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'ऑपरेशन बालाकोट' में मरने वाले आतंकियों की संख्या पर सियासत!

एक सवाल देश में कई लोगों को बेहद परेशान कर रहा है. बालाकोट हमले में कितने आतंकवादी मारे गए? सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह संख्या तीन सौ है तो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कम से कम ढाई सौ आतंकवादियों के मरने की बात कही.

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'ऑपरेशन बालाकोट' में मरने वाले आतंकियों की संख्या पर सियासत!

एक सवाल देश में कई लोगों को बेहद परेशान कर रहा है. बालाकोट हमले में कितने आतंकवादी मारे गए? सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह संख्या तीन सौ है तो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कम से कम ढाई सौ आतंकवादियों के मरने की बात कही. कृषि मंत्री राधामोहन सिंह कह रहे हैं कि चार सौ आतंकवादी मारे गए. एक बात बिल्कुल साफ है. किसी भी ऑपरेशन की कामयाबी की पुष्टि तीन जरियों से ही हो सकती है. या तो वायुसेना कहे कि हमला सही निशाने पर किया गया. दूसरा जमीनी खुफिया जानकारी बताए कि हमला कितना कामयाब रहा और तीसरा जरिया तकनीक से जुटाई जानकारी, जिसमें निशाने पर हमले से पहले मौजूद लोगों की संख्या का आकलन हो ताकि हमले में उनके मरने की पुष्टि हो सके.

इस मामले में वायुसेना ने कहा कि हमला सटीक था और निशाना नष्ट हुआ. जमीनी खुफिया जानकारी के मुताबिक कई एंबुलेंस जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने पर जाते हुए देखी गईं और एनटीआरओ ने हमले से पहले वहां कम से कम तीन सौ मोबाइल फोन सक्रिय होने की बात कही थी. आज गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा कि वहां तीन सौ मोबाइल सक्रिय थे. इन सबको मिला कर यह पक्के तौर पर कहा जा सकता है कि बालाकोट में बड़ी संख्या में आतंकवादी ढेर हुए और मिशन कामयाब रहा.


भारतीय अधिकारियों ने पूछा है कि बालाकोट का इलाका अभी तक पाकिस्तान ने क्यों नहीं दिखाया. उन्होंने यह भी कहा कि फिर आतंकी हमला हुआ तो सारे विकल्प खुले हैं. उन्होंने कहा कि नए पाकिस्तान को नया ऐक्शन करके दिखाना होगा. शायद बात पाकिस्तान तक पहुंच भी गई. आज पाकिस्तान में प्रतिबंधित संगठन के 44 आतंकवादी पकड़े गए. इनमें मसूद अजहर का भाई मुफ्ती अब्दुल रऊफ शामिल है, जिसने इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी 814 का अपहरण किया था. मसूद अजहर का बेटा हम्माद अजहर भी हिरासत में लिया गया है. ये वो आतंकवादी हैं, जिनके नाम भारत के डोजियर में हैं. तो क्या 13 मार्च को संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर के खिलाफ संभावित कार्रवाई को रोकने के लिए पाकिस्तान यह दिखावा कर रहा है? 

 

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(अखिलेश शर्मा NDTV इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति एनडीटीवी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार एनडीटीवी के नहीं हैं, तथा एनडीटीवी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.



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