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अमेजॉन के खिलाफ कार्रवाई : क्या सुषमा भारत में ‘स्वराज’ ला पाएंगी?

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अमेजॉन के खिलाफ कार्रवाई : क्या सुषमा भारत में ‘स्वराज’ ला पाएंगी?

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की ट्विटर पर धमकी के बाद अमेजॉन की कनाडा शाखा ने तिरंगे वाले आपत्तिजनक पांवदान की बिक्री को अपनी वेबसाइट से हटा लिया. भविष्य में अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ इस कार्रवाई को जारी रखके क्या सुषमा स्वराज भारत में भी आपत्तिजनक उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा पाएंगी?    

माफीनामा पत्र के बाद अमेजॉन अब कानूनी छूट कैसे मांग सकती है?
अमेजॉन की भारतीय कंपनी अभी तक खुद को इंटरमीडियरी कहते हुए अमेरिका तथा विश्व की अन्य ग्रुप कंपनियों के प्रति अपनी जवाबदेही से इनकार करती रही है. इसके बावजूद अमेजन के सीईओ ने पिछले साल भारत में 5 बिलियन डॉलर निवेश की घोषणा की थी. भारतीय विदेश मंत्री के निर्देश के बाद कनाडा की साइट पर पांवदान की बिक्री रुकने और भारत के कंट्री मैनेजर अमित अग्रवाल द्वारा पत्र लिखकर माफी मांगने से यह साफ है कि अमेजॉन की सभी कंपनियां एक ही नेटवर्क का हिस्सा हैं और भारत में उनका रोल इंटरमीडियरी से अधिक है.

क्या ई-कॉमर्स कंपनियां भारत के कानून के दायरे में आएंगी
भारत में कारोबार के लिए अमेजॉन खुद को इंटरमीडियरी कहते हुए आईटी रुल्स 2011 के अनुसार कई कानूनी छूट हासिल करती है. अधिकांश ई-कॉमर्स कंपनियां अमेजॉन जैसा व्यवसायिक मॉडल रखती हैं जिनका रजिस्टर्ड ऑफिस एवं सर्वर अमेरिका में और उनकी आमदनी आयरलैंड जैसे टैक्स हेवन में जाती है. अमेजॉन कंपनी के कंट्री हेड का भारतीय विदेश मंत्री को पत्र महत्वपूर्ण कानूनी सबूत है, जिसके आधार पर वित्त मंत्रालय एवं गृह मंत्रालय इन कंपनियों को भारतीय कानून के दायरे में लाने के लिए प्रभावी कार्रवाई कर सकते हैं.


ई-कॉमर्स साइटों पर गैर-कानूनी उत्पादों की बिक्री पर कैसे लगे लगाम?
भारत का गलत नक्शा ई-कॉमर्स की वेबसाइटों पर दिखाया और बेचा जाता है जो गंभीर कानूनी अपराध है. ई-कॉमर्स कंपनियों की साइट पर तिरंगे वाली चप्पल, शराब एवं ड्रग्स की बिक्री से भी अनेक कानूनों का उल्लंघन होता है. इंटरनेट कंपनियों द्वारा लिंग निर्धारण क्लीनिक्स, रेव पार्टी, वेश्यावृत्ति, पोर्नोग्राफी और दहेज संबंधी विज्ञापनों पर सुप्रीम कोर्ट के अनेक आदेश के बावजूद सरकार उन पर कार्रवाई करने में विफल रही है. यदि सुषमा कनाडा में भारतीय कानून लागू करा सकती हैं तो भारत के बाजार में कानून लागू कराना उनकी और सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी तो बनती ही है!

ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा टैक्स-चोरी- ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार विश्व की 201 बड़ी कंपनियों में 188 कंपनियां अपनी आमदनी को पनामा और आयरलैंड जैसे टैक्स हैवन में चोरी करके रखती हैं. भारत में ई-कॉमर्स का 30 बिलियन डॉलर का कारोबार होने के बावजूद अधिकांश कंपनियां राज्य और केंद्र सरकार को समुचित टैक्स नहीं देती. अभी हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ई-कॉमर्स पर एंट्री टैक्स को अवैध घोषित कर दिया जिसके बावजूद  सरकार टैक्स सुधारों के लिए नहीं चेत रही. ई-कॉमर्स कंपनियों से टैक्स वसूली के लिए कठोर प्रावधान करने की बजाय, भविष्य में जीएसटी टैक्स प्रणाली से सभी सुधारों का दावा किया जा रहा है.    

अमेजॉन द्वारा कनाडा में पांवदान की बिक्री रोकने की सांकेतिक सफलता के बाद सोशल मीडिया पर विदेश मंत्री और पीएम की तारीफ के कसीदे पढ़े जा रहे हैं. पर असल सवाल यह है कि अमेजॉन जैसी कंपनियों को कानून के दायरे में लाकर क्या सुषमा भारत में वास्तविक ‘स्वराज’ ला पाएंगी?


विराग गुप्ता सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ हैं...

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