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बीमार के दीदार और सियासत के दांव

मनोहर पर्रिकर ने पत्र लिखा- बीमारी का हाल पूछने के बहाने मिलने आए राहुल गांधी, लेकिन इस मुलाकात का निम्न स्तरीय राजनीतिक हितों को साधने के लिए इस्तेमाल किया

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बीमार के दीदार और सियासत के दांव

'उनके देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक, वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है.'  वैसे रौनक तब आती है जब बीमार का दीदार रौनक लाने वाले शख्स से हो. लेकिन बीमार से कोई ऐसा शख्स मिल ले जो उसका तनाव और बढ़ा दे तो बात बिगड़ भी जाती है. बात हो रही है गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की जो एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. निजी यात्रा पर गोवा गए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कल उनसे मिलने उनके दफ्तर पहुंच गए थे. बाद में कोची में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की बैठक में उन्होंने पर्रिकर का जिक्र किया और कहा कि वे राफेल सौदे में अपनी भूमिका से इनकार कर चुके हैं. यही बात राहुल गांधी ने आज तालकटोरा स्टेडियम में दोहराई.

इसके बाद पर्रिकर ने राहुल गांधी को चिट्ठी लिखी है. उन्होंने राहुल गांधी के बयान की निंदा की. पत्र में पर्रिकर ने लिखा कि वे बीमारी का हाल पूछने के बहाने उनसे मिलने आए लेकिन उन्होंने इस मुलाकात का अपने निम्न स्तरीय राजनीतिक हितों को साधने के लिए इस्तेमाल किया. पर्रिकर ने लिखा कि राहुल बिना किसी पूर्व सूचना के उनसे मिलने आ गए. पर्रिकर ने लिखा कि पांच मिनट की मुलाकात में न तो राफेल का जिक्र हुआ और न ही उन्होंने राफेल संबंधी कोई चर्चा की. पर्रिकर ने लिखा कि वे पहले भी कई बार कह चुके हैं और एक बार फिर कह रहे हैं कि राफेल सौदा दो सरकारों के बीच है और इसमें सभी नियमों का पालन किया गया. इसमें दूर-दूर तक कोई गड़बड़ी नहीं हुई है. यह पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकताओं के आधार पर तय नियामकों के तहत हुई है.


पर्रिकर ने आगे लिखा कि शिष्टाचार भेंट के बहाने मेरे घर आकर फिर इतने निम्न स्तर का झूठ आधारित राजनीतिक बयान देना आपके मेरे घर आने के उद्देश्यों एवं इरादों को उजागर करता है. पर्रिकर लिखते हैं कि वे बीमारी में अपने जीवन के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं और गोवा की सेवा में लगे हैं. उन्होंने राहुल से आखिर में निवेदन किया कि किसी बीमार और अस्वस्थ व्यक्ति को अपनी अवसरवादी राजनीति का शिकार बनाने की नीयत न रखें.

इसके तुरंत बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का ट्वीट भी आ गया. उन्होंने लिखा प्रिय राहुल गांधी, बीमारी से जूझ रहे एक व्यक्ति के नाम पर झूठ बोलकर आपने दिखा दिया कि आप कितने संवेदनहीन हैं. भारत के लोग आपके व्यवहार से व्यथित हैं. मनोहर पर्रिकर ने वस्तुस्थिति बता दी है.

उधर, कांग्रेस के सूत्रों ने कहा है कि राहुल गांधी यह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यह एक निजी मुलाकात थी. अगर आप पर्रिकर का पत्र देखेंगे तो पाएंगे कि उन्होंने यह कहीं नहीं लिखा है कि उन्हें राफेल सौदे के रद्द होने की जानकारी थी. राहुल गांधी ने आज यही आरोप लगाया है.

कांग्रेस नेताओं के अनुसार राहुल गांधी ने यह कहीं नहीं कहा कि कल की मुलाकात में पर्रिकर ने उन्हें राफेल के बारे में कोई जानकारी दी. लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जिस तरह से अचानक राहुल गांधी पर्रिकर से मिलने पहुंचे और उसके बाद उन्होंने पर्रिकर का नाम लेकर पहले कोच्ची में फिर दिल्ली में बयान दिया उससे क्या यह मतलब नहीं निकलता कि इस मुलाकात के पीछे मकसद सिर्फ हालचाल पूछना ही नहीं बल्कि कुछ और भी था. तो आखिर इसका सच क्या है? राहुल की बात सही है या फिर पर्रिकर की?

 

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(अखिलेश शर्मा NDTV इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

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