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पाकिस्तान पर मोदी सरकार की ढुलमुल नीति...

आतंकवाद पर पाकिस्तान के चेहरे को बेनकाब करते हुए भारत ने प्रस्तावित विदेश मंत्री स्तर की मुलाकात रद्द कर दी है. इस फैसले के बाद पाकिस्तान को लेकर मोदी सरकार की ढुलमुल नीति सबके सामने आ गई है.

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पाकिस्तान पर मोदी सरकार की ढुलमुल नीति...

आतंकवाद पर पाकिस्तान के चेहरे को बेनकाब करते हुए भारत ने प्रस्तावित विदेश मंत्री स्तर की मुलाकात रद्द कर दी है. लेकिन इस फैसले के बाद पाकिस्तान को लेकर मोदी सरकार की ढुलमुल नीति सबके सामने आ गई है, जिसमें कभी हां होती है तो कभी ना. भारत ने कहा कि आतंकवाद पर पाकिस्तान के दोहरे रवैये को पूरी दुनिया ने देख लिया है. पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान बचकाना है. पाकिस्तान अमन के हक में है और यह पूरी दुनिया देख रही है.

विदेश मंत्रालय ने कल ही एलान किया था कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से मुलाकात होगी, लेकिन चौबीस घंटों के भीतर ही मुलाकात रद्द करने का फैसला किया गया. भारत का कहना है कि जब मुलाकात का ऐलान हुआ उसके बाद से दो घटनाएं हुई हैं. एक तो जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों ने तीन पीएसओ को अगवा कर मार डाला. दूसरा पाकिस्तान ने मारे गए आतंकवादियों को हीरो बनाते हुए डाक टिकट जारी कर दिया गया. इसके बाद सरकार में शीर्ष स्तर पर विचार हुआ कि आखिर ऐसे माहौल में पाकिस्तानी विदेश मंत्री से मुलाकात का क्या औचित्य है?

दरअसल, इमरान खान के पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पत्र लिख कर बधाई दी थी. इसके जवाब में इमरान ने पत्र लिख कर कहा था कि न्यूयॉर्क में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात होनी चाहिए. इसी के बाद भारत सरकार ने यह ऐलान किया था. हालांकि इससे पहले पाकिस्तानी सैनिक बीएसएफ के एक जवान की हत्या कर उनके शव के साथ बर्बरता कर चुके थे. ऐसे में अब विदेश मंत्रालय ने बेहद कड़े बयान में सीधे इमरान खान पर ही सवाल उठा दिया है. इस बातचीत के फैसले का घरेलू स्तर पर तीखा विरोध हो रहा था. कांग्रेस लगातार सवाल पूछ रही थी कि बिगड़े माहौल में पाकिस्तान से बातचीत का क्या मतलब है? कांग्रेस ने मोदी सरकार की पाकिस्तान नीति पर भी सवाल उठाए हैं.


पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरकार पर निशाना साधा था. उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि रक्षा मंत्री ने सोमवार को कहा - बातचीत नहीं होगी. गृहमंत्री ने मंगलवार को कहा- बातचीत नहीं होगी. रक्षामंत्री ने बुधवार को कहा-बातचीत नहीं होगी. विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा-विदेश मंत्रियों की मुलाक़ात होगी. यह एक सीख है कि कैसे विदेश नीति बनाई जाती है. कांग्रेस का दबाव यहीं तक नहीं रुका. पार्टी ने बाकयादा प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार के फैसले पर सवाल उठाया था. पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने पूछा कि एक बदले 10 सिर लाने वाली बात भी क्या एक जुमला थी. 

कश्मीर के शोपियां की घटना दिल दहला देने वाली है. तीन पुलिसवालों को आज आतंकवादियों ने सवेरे उनके घरों से खींच कर निकाला. कुछ देर बाद गोलियां बरसा कर उनकी हत्या कर दी. उनके शव थोड़ी दूर पर मिले. इस घटना के बाद ही सरकार पर बैठक रद्द करने का दबाव बढ़ा. भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत 2015 से नहीं हो रही है. तब एक के बाद एक कई आतंकवादी हमले हुए थे. इनमें उड़ी में हुआ हमला भी शामिल है, जिसमें 19 सैनिक मारे गए थे. इसी के बाद भारत ने नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तानी आतंकवादी कें पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी. 

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(अखिलेश शर्मा NDTV इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

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