सीटें जीतकर बता दिया कि बीजेपी के सैकड़ों सांसदों, दर्जनों मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों की सभा काम नहीं आई.
  • बीजेपी के बयानवीर, जिनके बयान सुर्ख़ियां बने लेकिन दिल्ली नहीं जिता पाए
    दिल्ली के मतदाताओं ने अरविंद केजरीवाल के लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के सपने को पूरा कर दिया है. बड़ी आसानी के साथ इसे आम आदमी पार्टी के विकास के एजेंडे की जीत और बीजेपी के शाहीन बाग़ प्रोपेगेंडा की हार क़रार दिया जा सकता है. लेकिन बात सिर्फ़ यहीं तक सीमित नहीं है.
  • लेकिन यह जीत अभी अधूरी है
    प्रियदर्शन
    यह सच है कि दिल्ली के नागरिकों ने ध्रुवीकरण की राजनीति को नकार दिया है. लेकिन यह इतना सपाट मामला नहीं है. नागरिकों के फ़ैसले के पीछे और भी वजहें हो सकती हैं. आम आदमी पार्टी का दावा है कि उसके काम की वजह से उसे वोट मिले. बहुत दूर तक यह बात सही लगती है. मुफ्त बिजली-पानी, महिलाओं के लिए मुफ़्त यात्रा और स्कूलों और मोहल्ला क्लीनिकों की सुविधा इस महानगर के ग़रीब और निम्नमध्यवर्गीय लोगों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं रही. हालांकि सांप्रदायिकता ऐसी अंधी होती है कि उसे कई बार कुछ भी दिखाई नहीं पड़ता है.
  • अरविंद केजरीवाल की BJP पर शानदार जीत के 10 बड़े कारण
    आशुतोष
    दिल्ली में अस्थायी ही सही, नफरत की राजनीति की हार हुई है, और इससे देशभर में सकारात्मक संदेश गया है. लेकिन आने वाले चुनावों में भी यही रवैया अपनाया जाएगा, यह भविष्य के गर्त में है. मेरे विचार में, दिल्ली विधानसभा चुनाव सबसे ज़्यादा ज़हरीले, सबसे ज़्यादा अभद्र रहे हैं, जिसका श्रेय भारतीय जनता पार्टी (BJP) को ही जाना चाहिए.
  • गार्गी कॉलेज में छात्राओं से बदसलूकी पर चुप्‍पी क्‍यों?
    रवीश कुमार
    जब शहर में एक बार भीड़ बनती है तो वो एक चुनाव से गायब नहीं होती. वो उन घरों में रहती है जहां उन्हें पनाह मिलती है. अगर जेएनयू मामले में दिल्ली पुलिस ने अपना काम निष्पक्षता से किया होता तो इतनी जल्दी एक और भीड़ गार्गी कॉलेज के कैंपस में धावा नहीं बोलती. लड़कियों के कॉलेज में सैकड़ों की संख्या में मर्दों की भीड़ घुस आती है
  • तथ्यों और संदर्भों से जूझता प्रधानमंत्री का भाषण
    रवीश कुमार
    दो सीरयस बाते हैं. प्रधानमंत्री के भाषण में फेकिंग न्यूज वेबासाइट की बात कैसे आ गई और दूसरा क्या प्रधानमंत्री नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में नेहरू-लियाकत पैक्ट का जिक्र सही तरीके से कर रहे हैं?
  • ऐसे देशभक्तों से सावधान!
    प्रियदर्शन
    प्रधानमंत्री की आलोचना इस देश की आलोचना है, सरकार के ख़िलाफ़ कुछ कहना या करना देश के ख़िलाफ़ कुछ करना और कहना है. बाक़ी ज़रूरी सवालों पर जो सरलीकृत राय है- मसलन, तीन तलाक का ख़ात्मा बिल्कुल उचित है, पाकिस्तान में सताए जा रहे हिंदू भारत न आएं तो कहां जाएं, कश्मीर में धारा 370 तो ख़त्म होनी ही चाहिए थी, मुसलमानों को ज़्यादा बच्चे पैदा नहीं करने चाहिए, पाकिस्तान को नेस्तनाबूद कर देना चाहिए- वही इनकी भी राय है.
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