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  • वर्ल्‍ड कप 2019 में बारिश और बेल्‍स की ही चर्चा..
    मनोरंजन भारती
    इंग्‍लैंड में हो रहे मौजूदा वर्ल्ड कप को लेकर दो बातें काफी चर्चा में हैं एक है इंग्‍लैंड की बारिश और दूसरा है वर्ल्ड कप में प्रयोग में की जा रही गिल्लियां (Bails)जो गिरती नहीं है...बारिश का साया इस बार के वर्ल्ड कप पर बुरी तरह पड़ा है. इस बारिश की वजह से श्रीलंका के दो मैच और वेस्ट इंडीज,बांग्लादेश, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के एक-एक मैच रद्द हो चुके हैं.
  • सोशल मीडिया पोस्ट पर गिरफ्तारियां - सुप्रीम कोर्ट सख्त क्यों नहीं
    विराग गुप्ता
    गिरफ्तार लोगों में से अधिकांश को निचली अदालतें जेल भेज देती हैं, क्योंकि सभी लोग तो सुप्रीम कोर्ट नहीं आ सकते. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CJM कोर्ट ने 20,000 रुपये की दो ज़मानतों और बंधपत्र दाखिल करने पर पत्रकार प्रशांत कनौजिया को रिहा कर दिया. प्रियंका शर्मा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आपत्तिजनक मीम बनाया, जिन्हें माफी की शर्त पर सुप्रीम कोर्ट ने रिहाई दी. दोनों ही मामलों में पुलिस की गलत FIR और बेजा गिरफ्तारी के बावजूद, निचली अदालतों ने रिमांड आदेश पारित कर दिया था. पुलिस और निचली अदालतों के इस गैर-ज़िम्मेदार सिस्टम पर, सुप्रीम कोर्ट द्वारा सख्ती नहीं बरतने से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं.
  • दिल्ली में 50 डिग्री का अलार्म
    सुधीर जैन
    10 जून को दिल्ली गर्मी से झुलसने लगी. पारा ज्ञात इतिहास के सारे रिकॉर्ड तोड़कर 48 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया. मामला मौसम का है. इस पर किसी का बस नहीं है सो करने के लिए ज्यादा बात बनती नहीं है. एक दो हफ्ते में नहीं तो दो तीन हफ्ते बाद पानी गिरेगा ही. भूल जाएंगे कि इस साल गर्मियों में क्या हुआ था. लेकिन रिकॉर्ड तोड़ तापमान की घटना आगे के लिए दिल्ली को कोई चेतावनी तो नहीं है?
  • अगर गिरीश कर्नाड अर्बन नक्सल थे, तो अर्बन नक्सल को श्रद्धांजलि कैसी, चैनल बताएंगे या प्रोपेगैंडा मास्टर
    रवीश कुमार
    क्या उन चैनलों पर भी गिरीश कर्नाड को श्रद्धांजलि दी जा रही होगी जिनके अर्बन नक्सल के प्रोपेगैंडा के विरोध में गिरीश कर्नाड बीमारी के बाद भी अर्बन नक्सल की तख़्ती लेकर खड़े हो गए थे? जिन लोगों को अर्बन नक्सल बताकर जेल भेजा गया था, वो आज भी जेल में हैं. सुधा भारद्वाज अब भी जेल में हैं. गौरी लंकेश की हत्या की जांच एक मुकाम पर पहुंची तो है मगर अंजाम से अब भी दूर है. कब सियासी सौदा हो जाए और जांच की फाइलें बदल जाए कुछ भी नहीं कहा जा सकता है.
  • क्या भारत की जीडीपी 4.5 प्रतिशत रही है, भारत ने ढाई प्रतिशत बढ़ा-चढ़ा कर बताया है?
    रवीश कुमार
    भारत सरकार के पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने जीडीपी के हिसाब-किताब के नए पैमाने पर सवाल उठा दिया है. उनका कहना है कि 2011-12 से 2016-17 के बीच भारत की जीडीपी को काफी बढ़ा चढ़ा कर दिखाया गया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस दौरान जीडीपी की दर 7 प्रतिशत के आस-पास रही है लेकिन अरविंद सुब्रमण्यन का कहना है कि वास्तविक जीडीपी हर साल 4.5 प्रतिशत के आस-पास रही है.
  • गिरीश कर्नाड प्रतिरोध का व्याकरण थे, जो हम भूलते जा रहे हैं...
    प्रियदर्शन
    गिरीश कर्नाड की कुछ अंतिम मार्मिक छवियां उन प्रतिरोध सभाओं से बनती हैं, जहां वह कभी 'मैं भी अर्बन नक्सल' और कभी 'नॉट इन माई नेम' की तख़्ती लगाकर पहुंचे दिखाई पड़ते थे. 80 साल की उम्र में अपनी लगातार बड़ी होती शारीरिक व्याधियों के बीच वह अगर इन सभाओं में लंबी दूरी तय कर पहुंचते थे, तो इसलिए नहीं कि उनमें किसी तात्कालिक राजनीतिक प्रतिरोध का शौक या जुनून था, बल्कि इसलिए कि वह जिस बहुलता, विविधता और स्वतंत्रता को भारतीय चेतना का मूल्य मानते रहे, उस पर बढ़ रहे खतरे का उन्हें गंभीरता से एहसास था.
  • काम के लंबे घंटे और वर्किंग हॉलिडे, अलग है अमित शाह का गृह मंत्रालय
    नीता शर्मा
    दिल्ली में नॉर्थ ब्लॉक में स्थित गृह मंत्रालय में काम के घंटे बढ़ गए हैं. ऐसा इसलिए नहीं हुआ कि गर्मी के दिन काफी लंबे होते हैं, बल्कि इसकी वजह गृह मंत्री की बहुत ज्यादा काम करने की प्रवृति है. अमित शाह सोमवार, मंगलवार और बुधवार को सुबह 10 बजे से पहले ही अपने कार्यालय पहुंच गए. गुरुवार को भी वे सुबह 9.40 बजे पहुंचे और देर तक रुके. मैं बीते एक दशक से गृह मंत्रालय को कवर कर रही हूं और चार गृह मंत्रियों को देखा है. अमित शाह ऐसे पहले गृह मंत्री हैं जो अपना पूरा दिन ऑफिस में बिताने हैं और रात 8 बजे के बाद निकलते हैं.
  • कांग्रेस की कलह रोकने के लिए जल्द बनाना होगा नया अध्यक्ष
    मनोरंजन भारती
    कांग्रेस से यह खबर आ रही है कि राहुल गांधी से अलग पार्टी किसी और को अध्यक्ष बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है और नए पार्टी अध्यक्ष की खोज भी शुरू हो गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की माने तो पार्टी का नया अध्यक्ष गैर गांधी होगा यानी नए अध्यक्ष का गांधी परिवार से कोई लेना देना नहीं होगा. साथ ही अगले दो से तीन महीनों में इसकी घोषणा की जाएगी.
  • मोदी और शाह- दो बाघ, एक पहाड़, राजनाथ कहां छूटे?
    "एक पहाड़ पर दो बाघ नहीं हो सकते." क्या यह चीनी कहावत नरेन्द्र मोदी की हाल ही में शुरू हुई दूसरी पारी की खासियत बनने जा रही है? या फिर मोदी और अमित शाह इसे गलत साबित करेंगे?
  • छह महीने में मिलेंगे कॉलेजों को दो लाख नए शिक्षक, उनकी योग्यता को लेकर रहिए सतर्क
    रवीश कुमार
    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देश के सभी वाइस चांसलरों से कहा है कि वह छह महीने के भीतर ख़ाली पदों को भर दें. अगर ऐसा हुआ तो छह महीने के भीतर दो लाख से अधिक लोगों को यूनिवर्सिटी में नौकरी मिलेगी.
  • राहुल गांधी के मिजाज से मुश्‍क‍िल में कांग्रेस
    अगर राहुल पद छोड़ने के प्रति गंभीर हैं तो उन्हें अब एक काम करने की जरूरत है कि वह रास्ता साफ करें और एक नेता को आगे लाएं जो कमियों को दूर करके जल्दी से आगे बढ़ सकता है.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग : जेम्स बॉन्ड को मालूम है, बंगाल में 370 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड का ख़रीदार कौन है
    रवीश कुमार
    क्या ऐसा हो सकता है कि कई सारी अज्ञात शक्तियां, देसी और विदेशी, एक पार्टी के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदती हैं. वह पार्टी उस बॉन्ड के पैसे से कुछ प्रभावशाली लोगों को ख़रीद लेती है और वो लोग उन वोटरों को जो दो से तीन हज़ार के नोट के लिए वोट बेचने के लिए तैयार बैठे हैं. 
  • अकेला हाथी किसका साथी...
    मनोरंजन भारती
    मायावती ने एकला चलो रे का एलान कर दिया है मतलब उत्तर प्रदेश में जो 11 उपचुनाव होन वाले हैं उसमें बीएसपी अपने उम्मीदवार खड़े करेगी मगर जो तर्क मायावती ने दिए उसकी जांच पड़ताल करनी जरूरी है. मायावती ने कहा कि उनके एकला चलो रे के पीछे वजह है कि समाजवादी पार्टी के वोट बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवारों को नहीं मिले.
  • केवल पीएम मोदी और सोनिया गांधी ने 'आधार' पर पूछा यह सवाल : नंदन निलेकणि
    सोनिया सिंह
    एस जयशंकर को सीधे केंद्रीय मंत्री का पद मिला है, ये अपने आप में पहला मौका है लेकिन 10 साल पहले इस तरह कैबिनेट में जगह पाने वाले शख्स नंदन नीलेकणि हो सकते थे. उन्हें राहुल गांधी ने मानव संसाधन विकास मंत्री का पद देने के लिए बुलाया था. हालांकि बिल्कुल आखिरी समय में सोनिया गांधी और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पुनर्विचार के बाद इस प्रस्ताव को वापस ले लिया गया जबकि नीलेकणि दिल्ली के लिए उड़ान भरने को बिल्कुल तैयार थे. नीचे दिया गया पुस्तक का अंश पढ़ें...
  • प्रशासन में सुधार की मांग जरूरी
    डॉ विजय अग्रवाल
    पिछले-करीब दो महिनों के चुनावी कोलाहल में जहां देश-दुनिया की बड़ी-बड़ी खबरें तक महज फुसफुसाहट बनकर रह गई हों, वहां प्रशासन की खबरों की उपेक्षा की शिकायत करनी थोड़ी नाइंसाफी ही होगी. फिर भी यहां उसकी यदि बात की जा रही है, तो केवल इसलिए, क्योंकि इन बातों का संबंध काफी कुछ जनता की जरूरी मांगों से है.
  • विदेश मंत्री के लिए सोशल मीडिया ज़रूरी
    कादम्बिनी शर्मा
    विदेश सचिव एस जयशंकर ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की शुरू की हुई परंपरा को बरक़रार रखा है. सुषमा स्वराज विदेशों में मुश्किलों में फंसे भारतीयों की मदद ट्विटर के ज़रिए करती रहीं और इस वजह से काफी लोकप्रिय भी हुईं.
  • रवीश का ब्लॉग: 600 अरब का 2019 चुनाव और बैंकों में फ्रॉड के 71,500 मामले के बीच सेंसेक्स उछला 40,000 पार
    रवीश कुमार
    सीएमएस ने अपने फील्ड अध्ययन से बताया है कि राजनीतिक दलों ने प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में 100 करोड़ ख़र्च किए हैं. प्रति वोटर 700 रुपए. हम पत्रकार और जनता के लोग भी सुनते रहते हैं कि इलाके में पैसा बंटा है. इस बार यह भी सुनने को मिला कि गांव के मौजूदा और हारे हुए प्रधानों को भी पैसा मिला है. ज़िला पंचायत के सदस्यों को भी पैसे मिलने की बात सुनते रहते हैं. इनकी पुष्टि तो संभव नहीं है लेकिन उम्मीदवार निजी बातचीत में बताते हुए पाए जाते हैं कि फलां ने 10 करोड़ बांट दिया तो फलां ने 20 करोड़. अब यह जनता ही बता सकती है कि उसने कितना लेकर वोट किया. राजनीति की यह जानी हुई बात का खंडन कोई नहीं करता. साबित भी कोई नहीं कर पाता.
  • ब्लॉग :  'हिस्सेदारी' नीतीश कुमार का पीछा क्यों नहीं छोड़ती!
    मनीष कुमार
    राजनीति में चीज़ें जितनी बदलती है उतनी ही अपने मूल स्वरूप में भी रह जाती हैं. ये सच बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार से बेहतर कोई नहीं जानता जो पिछले 5 दिनों से केंद्र के सरकार में हिस्सेदारी को लेकर सुर्ख़ियों में हैं. हालांकि वह हर दिन एक बात की दुहाई देते हैं की NDA में है और अगर केंद्र के सरकार में हिस्सेदारी को लेकर उनकी बात नहीं बनी तो इसका मतलब बिहार में BJP के साथ सरकार पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा और साथ ही वह केन्द्र और बिहार में एनडीए में ही रहेंगे. लेकिन वर्तमान विवाद और संकट का क्या समाधान होगा उसके लिए नीतीश कुमार की राजनीति को 25 साल पहले से देखना होगा. उस समय क्या हुआ था यह बिहार बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं जैसे सुशील मोदी और नंद किशोर यादव को अच्छी तरह से याद होगा. सत्ता में हिस्सेदारी का ही मामला था कि जब नीतीश कुमार ने लालू यादव से अलग होकर लोक समता पार्टी बनायी थी.
  • ऑटोमोबिल और टेक्सटाइल में रोज़गार पैदा क्यों नहीं कर पा रहा है भारत?
    रवीश कुमार
    सात साल में पहली बार मारुति की बिक्री 22 प्रतिशत कम हो गई है. लगातार तीसरे महीने यह गिरावट हुई है. मारुति सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है. मारुति के अलावा शीर्ष की कई कार कंपनियों की हालत ख़राब है. ऑटोमोबिल सेक्टर अभी भी रोज़गार का सेक्टर माना जाता है. ज़ाहिर है नौकरियों पर असर पड़ रहा होगा. नौकरियां जा रही होंगी.
  • रवीश कुमार का ब्लॉग :  बेरोज़गारी की दर ने 45 साल का रिकार्ड तोड़ा मगर बिखर गया बेरोज़गारी का मुद्दा
    रवीश कुमार
    45 साल में बेरोज़गारी सबसे अधिक है. 31 मई को आई आवधिक श्रमबल सर्वेक्षण रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हो गई है. 2017 जुलाई से लेकर 2018 जून तक की अवधि में बेरोज़गारी हर स्तर पर बढ़ी हुई देखी गई. चुनाव के कारण सरकार ने इसे जारी नहीं किया था. तरह-तरह के विवादों से इसे संदिग्ध बना दिया. कभी कहा गया कि यह झूठ है और कभी कहा गया कि इसका पैमाना सही नहीं है. ख़ैर यह रिपोर्ट आ जाती तब भी कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता लेकिन जनता तक यह आंकड़ा न पहुंचे इसके लिए रिपोर्ट को जारी न होने दिया गया. इसके विरोध में राष्ट्रीय सांख्यिकीय आयोग के दो सदस्यों ने इस्तीफा भी दे दिया. तब भी सरकार टस से मस नहीं हुई. सरकार बनने के बाद इस रिपोर्ट को जारी कर दिया गया. बेरोज़गारी की दर 45 साल में सबसे अधिक है.
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