NDTV Khabar
होम | ब्लॉग

ब्लॉग

विचार
  • भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी समेत तीन को नोबेल पुरस्कार
    रवीश कुमार
    आज का दिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बुरी ख़बर लेकर आया है, मगर भारतीय मूल के अर्थशास्त्री के लिए बहुत ही अच्छी ख़बर लाया है. विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी का अनुमान डेढ़ प्रतिशत घटा दिया है. 7.5 प्रतिशत से घटा कर 6 प्रतिशत कर दिया है. डेढ़ प्रतिशत की कमी बहुत होती है. दूसरी तरफ जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में एमए करने वाले अभिजीत विनायक बनर्जी को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला है.
  • आसमां का रंग गुलाबी ही होता है. The Sky is Pink होता है...
    रवीश कुमार
    गुलाबी ही तो होता है आसमान. बल्कि सिर्फ गुलाबी नहीं होता. वैसे ही जैसे सिर्फ नीला नहीं होता. पीला भी होता है. सफेद भी और गहरा लाल भी. सुनहरा भी. आसमान को सिर्फ नीले रंग से नहीं समझा जा सकता है. जब तक आप इस धारणा से बाहर नहीं निकलते हैं, इस फिल्म को देखते हुए भी आप नहीं देख पाते हैं. थियेटर में होते हुए भी आप बाहर होते हैं. जहां अरबों बच्चों की तरह आपको भी आसमान को सिर्फ एक ही रंग से देखना सीखाया गया है. जैसा रंग आज अपने आस-पास देखते हैं. कोई फ़िल्म सियासत पर बात न करते हुए, सियासत को समझने का ऐसे ही ताकत देती है. वही फ़िल्म है ये. जिन्होंने ये फ़िल्म देखी है, वो बहुत दिनों तक इससे बाहर नहीं निकल पाएंगे.
  • जो काम निर्मला सीतारमण अधूरा छोड़ गई थीं उसे केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पूरा किया
    रवीश कुमार
    मैं देशभक्त हूं. सच्चा भी और अच्छा भी. दोनों का कांबो(युग्म) कम ही देशभक्त में मिलता है जो कि मुझमें मिलता हुआ दिखाई दे रहा है. इसलिए रविशंकर प्रसाद के हर बयान के साथ हूं. एक राष्ट्रवादी सरकार के मंत्री की योग्यता की सीमा नहीं होती. वह एक ही समय में अर्थशास्त्री भी होता है. कानूनविद भी होता है. शिक्षाविद भी होता है. राष्ट्रवाद की राजनीति आपको असीमित क्षमताओं से लैस कर देती है. यह बात रविशंकर प्रसाद का मज़ाक उड़ाने वाले कभी नहीं समझ पाएंगे.
  • अर्थव्यवस्था का ढलान जारी है फिर भी आयोजनों की भव्यता तूफानी है
    रवीश कुमार
    आपको पता होगा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत के दौरे पर हैं. चीन का भारत आना हमेशा ही महत्वपूर्ण घटना है. इस दौरे के लिए कहा गया है कि अनौपचारिक है.कोई एजेंडा नहीं है. दोनों नेता बयान नहीं देंगे. लेकिन इसका मतलब नहीं कि दौरा महत्वपूर्ण नहीं है.अनौपचारिक बातचीत में कई उलझे हुए मसलों पर खुलकर बातचीत होती है. दोनों नेता एक दूसरे का मन टोहते हैं.
  • चीन के राष्ट्रपति का भारत दौरा, क्‍या दोनों देशों के रिश्‍ते बेहतर होंगे?
    रवीश कुमार
    चेन्नई एयरपोर्ट पर ऐसे जहाज़ों को उतारने की क्षमता थी इसलिए यह जगह उसके हिस्से आया. चेन्नई से 56 किमी दूर बंगाल की खाड़ी के तट पर महाबलीपुरम है जिसे मामल्लापुरम कहा जाता था. यह नाम पल्लव राजा नरसिम्हावर्मन प्रथम के नाम पर पड़ा जिन्हें महान योद्धा कहा जाता था. पल्लव राजा के काल में एक ही चट्टान को काट कर कलाकृति बनाने का कौशल समृद्ध हुआ जिसे द्रविड़ स्थापत्य कला के रूप में जाना जाता है.
  • नई पीढ़ी के साथ बदल रही है शिवसेना
    सुनील कुमार सिंह
    शिवसेना की स्थापना 19 जून 1966 को महाराष्ट्र की अस्मिता और मराठी भाषियों के अधिकार और न्याय दिलाने के लिए हुई थी. साठ के दशक में मुम्बई में गुजराती और दक्षिण भाषियों का वर्चस्व बढ़ रहा था. शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने मराठी मन की उस व्यथा को देखा उसे समझा और अपने ओजस्वी भाषणों से मराठी मन को आकर्षित कर न सिर्फ एक मजबूत संगठन खड़ा किया बल्कि मराठियों की खोई अस्मिता को फिर से स्थापित किया. आज बाल ठाकरे भले जीवित नही हैं लेकिन शिवसैनिक आज भी उनके लिए सब कुछ समर्पित करने को तैयार रहते हैं. पर अब शिवसेना बदल रही है खासकर ठाकरे परिवार की तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले आदित्य ठाकरे की सोच अलग है.
  • दलित अल्पसंख्यक से अन्याय की बात करना गलत कैसे?
    रवीश कुमार
    क्या महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के छह छात्रों को इसलिए निलंबित कर दिया गया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था. इस पत्र में दलित और अल्पसंख्यकों के साथ हो रही मॉब लिचिंग और बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई गई है. कश्मीर का भी ज़िक्र है और असम में नेशनल रजिस्टर आफ सिटिजन्स का भी मसला है.
  • जल जमाव के बाद बिहार की राजनीति में सुशील मोदी को लेकर इतने सवाल क्यों?
    मनीष कुमार
    पटना शहर से जल जमाव की समस्या फ़िलहाल ख़त्म हो गई है. इस जल जमाव के यूं तो कई कारण रहे लेकिन वो चाहे भाजपा समर्थक हों या विरोधी, सब मानते हैं कि अगर एक व्यक्ति जिसकी लापरवाही का सबने ख़ामियाज़ा उठाया वो हैं सुशील मोदी. और राजधानी पटना की इस नरकीय स्थिति ने सबसे ज़्यादा नुक़सान किसी की व्यक्तिगत और राजनीतिक छवि को पहुंचाया है तो वो हैं बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी. सुशील मोदी ने पटना की हर समस्या में आम लोगों के साथ खड़े होकर अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक छवि चमकाई और साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी को लगातार पिछली पांच विधानसभा चुनावों से हर सीट पर जीत दिलाई. उसी सुशील मोदी ने इस बार के पानी में, उनके समर्थकों के अनुसार सब कुछ खोया है.
  • 2015 से 2017 के बीच भारत के पासपोर्ट की रैकिंग तेजी से गिरी, तो ताकत कैसे बढ़ी?
    रवीश कुमार
    Henley & Partners की ग्लोबल पासपोर्ट इडेक्स की ताज़ा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है. इसके आंकने का आधार है कि एक देश का पासपोर्ट लेकर आपको कितने देशों में बिना पहले से विज़ा लिए वहां पहुंचने की अनुमति मिलती है. पहुंचने के बाद वीज़ा मिल जाता है.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग : राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों का विरोध सभी बैंकरों के लिए सबक है
    रवीश कुमार
    राजस्थान के दस शहरों में 4 अक्तूबर से ‘क्रॉस सेलिंग’ के ख़िलाफ़ राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक के कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं. ‘क्रॉस सेलिंग’ के खेल को समझना ज़रूरी है. बीमा कंपनी जब अपना उत्पाद बेचेगी तो उसके लिए कर्मचारी रखेगी, एजेंट रखेगी, रोज़गार भी बढ़ेगा. म
  • दुनिया की 90 फीसदी अर्थव्यवस्थाएं ढलान पर
    रवीश कुमार
    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जियॉरजीवा ने कहा है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर में है. वो बढ़ तो रही है, लेकिन बढ़ने की रफ्तार बेहद धीमी है. बल्कि दो साल पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था ऊपर की तरफ जा रही थी, लेकिन अब धीमी होने लगी है.
  • 'BSNL और MTNL बंद होगा', इन्हें बचाने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं, कश्मीर पर फैसले के बाद इस पर जोखिम लेना आसान
    रवीश कुमार
    दोनों कंपनियों को 4 G नहीं देकर किस कंपनी को लाभ दिया गया इस पर बात करने से कोई फ़ायदा नहीं. उन्हें हर बात पर ही लाभ दिया जाता है और लोग इसे सहजता से लेते हैं. अनदेखा करते हैं. अब आप प्राब्लम में आए हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि चुप रहने वाले लोग बोल उठेंगे. इन पौने दो लाख लोगों के जीवन में विपदा आने वाली है. ये लोग परेशान होंगे. नौकरी किसी की भी जाय होश उड़ जाते हैं.
  • घोर आर्थिक असफलता के बाद भी मोदी सरकार की राजनीतिक सफलता शानदार
    रवीश कुमार
    भारतीय खाद्य निगम के चरमराने की ख़बरें आने लगी हैं. इसी के ज़रिए भारत सरकार किसानों से अनाज ख़रीदती है. सरकार उसके बदले में निगम को पैसे देती है जिसे हम सब्सिडी बिल के रूप में जानते हैं. 2016 तक तो भारतीय खाद्य निगम को सब्सिडी सरप्लस में मिलती थी. जितना चाहिए होता था उससे अधिक. लेकिन 2016-17 में जब उसे चाहिए था एक लाख 10 हज़ार करोड़ तो मिला 78000 करोड़. बाकी का 32,000 करोड़ नेशनल स्मॉल सेविंग्स फंड (NSSF) से कर्ज़ लिया. जिस तरह से भारत सरकार रिज़र्व बैंक की बचत से पैसे लेने लगी है उसी तरह से निगम यह काम पहले से कर रहा था. जैसे-जैसे ज़रुरत पड़ी NSSF कर्ज़ लेने लगा. नतीजा 2016-17 का वित्त वर्ष समाप्त होते ही NSSF से लिया गया कर्ज़ा 70,000 करोड़ का हो गया.
  • यूपी और एमपी के सिपाहियों में अनैतिकता के जाल से निकलने की छटपटाहट
    रवीश कुमार
    उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के सिपाही मुझे पत्र लिख रहे हैं. उन पत्रों को पढ़ने से पहले ही सिपाही बंधुओं की ज़िंदगी का अंदाज़ा है. अच्छी बात यह है कि उनके भीतर अपनी ज़िंदगी की हालत को लेकर चेतना जागृत हो रही है. यह सही है कि हमारी पुलिस व्यवस्था अमानवीय है और अपने कुकृत्यों के जरिए लोगों के जीवन में भयावह पीड़ा पैदा करती है. लेकिन यह भी सही है कि इसी पुलिस व्यवस्था में पुलिस के लोग भी अमानवीय जीवन झेल रहे हैं. उनकी अनैतिकता सिर्फ आम लोगों को पीड़ित नहीं कर रही है बल्कि वे खुद अपनी अनैतिकता के शिकार हैं. झूठ, भ्रष्टाचार और लालच ने उनकी ज़िंदगी में कोई सुख-शांति नहीं दी है.
  • लद्दाख डायरी : नए सांसदों को ऐसे मिलता है संसद में अपना सिक्का जमाने का मौका
    मनोरंजन भारती
    लोकसभा में अनुच्छेद 370 पर हो रही बहस के दौरान एक नए युवा सांसद को बोलने का मौका मिला. वह सांसद थे लद्दाख के 34 वर्षीय जामयांग सेरिंग नामग्याल. नामग्याल ने संसद में जोरदार भाषण दिया था और जब इस बार मैं लेह गया तो उनसे मिलने का मौका मिला. मैंने उनसे पूछा कि आखिर आप जैसे युवा सांसद को आर्टिकल 370 जैसे विषय पर बोलने का मौका कैसे मिला? नामग्याल का कहना था कि 'यह सच है कि संसद में युवाओं को बोलने का मौका कम मिलता है. इसके कई कारण हैं. युवाओं को अपने में आत्मविश्वास लाना होगा. उन्हें विषय को पढ़ना होगा. साथ ही उन्हें संसदीय नियमों की जानकारी लेनी होगी. मेरे साथ भी यही हुआ.'
  • एक दलित को विभागाध्यक्ष बनने से क्यों रोक रहा है दिल्ली विश्वविद्यालय?
    प्रियदर्शन
    श्यौराज सिंह बेचैन की आत्मकथा का नाम है- 'मेरा बचपन मेरे कंधों पर.' यह आत्मकथा बताती है कि एक दलित बचपन कैसा होता है. बचपन बीत गया, लेकिन अपनी दलित पहचान का सलीब अब भी अपने कंधों पर लेकर घूमने को मजबूर हैं श्यौराज सिंह बेचैन. वे दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में पढ़ाते हैं. वरिष्ठता क्रम में बीते महीने की तेरह तारीख़ को उनको विभागाध्यक्ष बनाया जाना था. बताया जाता है कि बारह तारीख़ को विश्वविद्यालय ने उनसे दस्तावेज़ लिए, उनके नाम पर लगभग मुहर लगा दी.
  • रात भर पेड़ों की हत्या होती रही, रात भर जागने वाली मुंबई सोती रही
    रवीश कुमार
    यह न्याय के बुनियादी सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है. मामला सुप्रीम कोर्ट में था तो कैसे पेड़ काटे गए. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामला था तो पेड़ कैसे काटे गए. क्या अब से फांसी की सज़ा हाईकोर्ट के बाद ही दे दी जाएगी. सुप्रीम कोर्ट में अपील का कोई मतलब नहीं रहेगा? वहां चल रही सुनवाई का इंतज़ार नहीं होगा? आरे के पेड़ों को इस देश की सर्वोच्च अदालत का भी न्याय नहीं मिला. उसके पहले ही वे काट दिए गए. मार दिए गए.
  • क्‍या है लेह का गोवा कनेक्‍शन
    मनोरंजन भारती
    दरअसल लेह के जिस होटल में रुका था वहां के मेस में काम करने वाले कर्मचारियों से बातचीत होने लगी. बातचीत में मालूम चला कि जो शख़्स वहां काम कर रहे हैं वो सारे बिहार-यूपी के लोग हैं.
  • लद्दाख डायरी : क्‍या कहते हैं लेह के लोग अनुच्‍छेद 370 पर...
    मनोरंजन भारती
    जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटने के बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग प्रतिक्रिया हुई. एक तरफ़ कश्मीर घाटी में प्रतिबंध रहा वहीं जम्मू के लोग ख़ुश बताए जा रहे थे तो लेह-लद्दाख के इलाक़े में ख़ुशी के साथ लोगों के दिलों में आशंकाएं भी हैं.
  • पटना की ऐसी दुर्दशा करने का आखिर कौन है जिम्मेदार? क्या यही हैं वो 6 'खलनायक'
    मनीष कुमार
    पटना शहर में बहुत कुछ विचित्र हो रहा है. शहर में एक हफ़्ते में केंद्र, राज्य और अन्य एजेंन्सी मिलकर भी बारिश के जमा पानी निकाल नहीं पाये हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि न पटना नगर निगम और न पानी निकालने का ज़िम्मा जिस  एजेंसी को दिया गया है उसके पास शहर के नालों का कोई नक़्शा है.  हद तो तब हो गई शहर के रख रखाव और बाहर से पानी की निकासी कैसे हो जिसका ज़िम्मा जिन लोगों के ऊपर था वे ही अब आक्रमक तरीके से दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो राग छेड़ दिया है. मतलब आप ठीक समझे जो BJP के नेता हैं ख़ासकर बिहार BJP के नवनियुक्त अध्यक्ष संजय जयसवाल पटना कि मेयर सीता साहू ये अब मांग कर रहे हैं कि दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो जबकि उन्हें मालूम है कि अधिकांश दोषी कोई और नहीं इनके अपने मंत्री विधायक और मेयर हैं जिन्होंने अपना काम और दायित्व ठीक से नहीं निभाया. 
12345»

Advertisement