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कर्नाटक में सियासी नाटक, फायदा किसको?

ऐसा लगता है कि बीजेपी का मिशन कर्नाटक सिरे नहीं चढ़ सका है. ऑपरेशन लोटस पार्ट-टू में बीजेपी को फिलहाल कामयाबी मिलती नहीं दिख रही है.

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कर्नाटक में सियासी नाटक, फायदा किसको?

ऐसा लगता है कि बीजेपी का मिशन कर्नाटक सिरे नहीं चढ़ सका है. ऑपरेशन लोटस पार्ट-टू में बीजेपी को फिलहाल कामयाबी मिलती नहीं दिख रही है. बीजेपी की कोशिश थी कि कांग्रेस के कम से कम 13 विधायक इस्तीफा दें, ताकि बहुमत का आंकड़ा कम हो और बीजेपी दो निर्दलीयों की मदद से बहुमत साबित कर सके. कहा जा रहा था कि मुंबई में एक पांच सितारा होटल में रुके कांग्रेस के नाराज तीन विधायक इस्तीफा दे सकते हैं, लेकिन देर रात तक ऐसा नहीं हुआ. उधर कांग्रेस के गायब पांच विधायकों में से दो वापस आ गए हैं.

कर्नाटक में 224 विधायक हैं. मुख्यमंत्री कुमारस्वामी को कांग्रेस के 80, जनता दल सेक्यूलर के 37 और बीएसपी के एक विधायक का समर्थन है. एक मनोनीत विधायक का भी समर्थन भी उन्हें है. इस तरह उनके पास 119 विधायक हैं जो बहुमत के आंकड़े 113 से ज्यादा हैं. उधर बीजेपी के पास 104 विधायक हैं और दो निर्दलीयों को मिलाकर उसके पास 106 विधायक हैं. बीजेपी के ऑपरेशन लोटस पार्ट-2 में कोशिश है 13 कांग्रेसी विधायकों के इस्तीफे दिलाने की ताकि बहुमत का  आंकड़ा घटकर 106 रह जाए और बीजेपी सरकार बना ले.

इस बीच बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार और मिशन कर्नाटक के सूत्रधार पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को दिल्ली से वापस बेंगलुरु जाना पड़ा है. ऐसा इसलिए क्योंकि उनके गुरु तुमकुर स्वामी की हालत बिगड़ गई है. वैसे तो गुरुग्राम के होटल में ठहराए गए बीजेपी के विधायकों को अभी वहीं रुकने को कहा गया है, लेकिन संभावना है कि येदियुरप्पा के जाते ही वे भी एक-एक वहां से खिसक लें. उधर, कांग्रेस ने अपने विधायकों की एकजुटता दिखाने के लिए शुक्रवार को बेंगलुरु में विधायक दल की बैठक बुला ली है. कांग्रेस का दावा है कि इसमें सभी अस्सी विधायक मौजूद रहेंगे. उसका आरोप है कि यह पीएम मोदी और अमित शाह के इशारे पर हो रहा है.


कांग्रेस और बीजेपी की माथापच्ची के बीच मुख्यमंत्री कुमारस्वामी मज़े में हैं. कल उन्होंने इत्मीनान से अपने बेटे की फिल्म देखी और आज सरकारी काम निपटाए. उन्हें पता है कि कांग्रेस और बीजेपी की आपसी लड़ाई में उनका बाल भी बांका नहीं होना वाला. हालत यहां तक है कि बीजेपी का एक धड़ा चाहता है कि बीजेपी जनता दल सेक्यूलर के साथ हाथ मिला ले. लेकिन इसमें येदियुरप्पा अड़चन बने हुए हैं. रहा सवाल बीजेपी आलाकमान का तो वो फिलहाल खामोश है. यह जरूर कहा गया कि अगर सरकार बनती है तो बना ली जाए, लेकिन ऐन चुनाव से पहले तोड़फोड़ इस तरह न की जाए कि पार्टी को शर्मिंदगी उठानी पड़े. लेकिन बीजेपी आलाकमान एक बात जरूर चाहता है. वो यह कि कांग्रेस और जेडीएस मिलकर चुनाव न लड़ें. यही वजह है कि कुमारस्वामी की कुर्सी को फिलहाल खतरा नहीं दिखता, क्योंकि अगर कांग्रेस उनके साथ नहीं रहेगी तो बीजेपी साथ आने और समर्थन देने को तैयार बैठी है. कुल मिला कर कर्नाटक का नाटक बीजेपी पर भारी पड़ता दिख रहा है.

 

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(अखिलेश शर्मा NDTV इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति एनडीटीवी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार एनडीटीवी के नहीं हैं, तथा एनडीटीवी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.



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