NDTV Khabar
होम | ब्लॉग

ब्लॉग

विचार
  • अलविदा खय्याम : संगीत जो सुना जाता रहेगा जी भर के...
    सूर्यकांत पाठक
    प्रख्यात संगीतकार मोहम्मद जहूर खय्याम हाशमी यानी कि खय्याम हिन्दी सिनेमा को कभी न भुलाया जाने वाला संगीत का तोहफा देकर दुनिया से रुखसत हो गए. उनका संगीत सुकून देने वाला, तरंगित करने वाला और शांति का अलौकिक अहसास कराने वाला है. यह वह संगीत है जो आपके सिरहाने बैठकर आपको मधुरता की थपकियां देकर दूर कहीं ऐसी जगह ले जाता है जहां तनाव लुप्त हो जाता है. ऐसा संगीत जो नीरवता के अंतरालों के साथ अपने अलग अर्थ प्रकट करता, अलग आस्वाद देता है. खय्याम फिल्म अभिनेता बनना चाहते थे अच्छा हुआ बाद में उन्होंने यह इरादा छोड़ दिया अन्यथा भारतीय सिनेमा जगत और संगीत प्रेमी उनकी बेजोड़ रचनाओं से महरूम रहते.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : उद्योग जगत को मिल गई इनकम टैक्स से मुक्ति!
    रवीश कुमार
    2014 के बाद शायद यह पहला बड़ा मौक़ा है जब उद्योगपतियों की सुगबुगाहट, खुली नाराज़गी और अर्थव्यवस्था के संकट के दबाव में वित्त मंत्री निमर्ला सीतारमण ने प्रेस कांफ्रेस में कई बड़े एलान किए. ये वो एलान थे जिनके बारे में सरकार के पीछे हटने की उम्मीद कम नज़र आ रही थी
  • ये हैं वे ख़बरें, जो जनता देखना चाहती है...
    रवीश कुमार
    जनता ने अपनी न्यूज़ लिस्ट भेजी है. जम्मू एवं कश्मीर, गुजरात, पंजाब, बंगाल, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार से. आपको यह बोरिंग लगेगा, लेकिन देखिए, इतनी तकलीफों के बाद भी नेशनल सिलेबस का ज़ोर है. उसका कारण भी समझिए. कहीं कोई सुना नहीं जा रहा है. इन समस्याओं से प्रभावित लोगों की संख्या लाखों में होगी. फिर भी कहूंगा कि आप हर मैसेज को पढ़ें.
  • प्राइम टाइम इंट्रो : आखिर रैगिंग को क्यों छिपा रहे हैं कुलपति?
    रवीश कुमार
    इस देश में आप जिसे चाहें लाइन में खड़ा कर सकते हैं, उसे हांक सकते हैं. इसी की नुमाइश है यह वीडियो और कतार में चले आ रहे मेडिकल के छात्र. यूपी के सैफई आयुर्विज्ञान महाविद्यालय में मेडिकल कालेज के छात्र हैं, जिनकी रैगिंग हुई है और सिर मुड़वा दिया गया है.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग: प्रिय बिहार सरकार 'यदि है'...
    रवीश कुमार
    मैसेज भेजने वाले छात्रों का कहना है कि 2015-18 का परिणाम 2019 में आया. वो भी पूरा परिणाम नहीं आया. 92,000 छात्रों का परिणाम कुछ दिन पहले आया है. जिसकी वजह से दारोगा भर्ती परीक्षा के फार्म नहीं भर पा रहे हैं, क्योंकि नियम यह बनाया गया है कि 1 जनवरी 2019 तक ग्रेजुएशन करने वाले छात्र ही भर सकते हैं.
  • शेयर बाज़ार को भी मार डाला 'फील गुड' ने
    सुधीर जैन
    अर्थव्यवस्था के लगभग सभी क्षेत्रों के बाद अब निवेश बाज़ार भी बोल गया है. गुरुवार को बाज़ार इतनी जोर से बोला है कि मीडिया तक इसकी आवाज ज़रूर पहुंचनी चाहिए. आवास निर्माण, ऑटो, सूत, चाय जैसे उद्योगों के संगठन भारी बैचेनी में हैं. उनकी सुध लेने के लिए ज़्यादातर अख़बार और टीवी चैनल बिल्कुल तैयार नहीं. ख़बरों के गायब होने से वे बेचारे अपनी बात विज्ञापनों के ज़रिये कहने को मजबूर हो गए हैं...
  • पचास लाख नौकरियां गईं हैं टेक्सटाइल में?
    रवीश कुमार
    क्या पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम गिरफ्तार किए जा सकते हैं? दिल्ली हाई कोर्ट के जज सुनील गौड़ ने INX Media केस में अग्रिम ज़मानत देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों ने जो सामग्री प्रस्तुत की है, उसकी भयावहता और विशालता को देखते हुए अग्रिम ज़मानत नहीं दी जा सकती है. चिदंबरम को हाई कोर्ट से पिछले साल राहत मिली थी, तब कोर्ट ने कुछ सवालों के जवाब एजेंसियों से मांगे थे. जिस तरह से प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई दिल्ली के जंगपुरा में उनके घर पर दबिश दिए बैठी है उससे गिरफ्तारी की आशंका बेमानी नहीं लगती है.
  • ठहरे हुए पानी में पत्थर मारकर हुड्डा कर रहे इंतजार
    उमाशंकर सिंह
    हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा को इंतजार है 10 जनपथ से किसी फैसले का. उन्होंने रोहतक की कल की अपनी रैली में धारा 370 के मुद्दे पर अपनी ही पार्टी कांग्रेस के खिलाफ जमकर हमला बोला. माना यह जा रहा है कि हुड्डा अपनी अलग पार्टी बनाने के लिए नींव रख चुके हैं, लेकिन जाते-जाते कांग्रेस से एक सौदा कर लेना चाहते हैं. यही वजह है कि कल के अपने वक्तव्य के बाद हुड्डा अभी प्रेस से बात करने से बच रहे हैं.
  • भारत की अर्थव्यवस्था में मंदी जैसे हालात क्यों?
    रवीश कुमार
    न्यूज़ चैनल देखने से लगता है कि सारा देश कश्मीर, आबादी और आरक्षण को लेकर व्यस्त है. हो सकता है कि सारा देश व्यस्त हो भी, लेकिन डेढ़ लाख बैंकर इन विषयों को लेकर व्यस्त नहीं हैं. बल्कि इस शनिवार और रविवार तो उन्हें टीवी देखने का भी मौका नहीं मिला होगा कि कश्मीर पर नया बयान क्या आया है. उन्हें यह भी पता नहीं होगा कि चर्चा में दूसरे एंगल से प्रवेश पाने के लिए शिवराज सिंह चौहान और साध्वी प्रज्ञा ने जवाहर लाल नेहरू को अपराधी कहा है. नेहरू को कुछ भी बोलकर आप चैनलों के स्क्रीन पर टिकर से लेकर टिक टैक तक जगह पा सकते हैं. चूंकि नेता लोग नेहरू को अपराधी बताने में व्यस्त हैं, इसलिए डेढ़ लाख बैंकरों से कहा गया होगा कि कम से कम आप लोग अर्थव्यवस्था को लेकर कुछ व्यस्त रहें और आइडिया दें कि भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन का कैसे बनाया जा सकता है.
  • चीन डायरी: उरुमुची के इंटरनेशनल इस्लामिक इंस्टिट्यूट में छात्रों को मिलती है इमाम की ट्रेनिंग
    कादम्बिनी शर्मा
    चीन सरकार के बुलावे पर मैं इस समय उरुमुची में हूं. आज उरुमुची के इंटरनेशनल इस्लामिक इंस्टिट्यूट जाने का मौक़ा मिला. वहां, पर छात्रों को इमाम के काम के लिए ट्रेनिंग दी जाती है. छात्रों को मासिक भत्ता भी मिलता है. क़ुरान की पढाई में भी छात्र यहां महारत हासिल करते हैं.
  • आर्थिक रुप से फ़ेल सरकार अपनी राजनीतिक सफ़लताओं में मस्त है
    रवीश कुमार
    जब चीन ने टैक्सटाइल सेक्टर को छोड़ अधिक मूल्य वाले उत्पादों के सेगमेंट में जगह बनाने की नीति अपनाई तब इस ख़ाली जगह को भरने के लिए बांग्लादेश और वियतनाम तेज़ी से आए. अगर आप बिजनेस की ख़बरें पढ़ते होंगे तब ध्यान होगा कि कई साल पहले मोदी सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर के लिए 6000 करोड़ के पैकेज का एलान किया था. आज तक भारत का टेक्सटाइल सेक्टर उबर नहीं सका है. टेक्सटाइल रोज़गार देने वाले सेक्टरों में से एक रहा है. जून 2016 में मोदी कैबिनेट ने पैकेज की घोषणा करते वक्त कहा था कि अगले तीन साल में यानी 2019 तक टेक्सटाइल सेक्टर में 1 करोड़ रोज़गार पैदा किए जाएंगे और 75,000 करोड़ का निवेश होगा. तथ्य आप पता कर लें, आपको निराशा हाथ लगेगी.
  • ...तो ब्रांच मैनेजर दे रहे हैं भारत को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने का आइडिया!
    रवीश कुमार
    क्या आपको पता है कि बैंकों के अफसर इस महीने क्या कर रहे हैं? वे वित्त मंत्रालय के निर्देश पर चर्चा कर रहे हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 5 ट्रिलियन डॉलर का कैसे किया जा सकता है. जब बजट के आस-पास 5 ट्रिलियन डॉलर का सपना बेचा जाने लगा तो किसी को पता नहीं होगा कि सरकार को पता नहीं है कि कैसे होगा. इसलिए उसने बैंक के मैनजरों से कहा है कि वे शनिवार और रविवार को विचार करें और सरकार को आइडिया दें.
  • क्या नेहरू युवा केंद्र के 300 प्रोग्राम कोर्डिनेटर निकाले जा रहे हैं?
    रवीश कुमार
    कल कई कोर्डिनेटरों ने मुझे मैसेज पर मैसेज करना शुरू कर दिया. ज़ाहिर है किसी की नौकरी जाएगी तो परेशान होगा. जब चुनाव आया तो मिनिरत्न कंपनी बेसिल के ज़रिए 300 कार्यक्रम समन्वयक की नियुक्ति होती है. 1500 रुपये का फार्म ख़रीदा था इन युवाओं ने. ऑनलाइन परीक्षा दी और इंटरव्यू दिया. तब जाकर 3 साल के कांट्रेक्ट की नौकरी पर हुआ. इनकी सैलरी 31000 फिक्स हुई. अब इनकी आशंका है कि सरकार निकाल रही है क्योंकि चुनाव हो गया है. कांट्रेक्ट के तीन साल भी नहीं हुए हैं. उन्हीं के मैसेज के आधार पर लिख रहा हूं.
  • एक डॉक्टर और उसका कश्मीर, एक पत्रकार और उसका हिन्दी प्रदेश
    रवीश कुमार
    अचानक दरवाज़ा खुला और एक शख़्स सामने आकर खड़ा हो गया. कंधे पर आला लटका हुआ था. नाम बताने और फैन कहने के कुछ अधूरे वाक्यों के बीच वह फफक पड़ा. पल भर में संभाला, लेकिन तब तक आंखों से आंसू बाहर आ चुके थे.
  • अनुच्छेद 370 तो हट गया, अब मोदी सरकार का अगला कदम क्या होगा...?
    स्वाति चतुर्वेदी
    15 अगस्त को RSS प्रमुख मोहन भागवत ने दुर्लभ तरीके से बेहद उदार शब्दों में अनुच्छेद 370 को हटाकर कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के लिए प्रधानमंत्री की सार्वजनिक रूप से सराहना की. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चुनावी नारे का इस्तेमाल करते हुए RSS के सरसंघचालक ने कहा, "अनुच्छेद 370 इसलिए गया, क्योंकि मोदी है, तो मुमकिन है..."
  • भारत के विभाजन और स्वतंत्रता में महाशक्तियों की भूमिका
    अमित
    कम लोगों को पता होगा कि 18वीं, 19वीं सदी तक भारत दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में एक था. इस वजह से दुनिया के कारोबारियों और हुक्मरानों की नज़र भारत पर होती थी. यूरोप ही नहीं, रूस और अमेरिका तक भारतीय जगमगाहट का जलवा था. बेशक, भारत की गुलामी और आज़ादी के सारे अभिशाप और वरदान भारत की ही कोख से निकले थे, लेकिन दुनिया भर का पर्यावरण अपनी-अपनी तरह से इन प्रक्रियाओं को पोषण दे रहा था.
  • इंसाफ़ के पहलू, अमेरिका का लिंचिंग म्यूज़ियम
    रवीश कुमार
    भारत माता की जय करने वालों ने आरोपी का ख़्याल रखा, रखना भी चाहिए लेकिन जो मारा गया वो उनके जय के उद्घोष से बाहर कर दिया गया. आरोपी बरी हुए हैं, पहलू ख़ान को इंसाफ़ नहीं मिला है. हमारी पब्लिक ओपिनियन में इंसाफ़ की ये जगह है. जिसकी हत्या होगी उस पर चुप रहा जाएगा, आरोपी बरी होंगे तो भारत माता की जय कहा जाएगा. सब कुछ कितना बदल गया है. भारत माता की जय. भारत माता ने जयकारा सुनकर ज़रूर उस पुलिस की तरफ देखा होगा जो दो साल की तफ्तीश के बाद इंसाफ नहीं दिला सकी. पुलिस ने किस तरफ देखा होगा, ये बताने की ज़रूरत नहीं है.
  • कहीं ले न डूबे अर्थव्यवस्था का 'फीलगुड'
    सुधीर जैन
    लेकिन एक वक़्त आता है कि लोग खुद भी बहुत कुछ महसूस करते हैं. लोग जब काम पर जाने के लिए घर से निकलते हैं, तो रास्ते में उनकी नज़र भी देश के माहौल पर पड़ती है. आजकल इक्का-दुक्का बचे ऐसे अख़बारों को भी लोग देख लेते हैं, जो देश के वास्तविक हालात बताने से बाज़ नहीं आते. कुछेक TV चैनल भी माहौलबाजों के झांसे से बचाते रहते हैं. यानी ऐसा नहीं है कि हकीकत देर तक छिपी रह सके - चाहे खुद की हो, चाहे देश की, देरसबेर माली हालत खुद भी बोलने लगती है.
  • जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य की बहाली और कानूनी चुनौतियां
    विराग गुप्ता
    संविधान में अनुच्छेद 370 का प्रावधान भी अल्पकालिक था, जिसे ख़त्म करने में 70 वर्ष लग गए, तो अब UT से पूर्ण राज्य का दर्ज़ा कब और कैसे मिलेगा...? राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार शांति बहाली के बाद पूर्ण राज्य के दर्जे की वापसी हो सकती है, परंतु मणिशंकर अय्यर और वाइको जैसे नेता कश्मीर घाटी में फिलस्तीन जैसी अराजक स्थिति और अलगाव का अंदेशा जताने से बाज़ नहीं आ रहे. नए केंद्रशासित प्रदेशों का जन्म 31 अक्टूबर (सरदार पटेल की जयंती) को होगा, लेकिन उससे पहले नए कानून पर सरकार को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती का सामना करना पड़ेगा.
  • क्या इंटरनेट के बिना विरोध प्रदर्शन मुमकिन नहीं?
    रवीश कुमार
    दुनिया भर में सरकारी पाबंदियों का दायरा बदलता भी जा रहा है और उनका घेरा कसता भी जा रहा है. धरना-प्रदर्शन या आंदोलन करना मुश्किल होता जा रहा है. आवाज़ दबाना आसान हो गया है. भले ही असहमति के स्वर की संख्या लाखों में हो मगर अब यह संभव है और हो भी रहा है कि पहले की तुलना में इन्हें आसानी से दबा दिया जाता है, खासकर तब जब कहा जाता है कि सूचना के बहुत सारे माध्यम हो गए हैं.
12345»

Advertisement