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विचार
  • राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर पत्रकारों, पारा शिक्षकों की पिटाई...
    रवीश कुमार
    आज कल हर दिन कोई न कोई दिवस यानी डे आ जाता है. एक डे जाता नहीं कि दूसरा डे आ जाता है. हर डे की अपनी प्रतिज्ञा होती है और न भूलने की कसमें होती हैं, मगर ये उसी दिन तक के लिए वैलिड होती है. अगले दिन दूसरा डे आता है, पोस्टर बैनर सब बदल जाता है. नए सिरे से प्रतिज्ञा लेनी पड़ती है कि हम इनके आदर्शों को नहीं भूलेंगे. भूल जाते हैं कि पिछले दिन ऐसी ही एक प्रतिज्ञा ले चुके हैं.
  • मायावती-जोगी ने दिलचस्प बनाया चुनाव...
    मनोरंजन भारती
    छत्तीसगढ़ में एक चरण के चुनाव के बाद बसपा नेता मायावती ने यह साफ किया है कि उनकी पार्टी चुनाव के बाद बीजेपी और कांग्रेस से समान दूरी बनाकर रखेगी. हालांकि उनके ही सहयोगी अजीत जोगी ने एक दिन पहले यह पूछे जाने पर कि क्या जरूरत पड़ी जो बीजेपी को अपना सर्मथन दे सकते हैं. इस पर उन्होंने कहा था कि राजनीति में कुछ भी संभव है मगर बाद में वे अपने बयान से पलट गए. जाहिर है मायावती चुनाव परिणाम से पहले अपने पत्ते नहीं खोलना चाहती है. जाहिर है इन चुनावों का 2019 के लोकसभा चुनाव पर भी काफी असर पड़ने वाला है. सभी पार्टियों को पता है कि अभी तक छत्तीसगढ में बीजेपी और कांग्रेस के बीच जीत का अंतर एक फीसदी से भी कम होता है. ऐसे में यहां एक-एक वोट कीमती होता है.
  • बिहार में कुशवाहा फैक्टर...
    मनोरंजन भारती
    बिहार में एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है...लोकसभा चुनाव के लिए हुए सीट बंटवारे में केवल दो सीटें मिलने से उपेंद्र कुशवाहा नाराज चल रहे हैं...कहा जा रहा है कि वे दिल्ली आ कर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिलने की कोशिश करेगें... उधर जेडीयू की तरफ से ताजा बयान यह है कि किसी के भी गठबंधन में आने या जाने से कोई भी फर्क नहीं पड़ता है, यानि जेडीयू ने यह तय कर लिया है कि मौजूदा एनडीए गठबंधन में कुशवाहा के लिए कोई जगह नहीं है...इसके पीछे का कारण समझना जरूरी है. आखिर नीतीश कुमार को उपेंद्र कुशवाहा क्यों पसंद नहीं हैं...वजह साफ है दोनों की राजनीति का आधार एक ही वोट बैंक है...
  • क्या रमन सिंह चौथी बार मुख्यमंत्री बन पाएंगे?
    रवीश कुमार
    छत्तीसगढ़ के चुनावों में चार-चार मोर्चा है. एक मोर्चा है रमन सिंह का जो 15 साल से मुख्यमंत्री हैं, चौथी बार बनना चाहते हैं. कांग्रेस पार्टी ने अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. अजित जोगी की जनता कांग्रेस और मायावती की बसपा का तीसरा मोर्चा है. चौथा मोर्चा है समाजवादी पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी.
  • कॉलेजों में शिक्षक नहीं हैं तो छत्तीसगढ़ के छात्र कॉलेज जाना ही बंद कर दें...?
    रवीश कुमार
    घोषणापत्र देखकर भले जनता वोट न करती हो मगर चुनावों के समय इसे ठीक से देखा जाना चाहिए. दो चार बड़ी हेडलाइन खोजकर हम लोग भी घोषणापत्र को किनारे लगा देते हैं. राजनीतिक दल कुछ तो समय लगाते होंगे, बात-विचार करते होंगे कि क्या इसमें रखा जा रहा है और क्या इससे निकाला जा रहा है, इसी को समझकर चुनावी चर्चाओं में घोषणापत्र को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
  • भारत के पास एशियाई देशों से सुनहरे संबंधों का सुनहरा मौका...  
    डॉ विजय अग्रवाल
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सिंगापुर में आयोजित 23वें आसियान शिखर सम्मेलन में जाना पहले की तुलना में अब इस मायने में ज़्यादा महत्व रखता है कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के साम्राज्यवादी मंसूबे कुछ अधिक तेज़ी से फैलते दिखाई दे रहे हैं. इस लिहाज़ से इसी सम्मेलन के दौरान क्वाड समूह के तीन अन्य देशों के साथ उनकी बातचीत अहम मायने रखती है. ये तीन अन्य देश जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया हैं, जिनका प्रशांत महासागर से सीधा संबंध है.
  • राजस्थान...गहलोत या पायलट
    मनोरंजन भारती
    राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति की बिसात बिछ चुकी है. इसके साथ ही हमेशा की तरह नेताओं में भी इस पार्टी से उस पार्टी में जाने के लिए भगदड़ मची हुई है...नेताओं को मौसम वैज्ञानिक भी कहा जाता है खासकर चुनाव के संर्दभ में उन्हें चुनाव के ठीक पहले अंदाजा हो जाता है कि ऊंट किस करवट बैठेगा. इसके बाद वह उन पार्टियों के तरफ रुख करते हैं, जिसके बारे में उन्हें लगता है कि इस पार्टी की सरकार बनने वाली है...कुछ ऐसा ही राजस्थान कांग्रेस में हो रहा है...
  • राफेल खरीद कांड, अपराधशास्त्र के नज़रिये से...
    अदालत ने विमान के दाम के बारे में किसी तरह की सुनवाई से फिलहाल इंकार कर दिया. अदालत ने कहा कि जब तक विमान के दाम के बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं होती, तब तक इस मामले में कोई बात नहीं होगी. हालांकि अदालत ने यह ज़रूर कहा कि यह फैसला करना पड़ेगा कि सरकार से इसे सार्वजनिक करने के लिए कहा जा सकता है या नहीं. बहरहाल, बुधवार को राफेल खरीद में कथित घोटाले में खरीद प्रकिया पर अदालत ने आरोपियों और शिकायतकर्ताओं को तफसील से सुना.
  • क्या रफ़ाल सौदे में कहीं कुछ छुपाया जा रहा है?
    रवीश कुमार
    रफाल विमान सौदा सिर्फ सरकार के लिए ही टेस्ट नहीं है, बल्कि मीडिया के लिए भी परीक्षा है. आप दर्शक मीडिया की भूमिका को लेकर कई सवाल करते भी रहते हैं. यह बहुत अच्छा है कि आप मीडिया और गोदी मीडिया के फर्क को समझ रहे हैं. हम सबको परख रहे हैं.
  • राजस्थान में कांग्रेस की बात उलझी या फिर सुलझी
    अखिलेश शर्मा
    राजस्थान में खुद को सत्ता के करीब पा रही कांग्रेस किसी तरह का जोखिम मोल लेने को तैयार नहीं. सचिन पायलट और अशोक गहलोत की महत्वाकांक्षाओं से जूझ रही पार्टी ने अब बीच का रास्ता निकाला है. मध्य प्रदेश के उलट राजस्थान में इन दोनों ही नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए कह दिया गया है.
  • किसानों से किए गए वादे कितने पूरे होते हैं?
    रवीश कुमार
    हमने पिछले कई सालों में किसानों के कई आंदोलन देखे. 29-30 इस आंदोलन के केंद्र में दो मुद्दे प्रमुख रूप से रहे. फसलों का सही दाम दिया जाए और फसल बिकने की व्यवस्था सही की जाए. मोदी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य को अपने वादे के हिसाब से लागत से डेढ़ गुना देने का दावा करती है लेकिन तथ्य कुछ दूसरे भी होते हैं.
  • सबरीमला - परंपरा बनाम अधिकार
    अखिलेश शर्मा
    केरल के सबरीमला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति देने के अपने फैसले पर दायर पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया है. यह सुनवाई बाईस जनवरी को खुली अदालत में होगी. सभी 49 पुनरीक्षण याचिकाओं को मंजूर कर लिया गया है.
  • तो क्या आप देश का भी नाम बदलेंगे...?
    प्रियदर्शन
    विचारधाराएं अपनी आस्था के अनुसार जगहों के नाम बदलती रही हैं. कुछ व्यावहारिक और कुछ बड़ी मुश्किलों के अलावा इसमें ख़तरा बस इतना है कि सत्ता बदलने के साथ ये नाम नए सिरे से बदल दिए जा सकते हैं. उत्तर प्रदेश में यह तमाशा हमने बार-बार देखा और अब ठीक से याद भी नहीं रहता कि किस पुराने शहर को किस नए नाम से पुकारा जाए.
  • कैंसर की चुनौती से निपटने की तैयारी कितनी?
    रवीश कुमार
    भारत कैंसर से लड़ने के लिए कितना तैयार है? महानगरों को छोड़ राज्यों की राजधानियों और कस्बों में कैंसर से लड़ाई की हमारी तैयारी क्या है? गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर कैंसर से जूझ रहे हैं. विदेशों में भी इलाज के लिए गए और फिर वापस आकर एम्स में भी इलाज करवाया.
  • चुनाव प्रभारी मंत्री बन रह गए हैं देश के शिक्षा मंत्री जावड़ेकर, नई शिक्षा नीति कहां है?
    रवीश कुमार
    2014 के घोषणापत्र में बीजेपी ने नई शिक्षा नीति का वादा किया था. इंटरनेट पर सर्च कीजिए, वो नई शिक्षा नीति कहां है, अता-पता नहीं चलेगा. हमने अख़बारों में छपे इस संदर्भ में उनके बयानों का विश्लेषण किया है और साथ ही उनके ट्विटर हैंडल के ट्वीटस और री-ट्वीट्स का जिससे हम देख सकें कि प्रकाश जावड़ेकर देश की शिक्षा को लेकर कितने ट्वीट करते हैं और बीजेपी को लेकर कितने.
  • वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?
    रवीश कुमार
    राजस्थान बीजेपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है कि भाजपा ने 15 लाख नौकरियां देने का वादा किया था. 44 लाख से अधिक लोगों को नौकरियां दी हैं. 9 नवंबर का ट्वीट है. राजस्थान बीजेपी का ट्वीट है तो यह राजस्थान के बारे में ही दावा होगा. मैंने एक दिन नहीं, कई हफ़्ते प्राइम टाइम में नौकरी सीरीज़ की है. हमने देखा है और दिखाया है कि कैसे पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, यूपी और राजस्थान में नौजवानों को विज्ञापन देकर उलझाया जाता है. हमारे नौजवानों ने बहुत विरोध किया. प्रदर्शन किया. अपनी जवानियां बर्बाद होती देखी मगर किसी ने उनका साथ नहीं दिया. मुझे यक़ीन नहीं होता कि राजस्थान में 44 लाख नौकरियां दी गई हैं.
  • वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?
    रवीश कुमार
    राजस्थान बीजेपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है कि भाजपा ने 15 लाख नौकरियां देने का वादा किया था. 44 लाख से अधिक लोगों को नौकरियां दी हैं. 9 नवंबर का ट्वीट है. राजस्थान बीजेपी का ट्वीट है तो यह राजस्थान के बारे में ही दावा होगा. मैंने एक दिन नहीं, कई हफ़्ते प्राइम टाइम में नौकरी सीरीज़ की है. हमने देखा है और दिखाया है कि कैसे पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, यूपी और राजस्थान में नौजवानों को विज्ञापन देकर उलझाया जाता है. हमारे नौजवानों ने बहुत विरोध किया. प्रदर्शन किया. अपनी जवानियां बर्बाद होती देखी मगर किसी ने उनका साथ नहीं दिया. मुझे यक़ीन नहीं होता कि राजस्थान में 44 लाख नौकरियां दी गई हैं.
  • फेक न्यूज़ बनाम असली न्यूज़ की लड़ाई
    रवीश कुमार
    पूरी दुनिया में झूठ एक नई चुनौती बनकर उभरा है. झूठ की दीवार हमारे आस पास बड़ी होती जा रही है और चौड़ी भी होती जा रही है. झूठ की इस दीवार को भेदना आसान नहीं है. व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के ज़रिए रोज़ना कई प्रकार के झूठ फैलाए जा रहे हैं.
  • सरकार का पिंड नहीं छूटा नोटबंदी कांड से
    सुधीर जैन
    कल यानी गुरुवार को नोटबंदी की दूसरी बरसी थी. विश्वप्रसिद्ध अर्थशास्त्री और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के हादसे को याद दिलाया. उन्होंने बताया कि देश की अर्थव्यवस्था को चैपट करने में नोटबंदी की क्या और कितनी भूमिका रही.
  • नोटबंदी ने कैसे बिहार की राजनीति बदल दी 
    मनीष कुमार
    भाजपा के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से नीतीश कुमार के इस क़दम का स्वागत किया. ख़ुद प्रकाश पर्व के दौरान जब पटना के गांधी मैदान में मुख्य समारोह में भाग लेने ख़ुद प्रधान मंत्रीनरेंद्र मोदी जब आये तब उन्होंने बिहार में शराबबंदी के लिए नीतीश कुमार की तारीफ़ की . जिससे यह साफ़ था कि इन दोनो नेताओं के बीच तनाव ख़त्म और संवाद जारी हैं .लेकिन इससे पूर्व वो या नीतीश की सोची समझी रणनीति कहिए या संयोग कि महागठबंधन में नीतीश नोटबंदी के मुद्दे पर अलग थलग पर गये थे.
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