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ग़रीबों को न्यूनतम आय कैसे सुनिश्चित होगी?

ICICI Bank और वीडियोकान मामले में जो फ्रॉड हुआ था उसकी जांच का काम रिटायर जस्टिस बी एन श्रीकृष्णा को दिया गया था. जिनकी रिपोर्ट मिलते ही बैंक के बोर्ड ने जो फैसला किया है लगता है उसकी आलोचना करने के लिए वित्त मंत्री को एक और ब्लॉग लिखना पड़ेगा.

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ग़रीबों को न्यूनतम आय कैसे सुनिश्चित होगी?

ICICI Bank फ्रॉड मामले में अरुण जेटली के ब्लॉग लेखन को भारी झटका लगा है. अमरीका से वित्त मंत्री जेटली ने ICICI Bank और वीडियोकान बैंक फ्रॉड मामले में नामज़द आरोपियों के पक्ष में ब्लॉग लिखा था. अपने ब्लॉग में सीबीआई की आलोचना की थी कि बैंक जगत के बड़े लोगों का नाम लेने से उनकी प्रतिष्ठा धूमिल हो जाती है. ये और बात है कि उसने ब्लाग आने के पहले एफआईआर कराने वाले सीबीआई के एसपी का तबादला कर दिया जा चुका था. अब वित्त मंत्री के ब्लॉग लेखन को झटका क्यों लगा है. ICICI Bank और वीडियोकान मामले में जो फ्रॉड हुआ था उसकी जांच का काम रिटायर जस्टिस बी एन श्रीकृष्णा को दिया गया था. जिनकी रिपोर्ट मिलते ही बैंक के बोर्ड ने जो फैसला किया है लगता है उसकी आलोचना करने के लिए वित्त मंत्री को एक और ब्लॉग लिखना पड़ेगा. बैंक की ऑडिट कमेटी ने जस्टिस श्रीकृष्णा को जांच का काम सौंपा था. 

इस रिपोर्ट के आधार पर बैंक के बोर्ड ने चंदा कोचर को निकाल दिया है. चंदा कोचर को दिया जाने वाला बोनस वगैरह सब रोक लिया गया है. उन्हें अब कोई सुविधा नहीं मिलेगी. बकाया राशि भी नहीं दी जाएगी. उन्हें जो शेयर वगैरह मिले थे अब सब रोक लिए जाएंगे. जस्टिस श्रीकृष्णा ने अपनी जांच में चंदा कोचर को दोषी पाया है. बताया है कि उनके कार्यकाल में नियमों को तोड़ कर कई फैसले लिए गए और उसकी जानकारी बैंक की सालाना रिपोर्ट से छिपाई गई. अब आप सोचिए. जेटली सीबीआई को एफआईआर में बैंकरों के नाम लेने पर लताड़ रहे हैं मगर वहीं आईसीआईसीआई का बोर्ड जस्टिस श्रीकृष्ण की रिपोर्ट पर चंदा कोचर को निकाल रहा है. ज़ाहिर है अगर चंदा कोचर ने नियमों को तोड़ा है तो इसका लाभ किसी और को भी मिला है. उन्होंने अकेले फैसला तो नहीं लिया होगा. तो अब क्या वित्त मंत्री जेटली आईसीआईसीआई बोर्ड को भी ब्लॉग लिखेंगे कि बोर्ड इनवेस्टिगेशन एडवेंचरिज़्म का शिकार हो गया है. 


इस पर अगला ब्लॉग आ जाएगा तभी चर्चा करेंगे. उधर राहुल गांधी ने आज फिर तालकटोरा स्टेडियम में यूनिवर्सल बेसिक इंकम के बारे में समझाया. उन्होंने दो बातें कहीं. एक तो इस स्कीम के पक्ष में और दूसरा उद्योगपतियों को. राहुल ने उद्योगपतियों से कहा कि कांग्रेस उद्योगपतियों के खिलाफ नहीं है. राहुल ने चार पांच उद्योगपतियों के नाम तो लिए मगर मुझे लगता है कि क्रोनी पूंजीपतियों की सूची में शामिल कुछ का नाम नहीं लिया. क्या राहुल को सबका नाम लेने में कोई दिक्कत है. बहरहाल उनका यह बयान सुनिए क्योंकि हमारी चर्चा यूनिवर्सल बेसिक इंकम पर है.

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बजट आने वाला है. हो सकता है बजट में भी यूनिवर्सल बेसिक इंकम का कोई मॉडल हो इसलिए हमने सोचा कि 2016-17 के आर्थिक सर्वेक्षण में पहली बार सरकारी दस्तावेज़ में इस स्कीम की बात करने वाले अरविंद सुब्रमण्यन से बात करते हैं. प्रो अरविंद सुब्रमण्यन हार्वड के कैनेडी स्कूल में पढ़ा रहे हैं. इन्होंने आर्थिक सर्वेक्षण में इसके बारे में लिखते हुए कहा था कि एक इंसाफ पसंद समाज में हर किसी को न्यूनतम आय की गारंटी मिलनी चाहिए. मेरा सवाल यही है कि जब समाज में इंसाफ हर स्केल पर मुश्किल हो. कोर्ट से लेकर हेल्थ तक पर, तो फिर प्रो सुब्रमण्यन का यह कॉन्‍सेप्‍ट किस बेसिस पर मिनिमम इंकम देकर समाज में इंसाफ कायम करता है.

क्या बेसिक इंकम सामाजिक सुरक्षा स्कीम है या फिर आर्थिक सहायता स्कीम है जिसके तहत आपको कुछ पैसे दिए जा रहे हैं. आप किसी से भी पूछ लें कि क्या उसे नई पेंशन व्यवस्था में भरोसा है, अर्थशास्त्री ही बता दें कि नई पेंशन व्यवस्था से किसने अपनी पेंशन जीने लायक कर ली है, तो फिर इनके सवालों का क्या होगा.
 


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