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भारत के अंगने में चीन का क्या काम?

बीजेपी पूछ रही है कि नेपाल जाते समय एयरपोर्ट पर राहुल गांधी से मिलने के लिए भारत में चीन के राजदूत क्यों आए?

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भारत के अंगने में चीन का क्या काम?
भारत की सियासत में चीन का क्या काम? लेकिन गाहे-बगाहे हर बात में चीन का जिक्र कुछ वैसे ही हो रहा है जैसे अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में रूस का हुआ था. वैसे बात अभी वहां तक नहीं पहुंची है और न ही किसी ने वैसे आरोप लगाए हैं लेकिन हर बात में चीन का जिक्र कई सवाल खड़े जरूर कर रहा है.

ताजा मामला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के कैलाश मानसरोवर यात्रा का है. राहुल गांधी नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर गए हैं. लेकिन बीजेपी पूछ रही है कि नेपाल जाते समय एयरपोर्ट पर उनसे मिलने के लिए भारत में चीन के राजदूत क्यों आए? समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक भारत में चीनी दूतावास ने विदेश मंत्रालय से अपने कौंसिलर ज़ू यून के लिए इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जाने के लिए अस्थाई पास मांगा ताकि वे राहुल गांधी से मिल सकें. इससे बीजेपी को बड़ा मुद्दा हाथ लग गया है. बीजेपी ने तंज कसते हुए राहुल को याद दिलाया कि वे राहुल गांधी हैं, चाइनीज गांधी नहीं. बीजेपी राहुल गांधी से यह भी पूछ रही है कि पिछले कुछ दिनों से वे चीन के प्रवक्ता की तरह बात क्यों कर रहे हैं?

बीजेपी ने एक फिल्म भी दिखाई. इसमें राहुल गांधी के चीन से जुड़े कई बयान हैं. इन बयानों में भारत की तुलना चीन से की गई है. मिसाल के तौर पर यह बयान जिसमें राहुल कह रहे हैं कि मोदी के भारत में चीन के मुकाबले लोगों को नौकरियां नहीं मिलतीं.

बीजेपी ने हाल के विदेश दौरे में राहुल के डोकलाम मुद्दा उठाने का भी जिक्र किया है. इसमें राहुल ने कहा था कि डोकलाम में अब भी चीनी सेना मौजूद है. हालांकि जब राहुल से यह पूछा गया कि वे डोकलाम मुद्दे से किस तरह पेश आते तो इस पर उन्होंने कहा कि वे इसका जवाब नहीं दे सकते क्योंकि उनके पास इससे जुड़ी जानकारियां नहीं हैं. इस पर बीजेपी ने राहुल से पूछा है कि जब डोकलाम घटना के दौरान वे चीन के राजदूत से मिले थे क्या तब जानकारियां इकट्ठा नहीं की थीं.

राहुल गांधी चीन की विकेंद्रित राजनीतिक व्यवस्था की भी तारीफ कर चुके हैं. बीजेपी इस पर भी निशाना साध रही है. उधर कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस भी चीन को लेकर बीजेपी और खासतौर से पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधती रही है. कांग्रेस पूछती रही है कि चीन के प्रीमियर की भारत यात्रा के समय पीएम मोदी उनके साथ झूला क्यों झूल रहे थे. डोकलाम विवाद के समय कांग्रेस ने चीन के साथ नरम-गरम रिश्तों को लेकर भी पीएम मोदी पर कई सवाल खड़े किए थे.

इस बीच, चीन को लेकर बीजेपी का एक दस्तावेज़ आया है जिससे बीजेपी की चीन को लेकर ढुलमुल नीति पता चलती है. आज इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक बीजेपी ने दो महीने पहले अपनी महिला कार्यकर्ताओं को जो हिंदी बुकलेट बांटी उसमें चीन को भारत और भारतीय हितों के लिए खतरा बताया. यह भी लिखा गया कि चीन भारत के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए गंभीर नहीं है. लेकिन अब अंग्रेजी में छपी बुकलेट में मसौदा बदल दिया गया है. बीजेपी अब कह रही है कि "पहले यह लगता था कि चीन सीमा विवाद सुलझाने के लिए गंभीर नहीं है, लेकिन अब पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद इसमें सकारात्मक बदलाव आया है."

चीन को लेकर भारतीय राजनीति में इस तरह का असमंजस कोई नई बात नहीं है. लेकिन इस बार नई बात घरेलू राजनीति में चीन का नए तरह से जिक्र है. राहुल गांधी बार-बार अपने भाषणों में चीन को जिस तरह से अमेरिका के समकक्ष बताकर भारत से उसकी तुलना कर रहे हैं उससे कांग्रेस की नई सोच पता चल रही है. राहुल गांधी कहते हैं कि अमेरिका के साथ अच्छे रिश्ते होने चाहिए लेकिन रिश्तों में संतुलन होना चाहिए और इसी संदर्भ में वे चीन और अन्य देशों का भी जिक्र कर रहे हैं. ऐसे में जबकि वे अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री पद के मजबूत दावेदार हैं, चीन को लेकर उनके रुख पर सबकी नजरें रहेंगी.

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(अखिलेश शर्मा NDTV इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति एनडीटीवी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार एनडीटीवी के नहीं हैं, तथा एनडीटीवी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.



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