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2019 का मुद्दा- मोदी हटाओ बनाम सुशासन और विकास

पीएम नरेंद्र मोदी ने महागठबंधन बनाने की विपक्ष की कोशिशों को आड़े हाथों लिया, कहा- विपक्ष का गठबंधन देश के हित के लिए नहीं बल्कि अपना अस्तित्व बचाने के लिए

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2019 का मुद्दा- मोदी हटाओ बनाम सुशासन और विकास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन 2019 के लिए अपना एजेंडा और मुद्दे जनता के सामने रख दिए हैं. एक वेबसाइट स्वराज्य को दिए इंटरव्यू में पीएम मोदी ने महागठबंधन बनाने की विपक्ष की कोशिशों को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने कहा कि विपक्ष के ये गठबंधन देश के हित के लिए नहीं बल्कि अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई है. पीएम ने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास कोई एजेंडा नहीं है सिवाए मोदी हटाने के.

पीएम मोदी कहते हैं कि महागठबंधन की तुलना 1977 और 1989 से करना ठीक नहीं है क्योंकि 77 में विपक्ष आपातकाल के खिलाफ एक हुआ था तो वहीं 89 में बोफोर्स के भ्रष्टाचार के खिलाफ. पीएम ने कहा कि पचमढ़ी अधिवेशन में कांग्रेस गठबंधन के खिलाफ थी लेकिन अब सहयोगी ढूंढने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है. हर गठबंधन में एक मजबूत पार्टी का होना जरूरी है लेकिन कांग्रेस एक क्षेत्रीय पार्टी बनकर रह गई है. सिर्फ पंजाब, मिजोरम और पुड्डुचेरी में उसकी सरकार है जबकि दिल्ली, आंध्र प्रदेश और सिक्किम में विधानसभा में उनका एक भी सदस्य नहीं है. देश की जनता जानती है कि कांग्रेस सहयोगियों का क्या हश्र करती है. वो चाहे किसान नेता चौधरी चरणसिंह हों या एचडी देवेगौड़ा, या फिर चंद्रशेखर जैसे समाजवादी हों, या मंत्री रहते हुए वीपी सिंह के साथ क्या किया.

पीएम ने विपक्ष में प्रधानमंत्री पद की दौड़ और होड़ पर चुटकी ली. उन्होंने कहा कि विपक्ष में कोई महागठबंधन नहीं है बल्कि पीएम बनने की महादौड़ है. राहुल गांधी कहते हैं कि वे पीएम बनने को तैयार हैं लेकिन तृणमूल कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं है. ममताजी पीएम बनना चाहती हैं लेकिन लेफ्ट इसके लिए तैयार नहीं. समाजवादी पार्टी को लगता है कि उनके नेता पीएम बनने के सबसे योग्य हैं. मोदी के खिलाफ नफरत विपक्ष को एक कर रही है. यूपी में ये पार्टियां 1993 में सरकार बनाने के लिए साथ आईं लेकिन दो साल भी सरकार नहीं चला पाईं. आगे क्या हो सकता है, इसका एक नमूना कर्नाटक में देखने को मिल रहा है. जहां जनादेश चुराकर सरकार बनाई लेकिन झगड़े जारी हैं.

जब पीएम मोदी से पूछा गया कि आज एनडीए भी कमजोर हुआ है तो पीएम ने कहा कि एनडीए 20 पार्टियों का एक बड़ा परिवार है. उन्होंने कहा कि 2014 से पहले पूछा जाता था कि मोदी के नाम पर सहयोगी कहां से आएंगे लेकिन तब भी 20 पार्टियों का गठबंधन था. हम अकेले सरकार बना सकते थे लेकिन हमने सहयोगियों को साथ लिया और उन्हें सरकार में शामिल किया. पीएम से पूछा गया कि बीजेपी अपना सामाजिक आधार बढ़ाने के लिए क्या कर रही है? इस पर उन्होंने कहा कि एक जमाने में बीजेपी को ब्राह्मण बनिया पार्टी कहा जाता था, फिर कहा गया कि यह सिर्फ शहरों की और उत्तर भारत की पार्टी है. यह एक गलत प्रचार है. हमें गुजरात में 49 फीसदी वोट मिले और हम वहां 27 वर्षों से सत्ता में हैं. यह अपने व्यापक आधार को बताने के लिए काफी है. जब उनसे पूछा गया कि क्या यूपी जैसे राज्यों में बीजेपी कमजोर हो रही है तो इस पर पीएम ने कहा कि इस पर आपको हमेशा दो राय मिलती हैं या तो हवा है या फिर हवा खत्म हो गई. बाकी आप अपनी राय बनाने के लिए स्वतंत्र हैं.

पीएम ने आपातकाल को लेकर कांग्रेस पर हमला किया और कहा कि 47 के बाद से यह सबसे अंधकार का समय था. उन्होंने कहा कि सत्ता में रहने पर कांग्रेस के नेताओं ने सेना प्रमुख और सीएजी को निशाना बनाया. जब 2009 और कई राज्यों में जीते तब उन्हें ईवीएम में गडबड़ी नहीं मिली. सर्जिकल स्ट्राइक पर उन्होंने सेना का मजाक बनाया.

साथ ही उन्होंने अपनी सरकार की चार साल की उपलब्धियां भी गिनाईं. पीएम के तेवरों से साफ है कि कम से उन्होंने 2019 के लिए अपने मुद्दे तय कर लिए हैं. सवाल यह है कि जनता इन मुद्दों को कैसे लेगी? क्या मोदी हटाओ की बात इंदिरा हटाओ जैसी नहीं सुनाई देती? क्या विपक्ष के पास पीएम का कोई चेहरा न होना, बीजेपी के पक्ष में जाएगा?

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(अखिलेश शर्मा एनडीटीवी इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

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इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति एनडीटीवी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार एनडीटीवी के नहीं हैं, तथा एनडीटीवी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.



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