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विचार
  • क्या बीजेपी वाकई ढलान पर है?
    अखिलेश शर्मा
    लोकसभा चुनाव अगर समय पर होते हैं तो सिर्फ आठ महीने ही बचे हैं. जहां जाइए अब लोग पूछते हुए मिल जाएंगे कि 2019 में क्या होगा? पान की दुकानों पर, चाय के ठेलों पर, भीड़ में, बाज़ार में, राजनीतिक चर्चाओं का दौर है. क्या मोदी वापसी करेंगे? या राहुल की किस्मत बुलंद होगी?
  • करते रहें हिन्दू मुस्लिम डिबेट, SAIL, IOC, BSNL में 55000 नौकरियां घटीं
    रवीश कुमार
    आज की राजनीति नौजवानों आपको चुपके से एक नारा थमा रही है. तुम हमें वोट दो, हम तुम्हें हिन्दू मुस्लिम डिबेट देंगे. इस डिबेट में तुम्हारे जीवन के दस-बीस साल टीवी के सामने और चाय की दुकानों पर आराम से कट जाएंगे.
  • फिर इसके बाद ये पूछें कि कौन दुश्मन है...
    प्रियदर्शन
    जोश मलीहाबादी का एक किस्सा मशहूर है. वह पाकिस्तान चले गए थे और लौटकर भारत आ गए. लोगों ने पूछा कि पाकिस्तान कैसा है. जोश साहब ने जवाब दिया, बाक़ी सब तो ठीक है, लेकिन वहां मुसलमान कुछ ज़्यादा हैं.
  • केरल में बाढ़ से तबाही के लिए ज़िम्मेदार कौन?
    रवीश कुमार
    कब तक सेना के बहादुर जवान हम सबको बाढ़ और तूफान से निकालते रहेंगे. कब तक हम उनकी बहादुरी के किस्सों के पीछे अपनी नाकामी को छिपाते रहेंगे. सेना, नौसेना, वायुसेना, कोस्टगार्ड और एनडीआरएफ की दर्जनों टीमें न हों तो जान माल का नुकसान कितना होगा, हम अब अंदाज़ा लगा सकते हैं.
  • क्‍या नए दौर में सुधरेंगे भारत-पाक रिश्‍ते?
    अखिलेश शर्मा
    इमरान खान के पाकिस्तान की कमान संभालने के बाद भारत पाकिस्तान रिश्तों को लेकर पहल ही ग़लत अंदाज़ में शुरू हुई. दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरान खान को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देने का एक पत्र लिखा. लेकिन इसे लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया.
  • कौन बना रहा था महाराष्ट्र के पांच शहरों में धमाके की योजना...
    रवीश कुमार
    महाराष्ट्र के पांच शहरों में कम तीव्रता वाले धमाके की योजना का पर्दाफाश हुआ है. मुंबई, पुणे, सोलापुर, सतारा और नालासोपारा में धमाके की योजना थी. महाराष्ट्र एटीएस ने इस मामले में 20 देसी बम और 21 देसी पिस्तौल बरामद किया है. तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई थी जो अब चार हो गई है.
  • केरल तबाह हो रहा है, लाखों लोग मदद मांग रहे हैं...
    रवीश कुमार
    केरल के चेंगानुर से विधायक ने एशियानेट से कहा है कि अगर अभी रात में हेलिकाप्टर नहीं भेजे गए तो सुबह तक हज़ारों लोग मारे जा चुके होंगे. इडुक्की ज़िला से पूरा संपर्क टूट गया है. केरल ने 100 साल बाद ऐसी बाढ़ देखी है.
  • मेरे लिए अटल जी के मायने...
    अनुराग द्वारी
    वो कवि थे, नेता थे, खाने के शौक़ीन थे... प्रेम भी बखूबी किया... ताउम्र किया. दिल्ली में बैठकर जो छवि अटलजी के लिये गढ़ी गई वो तो एक शब्द में 94 साल के उनके बचपने के दोस्त, पुराने नवाब इक़बाल अहमद तोड़ देते हैं. बशर्ते लुटियन की सीमा छोड़ आप शिंदे की छावनी आएं, गली के आख़िरी छोर पर बने उनके घर तक जाएं.
  • प्रेस की आज़ादी पर 300 अमरीकी अख़बारों के संपादकीय
    रवीश कुमार
    अमरीकी प्रेस के इतिहास में एक शानदार घटना हुई है. 146 पुराने अख़बार बोस्टन ग्लोब के नेतृत्व में 300 से अखबारों ने एक ही दिन अपने अखबार में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर संपादकीय छापे हैं. आप बोस्टल ग्लोब की साइट पर जाकर प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर लिखे गए 300 संपादकीय का अध्ययन कर सकते हैं.
  • अंतिम यात्रा नहीं सियासी दस्तावेज थी अटल जी की विदाई...
    प्रभात उपाध्याय
    मेरी निगाह बरबस सड़क के उस पार एक मस्जिद के किनारे खड़े तमाम मुस्लिम नौजवानों और बच्चों पर पड़ी. सिर पर झक सफेद टोपी लगाए वे 'अटल जिंदाबाद' के नारे लगा रहे थे. मोबाइल से अंतिम यात्रा की तस्वीरें लेने का प्रयास कर रहे थे. फूल बरसा रहे थे. ये महज दो दृश्य नहीं थे. इसे भाजपा की सियासी यात्रा का दस्तावेज भी कह सकते हैं.
  • दूसरों को छोटे होने का एहसास नहीं होने देते थे वाजपेयी...
    कमाल खान
    आज वाजपेयी बहुत याद आते हैं. और बहुत सी यादें ऐसी हैं जिन्‍हें याद कर के यकीन नहीं होता कि क्‍या वाकई ये सब हुआ था? 2004 में लोकसभा चुनाव हो रहे थे. वाजपेयी लखनऊ से चुनाव जीत कर तीसरी बार पीएम थे. वो फिर यहां से लोकसभा उम्‍मीदवार थे. लखनऊ के राजभवन में उनकी प्रेस कॉन्‍फ्रेंस थी. इस बार उनकी प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के लिए सिक्‍योरिटी काफी सख्‍त थी.
  • अटल की शक्ति अटल की सीमा...
    प्रियदर्शन
    कुछ लोगों के व्यक्तित्व में अपनी तरह की एक ऊष्मा होती है. अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व कुछ ऐसा ही था. एक बड़प्पन उनकी शख्सियत में था. वे जवाहरलल नेहरू की तारीफ़ कर सकते थे, इंदिरा गांधी को बांग्लादेश युद्ध के बाद दुर्गा बता सकते थे और विपक्ष के बहुत सारे नेताओं से ऐसे दोस्ताना संबंध रख सकते थे जो दलगत राजनीति से ऊपर हों.
  • नीतीश कुमार का Blog: मैंने जो अटल जी से सीखा...
    नीतीश कुमार
    बिहार के लोग कभी अटल जी को नहीं भूल पाएंगे क्‍योंकि उन्‍होंने हमें स्‍वर्णिम चतुर्भुज राजमार्ग और कोशी नदी समेत तीन बड़े पुल दिए
  • अटल बिहारी वाजेपयी : अवसान एक युग का...
    विवेक रस्तोगी
    जिन्हें नहीं देखा, नहीं देखा, परन्तु राजनीति की मुझे समझ आने के बाद राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यही एकमात्र नाम है, जिसे आदर्श राजनेता मान पाया हूं... जिसे विजय पर घमंड नहीं, पराजय से खीझ नहीं... विपक्ष में रहो, तो सत्ता से लड़ते हुए भी उसे सम्मान दो... सत्ता में रहो, तो विपक्ष को पूरा मान दो...
  • मुश्किल दौर में कांग्रेस के प्रभुत्व को खत्म करने वाले इकलौते गैर कांग्रेसी पीएम थे वाजपेयी...
    आशुतोष
    अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद सबसे ज्यादा मन को मोह लेने वाले, कवि और एक करिश्माई वक्ता थे. इसमें कोई दो राय नहीं कि वाजपेयी भारत के सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ वक्ताओं में से एक थे.
  • शाहनवाज हुसैन की कलम से : मेरे नेता अटल...
    अटल जी से मेरी पहली और निजी मुलाकात 1987 में हुई थी. तब से तकरीबन 30 सालों में उनसे जुड़ी मेरी तमाम यादें इस वक्त मेरी आंखों के सामने तैर रही हैं. अटल जी का जाना न सिर्फ देश के लिए बल्कि मेरी निजी जिंदगी के लिए भी बहुत बड़ी क्षति है. निकट भविष्य में उनके जैसा महान नेता, उनके जैसा बेहतरीन कवि, लेखक और वक्ता मिलना बेहद मुश्किल है. वो अच्छे नेता थे, अच्छे इंसान थे और मेरे लिए सबसे अच्छे अभिभावक.
  • विपक्ष आपको हमेशा याद रखेगा अटल जी...
    रवीश कुमार
    अटल बिहारी वाजपेयी की असली विरासत विपक्ष की राजनीति में है. विपक्ष की राजनीति विरोध की राजनीति होती है. 1957 से 1996 तक विरोध और विपक्ष की राजनीति में उनका जीवन गुज़रा है. उनके राजनीतिक जीवन का 90 फीसदी हिस्सा विपक्ष की राजनीति का है.
  • दो बार चुनाव होने से किसे नफा, किसे नुकसान...
    सुधीर जैन
    देश में विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ करवाने की बात फिर उठवाई जा रही है. फिलहाल सारी नहीं, तो कुछ विधानसभाओं और लोकसभा चुनाव साथ-साथ करवाने की सुगबुगाहट तो है ही. इस काम में कई किंतु-परंतु लगे हैं. इस समय कानूनन एक साथ चुनाव संभव नहीं है, कुछ ही घंटे पहले चुनाव आयोग यह बता चुका है.
  • गिरते रुपया का आम आदमी पर क्या होगा असर?
    रवीश कुमार
    डॉलर के मुक़ाबले रुपये की राजनीति घूम फिर कर 2013-14 आ जाती है जब यूपीए के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को नकारा साबित करने के लिए रुपये की कीमत का ज़िक्र होता था. आप मौजूदा प्रधानमंत्री मोदी के उस समय के ट्वीट को देखें या भाषण सुने तो रुपये के गिरते दाम को भारत के गिरते स्वाभिमान से जोड़ा करते थे. विपक्ष के नेताओं से लेकर रविशंकर और रामदेव भी कहा करते थे कि मोदी जी प्रधानमंत्री बनेंगे तो डॉलर के मुकाबले रुपया मज़बूत हो जाएगा. जब भी रुपया कमज़ोर होता है ट्‌विटर पर रविशंकर का ट्वीट चलने लगता है कि मोदी जी के प्रधानमंत्री बनते ही एक डॉलर की कीमत 40 रुपये हो जाएगी यानी रुपया मज़बूत हो जाएगा. वे किस आधार पर कह रहे थे, वही बता सकते हैं अगर वे इस पर कुछ कहें. आज भारत का रुपया डॉलर के मुकाबले इतना कमज़ोर हो गया जितना कभी नहीं हुआ था. पहली बार एक डॉलर की कीमत 70 रुपये हो गई है.
  • दिलचस्प मुकाम पर पहुंची एक देश एक चुनाव की बहस
    अखिलेश शर्मा
    एक देश एक चुनाव की बहस एक दिलचस्प मुकाम पर पहुंच गई है. बीजेपी की ओर से यह संकेत मिलते ही कि अगले साल लोक सभा चुनावों के साथ ग्यारह राज्यों के चुनाव भी कराए जा सकते हैं, राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. इस बात पर भी बहस हो रही है कि आखिर यह मुमकिन कैसे होगा?
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