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राफेल सौदे पर और तेज हुई सियासी लड़ाई

बीजेपी ने भी कांग्रेस पर हमला करते हुए इस सौदे में सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को घसीट लिया

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राफेल सौदे पर और तेज हुई सियासी लड़ाई

सरकार ने राफेल सौदे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति जेपीसी के गठन की मांग ठुकरा दी है. सरकार का कहना है कि सीवीसी और सीएजी पहले से ही इस मामले को देख रहे हैं. इस बीच राफेल सौदे पर अब सियासी लड़ाई तेज़ हो गई है.

अब तक कांग्रेस ही हमलावर नज़र आ रही थी लेकिन बीजेपी ने भी कांग्रेस पर हमला करते हुए इस सौदे में सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को घसीट लिया है. पार्टी ने राहुल गांधी पर अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा बनने का भी आरोप लगाया है और साफ कहा है कि राहुल गांधी उन ताकतों का हिस्सा बन गए हैं जो इस सौदे को रद्द कर देश की सुरक्षा को कमजोर करना चाहते हैं.

मैदान में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी उतरीं जो फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयानों के बीच देश से बाहर थीं. उधर राहुल गांधी का हमला आज भी जारी है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा.

इस बीच कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य सतर्कता आयोग से मिला और इसकी जांच की मांग की. कुछ वीडियो भी जारी किए गए हैं जिनके जरिए दावा किया गया कि किस तरह देशी निर्माता एचएएल से सौदा करीब-करीब तय होने वाला था मगर उसे टाल दिया गया.


रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा कि इस सौदे को लेकर सरकार रक्षात्मक मुद्रा में नहीं है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जो भी आरोप लगा रहे हैं उनका पूरा जवाब दिया जाएगा. सीतारमण ने पत्रकारों से कहा कि  जब सीवीसी और सीएजी इस मामले को देख रहे हैं तो जेपीसी की क्या जरूरत है. हम इन आरोपों को लेकर चिंतित नहीं हैं क्योंकि यह पारदर्शी सौदा है. मैं खुद पूरे देश में प्रेस कांफ्रेंस कर राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दूंगी.  पार्टी के वरिष्ठ नेता पूरे देश में जाएंगे और लोगों को कांग्रेस के इरादों के बारे में बताएंगे.

बीजेपी ने कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को भी मैदान में उतारा. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी राफेल सौदे को रद्द कराना चाहते हैं.

बीजेपी ने सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ड वाड्रा को भी इस सौदे में लपेट लिया. पार्टी ने हथियारों के सौदागर संजय भंडारी का जिक्र कर आरोप लगाया कि वे वाड्रा के हिस्सेदार हैं और यूपीए उन्हें फायदा पहुंचाना चाहती थी. बीजेपी का कहना है कि जब दसां एविएशन ने भंडारी की मदद नहीं की तो यूपीए ने सौदा रद्द कर दिया.

इस बीच राहुल गांधी का प्रधानमंत्री पर हमला जारी है. वे आज अमेठी में थे. वहां भी उन्होंने राफेल सौदे का जिक्र किया. उन्होंने पूछा कि आखिर पीएम के फ्रांस जाने के बाद ऑफसेट हिस्सेदार को क्यों बदल दिया गया? उन्होंने फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद के हवाले से कहा कि देश की जनता के सामने सही तस्वीर आनी चाहिए. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री जानबूझकर राफेल सौदे पर चुप हैं. उन्होंने कहा कि वे हर चीज पर भाषण देते हैं मगर राफेल पर चुप क्यों हैं.

राहुल गांधी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड एचएएल को यह सौदा न मिलने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि अगर एचएएल को यह सौदा मिल गया होता तो अमेठी और कर्नाटक में हजारों लोगों को रोजगार मिलता.

एचएएल का मुद्दा आज कांग्रेस की ओर से भी उठाया गया. एक वीडियो ट्वीट किया गया जिसमें दसां के चेयरमैन दिखाई दे रहे हैं. इसमें वे कह रहे हैं कि भारत में एचएएल की ओर से 108 राफेल लड़ाकू विमान बनाने का करार जल्द ही होने वाला है. उन्होंने यह बात प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा से सिर्फ 17 दिन पहले कही थी. उस यात्रा में पीएम मोदी ने कहा था कि भारत फ्रांस से 36 लड़ाकू विमान खरीदने वाला है.

एक और सवाल उठा है. वह यह है कि अप्रैल 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी की फ्रांस यात्रा के पहले तक एचएएल बातचीत का हिस्सा था. फिर अलग कैसे हो गया? तत्कालीन विदेश सचिव एस जयशंकर ने 8 अप्रैल 2015 को एक प्रेस कांफ्रेंस की थी. इसमें कहा गया कि एचएएल बातचीत में शामिल है. उन्होंने कहा था कि जहां तक राफेल की बात है, मेरी समझ है कि फ्रांस की कंपनी, हमारे रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच बातचीत चल रही है. यह बहुत तकनीकी और विस्तृत बातचीत है. हम अपने नेतृत्व की यात्राओं को रक्षा सौदों के बारे में चल रही विस्तृत बातचीत से नहीं जोड़ते. यह अलग तरह से होती है. लेकिन सरकार का कहना है कि एचएएल को हमेशा ही रक्षा सौदों की बातचीत में शामिल किया जाता रहा है.

इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का एक दल आज मुख्य सतर्कता आयुक्त से मिला. उन्होंने इस पूरे मामले की जांच कराए जाने की मांग की.

हालांकि सरकारी सूत्रों ने साफ किया है कि राफेल सौदे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति नहीं बनाई जाएगी. उन्होंने कहा कि सीवीसी और सीएजी इस मामले को देख रहे हैं.

इस बीच ओलांद के बयान को लेकर फ्रांस में भी सियासत गर्मा रही है. फ्रांस के एक राज्य मंत्री ने कहा है कि ओलांद के बयान से फ्रांस का कोई भला नहीं हो रहा. हालांकि उन्होंने ओलांद के बयान को खारिज नहीं किया. इस बीच फ्रांस के विदेश राज्य मंत्री ने ओलांद के बयान की आलोचना की है.

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(अखिलेश शर्मा NDTV इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति एनडीटीवी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार एनडीटीवी के नहीं हैं, तथा एनडीटीवी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.


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