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विचार
  • राजस्थान में कौन जीता और कौन हारा, किसको मिला राहुल का सहारा...
    उमाशंकर सिंह
    उधर सचिन के जयपुर आने की ख़बर के बीच गहलोत जैसलमेर निकल गए. कहा गया कि सचिन के लौटने के उनके समर्थक विधायकों में जो नाराज़गी है उसे दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. इधर 19 थे तो उधर सौ से ज़्यादा हैं. तो नाराज़गी का आलम भी ज़्यादा होगा. लेकिन अब गहलोत के सामने हाईकमान के फ़ैसले और निर्देश की बाध्यता होगी और उनको उसी के हिसाब से चलना होगा.
  • पायलट नहीं बन पाए 'को-पायलट'
    मनोरंजन भारती
    राजस्थान में 33 दिनों से चल रहे संकट में अचानक एक नया मोड़ आया है. बताया जा रहा है सचिन पायलट और राहुल गांधी की मुलाकात हुई है जिसमें प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं. अब जो खबरें सचिन पायलट कैंप से आ रही हैं उनकी मानें तो राहुल गांधी ने पायलट को भरोसा दिलाया है उनकी सम्मानजनक घर वापसी होगी.
  • रोज़ आ रहे हैं 60,000 से ज़्यादा COVID-19 केस, क्या वाकई भारत की कामयाबी बड़ी है...?
    रवीश कुमार
    8 अगस्त को प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक ट्विट किया है. प्रधानमंत्री का बयान है कि "आप ज़रा कल्पना कीजिए, अगर कोरोना जैसी महामारी 2014 से पहले आती तो क्या स्थिति होती? "
  • रबीन्द्रनाथ टैगोर का राष्ट्रवाद और आज का समय
    पूर्वी लद्दाख में जब चीन के भारतीय सीमा में घुसपैठ की खबर आई तब एक जन आक्रोश पैदा किया गया. टिक टॉक जैसे ऐप बैन कर. चीन की कंपनी को बंद कर चीन को सबक सीखाने का जश्न मना. फिर कहा गया कि चीन ने भारतीय सीमा में प्रवेश ही नहीं किया है.
  • कोरोना की तरह ही आंकड़ों की बाजीगरी में खोईं आर्थिक चिंताएं
    रवीश कुमार
    अर्थ तंत्र ने मुक्त मन संसार को कुछ ज़्यादा ही अधिग्रहीत कर लिया था. शिक्षा, फ़ीस और परीक्षा जैसे सवाल उचित ही जर्जर होकर ख़त्म हो गए. इनका कुछ होता तो नहीं है, अनावश्यक एक की चिंता दूसरे तक फैल जाती है. रोज़गार कारोबार तो वैसे ही बनते-बिगड़ते रहे हैं. अब इन सबका कवरेज बंद होना चाहिए. पत्रकारिता को इन प्रश्नों से दूरी बनाने की ज़रूरी है.
  • उमा भारती के जोक और हर तरफ ठहाकों ने अयोध्‍या कवरेज की थकान उड़ा दी..
    आलोक पांडे
    उमा भारती ने पहले कहा था कि वह अयोध्या में सरयू नदी के किनारे मौजूद रहेंगी और राम मंदिर के भूमि पूजन समारोह में जाने से बचेंगी क्योंकि उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी और अन्य लोगों के संक्रमित होने के बारे में चिंता है क्‍योंकि वह ट्रेन से यात्रा करके आई हैं. हालांकि बीजेपी की इस दिग्‍गज नेता ने बाद में अपना विचार बदला और इस कार्यक्रम में शामिल हुईं.
  • कोरोना का कवरेज बंद कर देने से यह खत्म नहीं होगा
    रवीश कुमार
    चैनल न्यूज़ एशिया देख रहा था, अनसोहातो देखने लगा. काफ़ी देर तक दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में कोरोना को लेकर ख़बरें आती रहीं, जाती रहीं. भारत में तो कोई सोच भी नहीं सकता. कोरोना का मसला ही खत्म मान लिया गया है. WHO के चीफ़ ने कहा है कि कई वैक्सीन उम्मीदवार अपने परीक्षण के तीसरे चरण में हैं, लेकिन फ़िलहाल उम्मीद की कोई किरण दिखाई नहीं देती. शायद कोई भी हो न. उनका ज़ोर अभी भी उन्हीं बुनियादी बातों पर है. अस्पतालों को ठीक किया जाए. कोई संक्रमित हो तो उसका टेस्ट हो और उसके संपर्कों की जांच हो. फिर सबका इलाज हो. ये संक्रमण न हो इसके लिए देह से दूरी का पालन करते रहा जाए.
  • प्रिय नौजवानो परीक्षा दे दीजिए, फीस बढ़ गई तो दे दीजिए, जैसा आपने बोया था, काट लीजिए
    रवीश कुमार
    रोज़ाना मैसेज आते हैं कि सर, हमारी परीक्षा रद्द करवा दें, कोरोना का ख़तरा है. वे जानते हैं कि मैं शिक्षा मंत्री नहीं हूं, न ही यूजीसी हूं, फिर भी लिखते हैं. छात्र सुप्रीम कोर्ट भी गए थे कि परीक्षा न हो. 10 अगस्त तक सुनवाई टल गई. यूजीसी ने छह जुलाई को आदेश जारी किया है कि सितंबर के अंत तक अंतिम वर्ष की परीक्षा पूरी की जा सकती है. कोई छात्र बाढ़ में फंसा है, कोई होली में घर गया तो तालाबंदी के कारण घर ही रह गया. किताब कापी कहीं और छूट गई. इस बीच कइयों के घर आर्थिक तबाही आई होगी, तो दिल्ली या पढ़ने के शहर आकर किराया देने में ही पसीने छूटेंगे. लेकिन जब कोर्ट से राहत नहीं मिली तो मैं क्या कर सकता हूं. मैं समझ नहीं पाता कि क्या इन छात्रों को उम्मीद करना भी नहीं आता, सिर्फ मुझ लिख देना ही ध्येय है क्या. 
  • एक लाख पैकेट प्रसाद बंटेगा , शिलान्यास का एक अहम दस्तावेज़
    रवीश कुमार
    अयोध्या प्रशासन की यह विज्ञप्ति कम ऐतिहासिक नहीं है. एक साँस में पढ़ जाइये. पसीने छूट जाएँगे. किसी कंपनी के सी ई ओ तो अस्पताल में भर्ती हो जाएँ. निर्देशों की भरमार है.
  • महामहिम के महा कारनामे..
    मनोरंजन भारती
    अभी तक यह आरोप कांग्रेस द्वारा नियुक्त किए गए राज्यपालों पर लगते रहे हैं मगर हाल के वर्षों में एनडीए शासन द्वारा राज्यपालों ने सभी को पीछे छोड दिया है. बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड का उदाहरण तो दे ही चुका हूं. राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्रभी इसका सबसे ताजा उदाहरण है, जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत विधानसभा का सत्र बुलाना चाहते हैं मगर राज्यपाल महोदय को यह नागवार गुजर रहा है.
  • बोली लगेगी 23 सरकारी कंपनियों की, निजीकरण का ज़बरदस्त स्वागत
    रवीश कुमार
    सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में काम करने वालों के लिए यह ख़ुशख़बरी है. उनका प्रदर्शन बेहतर होगा और वे प्राइवेट हो सकेंगे. जिस तरह से रेलवे के निजीकरण की घोषणाओं का स्वागत हुआ है उससे सरकार का मनोबल बढ़ा होगा. आप रेलमंत्री का ट्विटर हैंडल देख लें. पहले निजीकरण का नाम नहीं ले पाते थे लेकिन अब धड़ाधड़ ले रहे हैं. जो बताता है कि सरकार ने अपने फ़ैसलों के प्रति सहमति प्राप्त की है. हाँ ज़रूर कुछ लोगों ने विरोध किया है मगर व्यापक स्तर पर देखें तो वह विरोध के लिए विरोध जैसा था. जो भी दो चार लोग विरोध करेंगे उनके व्हाट्स एप में मीम की सप्लाई बढ़ानी होगी ताकि वे मीम के नशे में खो जाएँ. नेहरू वाला मीम ज़रूर होना चाहिए.
  • ध्यान रहे : कोरोना न तो भाभी जी के पापड़ से खत्म होने वाला है न बाबाओं की दवाई से
    करीब दो महीने पहले किसी एक रिसर्च स्कॉलर का फोन आया. रिसर्च करके वो कोरोना के ऊपर कोई किताब लिख रहे थे. जब मैंने पूछा कि आप मुझसे क्या चाहते हैं तो उनका जवाब था कि कोरोना के ऊपर उन्होंने काफी रिसर्च की है और टीवी पर आ कर बोलना चाहते हैं. उनका कहना था कि भारत में कोरोना का कोई असर नहीं होगा, लोगों को डरने की जरूरत नहीं. लॉकडाउन खोल देना चाहिए, लॉकडाउन करके सरकार ने गलती की है.
  • विक्रम जोशी को बदमाशों ने नहीं, सड़े हुए सिस्टम ने मारा; नजीर स्थापित कीजिए मुख्यमंत्री जी
    मनीष शर्मा
    आखिर पुलिस विक्रम जोशी के मरने के बाद जागी नहीं, जगाई गई. और फिर वही पुराना रटा-रटाया लीपापोती का बहुत ही घटिया और बासी हो चुका फॉर्मूला, चौकी इंचार्ज, एसओ या सीओ का निलंबन, परिवार को कुछ आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को नौकरी. लीपापोती का एक बेहतरीन तरीका. क्या इससे परिवार के नुकसान की भरपायी हो जाएगी? क्या इससे उन दस और छह साल की बेटियों के आगे से ताउम्र उनके पिता की हत्या की तस्वीरें मिट पाएंगी? क्या ये बेटियां इस घटना से उबर पाएंगी? पुलिस की क्या छवि बनेगी इन बेटियों की नजरों में?
  • राजस्थान में टॉम और जेरी में रेस जारी है...
    मनोरंजन भारती
    राजस्थान में सचिन पायलट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पीछे लगे हुए हैं तो सचि पायलट के पीछे राजस्थान की की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी एसओजी लगी हुई है. दूसरी ओर केन्द्र सरकार ने अशोक गहलोत के करीबियों के पीछे ईडी या प्रवर्तन निदेशालय और इनकम टैक्स को लगाया हुआ है.
  • कैसे मुमकिन बन रही है आईपीएल की राह
    विमल मोहन
    आईसीसी ने एलान किया है कि 2020 में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले वर्ल्ड कप की टिकटें 2021 में भी मान्य रहेंगी. मतलब साफ़ है लगातार दो साल होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप के आयोजनों को एक-एक साल के लिए टाल दिया गया है और साथ ही आईसीसी क्रिकेट वनडे वर्ल्ड के आयोजन को भी टालना पड़ा. 
  • दुश्मन का दुश्मन दोस्त, राजस्थान में राम राम सा...
    मनोरंजन भारती
    राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सत्ता का संघर्ष कई स्तरों पर चल रहा है. एक लड़ाई जयपुर में लड़ी जा रही है जहां जयपुर से तीस किलोमीटर दूर एक रिसॉर्ट में कांग्रेस के विधायक जमे हुए हैं तो दूसरी तरफ गुड़गांव के एक रिसॉर्ट में सचिन के सर्मथक विधायक डटे हुए हैं. वहीं एक लड़ाई अदालत में भी लड़ी जा रही है जहां भारत के सबसे नामी गिरामी वकील जैसे हरीश साल्वे, मुकुल रोहतगी और अभिषेक मनु सिंघवी एक-दूसरे से भिड़ रहे हैं. मगर इस सबके बीच राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया नदारद हैं..वे अपने गृह क्षेत्र झालावाड़ में हैं और जयपुर तक आने को राजी नहीं हैं.
  • गुना में पुलिस के डंडे बजते रहे और कई सवाल पीछे छूट गए ...
    अनुराग द्वारी
    कुछ दिनों पहले मध्यप्रदेश में साहूकारी संशोधन विधेयक एवं अनुसूचित जनजाति ऋण मुक्ति विधेयक 2020 को कैबिनेट की स्वीकृति दे दी गई जिसमें अनुसूचित क्षेत्रों में निवासरत अनुसूचित जनजाति वर्ग के सभी व्यक्तियों के 15 अगस्त 2020 तक के सभी ऋण ब्याज सहित माफ किए जाने का प्रावधान किया जा रहा है. दूसरे वर्गों को भी साहूकारों के चंगुल से छुड़ाने के लिए मध्यप्रदेश साहूकार (संशोधन विधेयक 2020) लाया जा रहा है.
  • गुना में पुलिस के डंडे बजते रहे और कई सवाल पीछे छूट गए ...
    अनुराग द्वारी
    कुछ दिनों पहले मध्यप्रदेश में साहूकारी संशोधन विधेयक एवं अनुसूचित जनजाति ऋण मुक्ति विधेयक 2020 को कैबिनेट की स्वीकृति दे दी गई जिसमें अनुसूचित क्षेत्रों में निवासरत अनुसूचित जनजाति वर्ग के सभी व्यक्तियों के 15 अगस्त 2020 तक के सभी ऋण ब्याज सहित माफ किए जाने का प्रावधान किया जा रहा है. दूसरे वर्गों को भी साहूकारों के चंगुल से छुड़ाने के लिए मध्यप्रदेश साहूकार (संशोधन विधेयक 2020) लाया जा रहा है.
  • बीजेपी की झोली में पायलट, तेल देखिए और तेल की धार देखिए...
    राजस्थान के इस सत्ता संघर्ष में भले ही सचिन पायलट यह कहते रहें कि वे बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे और कांग्रेस में हैं और रहेंगे... कांग्रेस आलाकमान ने भी उनका विश्वास किया और कहा कि सचिन के लिए दरवाजे खुले हैं, हमें युवा नेताओं की जरूरत है और वे राजस्थान जाएं... मगर सचिन के इस बयान में कि वे बीजेपी के साथ हैं, कोई सच्चाई नहीं नहीं दिख रही है. पहली बात सचिन ने अपने विधायकों को हरियाणा के पांच सितारा होटल में रख रखा है जिसके बाहर हरियाणा के बड़ी रैंक के अधिकारी अपने दल बल, यानी हरियाणा पुलिस के साथ पहरा दे रहे हैं. किसी को वहां जाने की अनुमति नहीं है. मीडिया को तो मीलों दूर रखा है.
  • राजनीतिक अस्तित्व  के लिए सचिन पायलट की राह
    स्वाति चतुर्वेदी
    सभी लोग अलग-अलग कार्रवाई की बात करते हैं जबकि वास्तविकता यह है कि पायलट अपने साथ जुड़े 16 विधायकों के साथ अब भी बीजेपी से बात कर रहे हैं. अपना चेहरा बचाने की आशा में उन्होंने एक स्वतंत्र संगठन के बारे में सोचा था. उनका अनुमान है कि बीजेपी और कांग्रेस के कुछ ''खिलाड़ियों'' के समर्थन वाली उनकी नई पार्टी दुर्घटनाग्रस्त हो जाएगी.
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